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अफगानिस्तान में अपने कार्यों के परिणाम भुगतेगा पाक...

Tue, 26 Oct 2021 02:24 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 26 Oct 2021 02:24 AM IST
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Pakistan will face the consequences of its actions in Afghanistan.
आईआईएम में आयोजित ऑनलाइन सम्मेलन में शामिल विशेषज्ञों ने कहा है कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान में अपने कार्यों के परिणाम भुगतेगा। संस्थान ने अफगानिस्तान में हाल ही में हुए घटनाक्रम पर ऑनलाइन सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें भारत, अफगानिस्तान और अमेरिका के विशेषज्ञ शामिल हुए।
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सोमवार को सम्मेलन के पहले चरण में मित्र राष्ट्रों की ओर से पिछले दो दशकों में अफगानिस्तान में की गईं गतिविधियों और विकास कार्यों पर चर्चा की गई। इसमें सांसद एमजे अकबर, अफगानिस्तान की पूर्व मंत्री डॉ. नरगिस नेगन, पूर्व उप मंत्री शाह महमूद, अफगानिस्तान व पाकिस्तान अध्ययन के डॉ. मार्विन जी बेनगाम, अफगानिस्तान में भारत के पूर्व राजदूत जयंत प्रसाद, अफगान अध्ययन केंद्र के हनीफ सूफीजादा, नेब्रास्का विश्वविद्यालय ओमाहा के लेफ्टिनेंट जनरल अता हसनैन, पूर्व सैन्य सचिव डॉ. शांति मैरिट डिसूजा, अफगानिस्तान के पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल फहीम सयाद और सुरक्षा विशेषज्ञ राहुल भोंसले शामिल हुए। आईआईएम के निदेशक प्रो. धीरज शर्मा ने कहा कि अमेरिका ने 20 साल पहले आतंकवाद को जड़ से उखाड़ने के मकसद से अफगानिस्तान में प्रवेश किया था, लेकिन तमाम कोशिशों के बाद तालिबान सत्ता में आ गया और इसके होने से वैश्विक संकट पैदा हो गया है। अब सवाल है कि क्या पहले बनाईं संस्थाएं, प्रणालियां अब जारी रहेंगी।
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एमजे अकबर ने कहा कि अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद चीन और पाकिस्तान का अभिसरण हुआ है। कई प्रणालियां शायद अफगानी संस्कृति के लिए नहीं थीं। डॉ. नरगिस नेगन ने कहा कि महिलाओं, नागरिकों, श्रमिकों, मीडिया और सार्वजनिक क्षेत्र की दुर्दशा के बारे में कम खबरें हैं। हनीफ सूफीजादा ने कहा कि नई पीढ़ी के निर्माण में 20 साल की मेहनत बेकार हो गई। ब्रिगेडियर राहुल भोंसले ने अफगानिस्तान की स्थिति को भड़काने में पाकिस्तान की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान खुद अफगानिस्तान में अपने कार्यों के परिणाम भुगतेगा। शाह महमूद मियाखेल ने कहा कि तालिबान को यह महसूस करने की जरूरत है कि अफगानिस्तान पर सैन्य रूप से कब्जा करना एक बात है, लेकिन शासन करना दूसरी बात है। डॉ. मार्विन ने कहा कि ऐसा लग सकता है कि तालिबान का अधिग्रहण पाकिस्तान की जीत है, लेकिन यह सच्चाई से दूर है।
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