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पार्श्वनाथ सिटी के पार्श्वनाथ सिटी के 104 एकड़ के लेआउट प्लान को हरी झंडी, 45 दिन तक चलेगा निशानदेही का काम, फरवरी तक मिलेगा कब्जा

Mon, 30 Dec 2019 02:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 30 Dec 2019 02:24 AM IST
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parsharvnath city case
रोहतक। पार्श्वनाथ सिटी में बसने वाले 800 से अधिक आवंटियों को प्लाट पर कब्जा देने के मामले में हरियाणा रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (हरेरा) के आदेशों पर जिला योजनाकार विभाग ने 104 एकड़ से अधिक का रिवाइज्ड नक्शा पास कर दिया है। 23 दिसंबर को विभाग ने लेटर जारी किया है। इसी को लेकर सभी प्लाट धारक जाट भवन के पास सेक्टर दो की मार्केट में पार्श्वनाथ बायर्स एसोसिएशन के दफ्तर पर इकट्ठे हुए और एक दूसरे को बधाई दी। पार्श्वनाथ बायर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी ने बताया कि अब निशानदेही के बाद प्लाट धारकों को फरवरी माह के आखिरी सप्ताह तक कब्जा मिल जाएगा। जिला नगर योजनाकार विभाग की ओर नये ले आउट प्लान पर मंजूरी के बाद 800 परिवारों ने राहत की सांस ली है। हुडा के सेक्टर-33 व 33 ए में पार्श्वनाथ सिटी का प्रोजेक्ट है। इसका लाइसेंस 2009 में जारी हुआ था।
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2009 में बिल्डर की ओर से इस प्रोजेक्ट को गांव बोहर की जमीन पर बसाया गया था। काटे प्लाटों पर अब तक आवंटियों को कब्जा ऑफर नहीं हुआ था। बिल्डर की ओर से 180 एकड़ जमीन खरीदी गई थी, जिसमें से 118 एकड़ पर लाइसेंस मिला था। लाइसेंस एरिया की 14 एकड़ जमीन को एचएसआईआईडीसी ने अधिग्रहीत कर लिया। इस कारण अब कंपनी को बची हुई जमीन पर नए ले आउट प्लान की मंजूरी लेनी थी, जो अब मिली है। इसकी मंजूरी के बाद संशोधित प्लाटों पर ही आवंटियों को कब्जा दिया जाएगा।
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बिल्डर द्वारा विकास शुल्क जमा न कराने से अटका था प्लाट आवंटन का कार्य
पार्श्वनाथ बायर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी ने बताया कि प्लाट खरीदने वालों को सरकार को प्रति गज एक निश्चित राशि देनी होती है, जिसे ईडीसी (आंतरिक विकास शुल्क)व आईडीसी (बाहरी विकास शुल्क) कहा जाता है। इस राशि को प्लाट खरीदने वालों ने 2800 रुपये प्रति गज कंपनी को जमा करा दिया था। कंपनी ने यह राशि सरकार को नहीं जमा कराई, जिस कारण कंपनी का लाइसेंस तीन साल बाद रिन्यू नहीं हो सका। इस कारण वो प्लाट धारकों को कब्जा नहीं दे सके थे।
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अब निशानदेही का चलेगा डेढ़ माह तक काम
हरेरा ने जिला नगर योजनाकार विभाग को निशानदेही के लिए 45 दिन का समय दिया है। इसमें जोनी और डिमार्केशन होगी। जोनी में विभाग को यह देखना होगा कि क्षेत्र में सीवर, गलियां, ब्लॉक सभी सही तरीके से हैं या नहीं। वहीं डिमार्केशन में प्लाट नंबर आवंटित करने होते हैं। योजनाकार विभाग को फरवरी में यह रिपोर्ट देनी है, जिसके बाद प्लाट धारकों को उनके प्लाटों पर कब्जा मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
कोर्ट के आदेश के बाद मिली मंजूरी
वर्षों से चल रहे इस मामले में सात अगस्त 2019 को पार्श्वनाथ सिटी (कंपनी) ने कोर्ट के आदेशों पर पब्लिक नोटिस जारी किया था कि कंपनी द्वारा नया नक्शा पास किया जा रहा है। जिस प्लाट धारक को कोई आपत्ति है वो अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है। जिसमें 17 लोगों ने आपत्ति दर्ज कराई कि उनसे प्रेफरेंशियल लोकेशन चार्ज (प्लाट की विशेष भौगोलिक स्थिति होने के कारण वसूली गई अतिरिक्त राशि) लिया गया है। जिसके बाद बिल्डर को चार्ज वापस करने के आदेश दिया था।

ये भी जानें
- 5200 रुपये वर्ग गज में शुरू हुआ था प्रोजेक्ट
- 14 हजार रुपये वर्ग गज में रिसेल हुआ है प्लॉट
- बसने वालों में रोहतक व गुरुग्राम के लोग अधिक
- बिल्डर को प्रति परिवार दिए गए औसतन 25 लाख रुपये
लोगों को सेक्टर 2-3 की मार्केट में इकट्ठा कर नया लेआउट (नक्शा) पास होने की जानकारी दी गई है। विभाग की ओर से 23 दिसंबर को लेटर जारी किया गया है, जिसमें 104.038 एकड़ जमीन का नक्शा पास हुआ है। अब सभी प्लाटधारकों को फरवरी तक उनके प्लाटों पर कब्जा मिल जाएगा। केवल निशानदेही होनी बाकी है।
- राजेश मलिक, जरनल सेक्रेटरी बायर्स एसोसिएशन, रोहतक
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