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शिशु रोग विशेषज्ञ दूसरों तक पहुंचा रहे अपना ज्ञान
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हम किसी को एक बात बताते हैं तो वह इंसान उसे आगे 10 लोगों को आसानी से बता सकता है। इस तरह एक चेन के माध्यम से हम अपने ज्ञान को दूसरे लोगों तक फैला सकते हैं। कुछ ऐसा ही प्रयास पीजीआईएमएस के शिशु रोग विभाग के विशेषज्ञ कर रहे हैं। प्रदेश के चिकित्सकों को शिशुओं की देखभाल का प्रशिक्षण देना इसी का हिस्सा है। यह कहना है पीजीआईएमएस के एनेस्थिसियोलॉजी एवं क्रिटिकल केयर विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत कुमार का। वे मंगलवार को संस्थान की स्किल लैब में पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र व फतेहाबाद जिले करीब 30 चिकित्सकों को शिशुओं की आईसीयू में देखभाल का प्रशिक्षण दे रहे थे।
डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि तीसरी लहर के अंदेशे को देखते हुए इतने कम समय में सभी अस्पतालों के समस्त चिकित्सकों व स्टाफ नर्सों को प्रशिक्षण देना असंभव है। ऐसे में कुछ चिकित्सकों व स्टाफ को ट्रेनिंग प्रदान की जा रही है। ये अपने अस्पताल में जाकर सभी को शिशुओं की देखभाल के लिए प्रशिक्षित कर सकेंगे। इससे तीसरी लहर का मुकाबला करना आसान होगा। इस प्रशिक्षण में चिकित्सकों को कृत्रिम अंगों पर शिशुओं को उपचार देना सिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति या गंभीर मरीज में सबसे पहले मूल्यांकन व प्रबंधन किया जाता है। बुधवार को सभी प्रतिभागियों को वेंटिलेटर व कोविड प्रोटोकाल पर अभ्यास करके उनका आत्मविश्वास बढ़ाया जाएगा। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. कुंदन मित्तल ने कहा कि चिकित्सकों व अन्य स्टाफ को नवीनतम तकनीक से अपडेट रखने की जरूरत है। मरीजों के हित में कार्य करना चाहिए। इसीलिए संस्थान ने मरीजों के हित में अग्रणीय भूमिका निभाते हुए प्रदेश के चिकित्सकों को शिशुओं की कोविड में देखभाल करने का प्रशिक्षण प्रदान करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उठाई है। इस प्रशिक्षण में डॉ. वंदना, डॉ. विरेंद्र व डॉ. मनीषा मनोहर सहयोग कर रहे हैं।
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डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि तीसरी लहर के अंदेशे को देखते हुए इतने कम समय में सभी अस्पतालों के समस्त चिकित्सकों व स्टाफ नर्सों को प्रशिक्षण देना असंभव है। ऐसे में कुछ चिकित्सकों व स्टाफ को ट्रेनिंग प्रदान की जा रही है। ये अपने अस्पताल में जाकर सभी को शिशुओं की देखभाल के लिए प्रशिक्षित कर सकेंगे। इससे तीसरी लहर का मुकाबला करना आसान होगा। इस प्रशिक्षण में चिकित्सकों को कृत्रिम अंगों पर शिशुओं को उपचार देना सिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी आपात स्थिति या गंभीर मरीज में सबसे पहले मूल्यांकन व प्रबंधन किया जाता है। बुधवार को सभी प्रतिभागियों को वेंटिलेटर व कोविड प्रोटोकाल पर अभ्यास करके उनका आत्मविश्वास बढ़ाया जाएगा। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. कुंदन मित्तल ने कहा कि चिकित्सकों व अन्य स्टाफ को नवीनतम तकनीक से अपडेट रखने की जरूरत है। मरीजों के हित में कार्य करना चाहिए। इसीलिए संस्थान ने मरीजों के हित में अग्रणीय भूमिका निभाते हुए प्रदेश के चिकित्सकों को शिशुओं की कोविड में देखभाल करने का प्रशिक्षण प्रदान करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी उठाई है। इस प्रशिक्षण में डॉ. वंदना, डॉ. विरेंद्र व डॉ. मनीषा मनोहर सहयोग कर रहे हैं।
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