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Rohtak News: पीजीआई में एमआरआई करवाने के लिए करना पड़ रहा छह महीने का इंतजार
Tue, 01 Apr 2025 12:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Tue, 01 Apr 2025 12:20 AM IST
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रोहतक। पीजीआई (पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय ) में बेहतर इलाज और सस्ते दामों में जांच होने की आस लिए दूर-दराज से मरीज इलाज करवाने के लिए आते है। पीजीआई पहुंचते ही ओपीडी कार्ड बनवाने से लेकर टेस्ट करवाने तक लाइनों में खड़े होकर लंबा इंतजार करना पड़ता है। नंबर नहीं आने पर निराश होकर घर वापस जाना पड़ता है।
मरीजों को इलाज और जांच की तत्काल जरूरत होती है, लेकिन पीजीआई में एमआरआई करवाने के लिए मरीजों को छह महीने इंतजार करना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए भी दो से तीन दिन तक चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सुबह छह बजे से ही पीजीआई में मरीजों की लाइनें लगनी शुरू हो जाती है। कई-कई घंटे लाइन में लगने के बाद भी मरीजों को परामर्श ही मिल पाता है, इलाज और जांच नहीं। कैंसर की शिकायत के मरीजाें को भी एमआरआई करवाने के लिए पांच महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बाद ही आगे का उपचार शुरू किया जा सकेगा। पीजीआई के रेडियोलॉजी विभाग व ट्राॅमा सेंटर में एक-एक एमआरआई मशीन है। इसके कारण दाखिल मरीजों का ही पहले एमआरआई किया जाता है। इसके लिए भी मरीजों को चार से पांच दिन का समय दिया जाता है, वहीं ओपीडी मरीजों को छह महीने का समय दिया जा रहा है। दिन में दो सौ अल्ट्रासाउंड किया जा रहे हैं।
पीजीआई में अल्ट्रासाउंड के लिए सुबह से ही मरीजों की लाइने लगनी शुरू हो जाती है। दिन में केवल दो सो ओपीडी मरीजों के ही अल्ट्रासाउंड किए जाते है। इसके बाद आए मरीजों को वापस भेजा जा रहा है। अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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पीजीआई में मिर्गी का इलाज करवाने के लिए आई हूं। डाॅक्टरों ने एमआरआई की जांच लिखी है। एमआरआई करवाने के लिए 11 अक्तूबर का समय दिया गया है। बाहर महंगे दामों में एमआरआई किए जा रहे है। अब इंतजार करने के अलावा कोई समाधान नहीं है।
-आशा, बौंद कला, चरखी दादरी
पत्नी को कैंसर की शिकायत होने पर इलाज करवाने के लिए आया था। इसके इलाज के लिए एमआरआई जांच करवाने को कहा गया है, लेकिन 26 जुलाई का समय दिया गया है। इतना लंबा इंतजार करने से बीमारी और ज्यादा बढ़ने का खतरा है। सतबीर, हुमायूंपुर निवासी
वर्जन
मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सके और किसी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े। इसके लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। डॉ. ज्योत्स्ना सेन, विभागाध्यक्ष, रेडियोलॉजी, पीजीआई रोहतक
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मरीजों को इलाज और जांच की तत्काल जरूरत होती है, लेकिन पीजीआई में एमआरआई करवाने के लिए मरीजों को छह महीने इंतजार करना पड़ता है। अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए भी दो से तीन दिन तक चक्कर काटने पड़ रहे हैं। सुबह छह बजे से ही पीजीआई में मरीजों की लाइनें लगनी शुरू हो जाती है। कई-कई घंटे लाइन में लगने के बाद भी मरीजों को परामर्श ही मिल पाता है, इलाज और जांच नहीं। कैंसर की शिकायत के मरीजाें को भी एमआरआई करवाने के लिए पांच महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बाद ही आगे का उपचार शुरू किया जा सकेगा। पीजीआई के रेडियोलॉजी विभाग व ट्राॅमा सेंटर में एक-एक एमआरआई मशीन है। इसके कारण दाखिल मरीजों का ही पहले एमआरआई किया जाता है। इसके लिए भी मरीजों को चार से पांच दिन का समय दिया जाता है, वहीं ओपीडी मरीजों को छह महीने का समय दिया जा रहा है। दिन में दो सौ अल्ट्रासाउंड किया जा रहे हैं।
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पीजीआई में अल्ट्रासाउंड के लिए सुबह से ही मरीजों की लाइने लगनी शुरू हो जाती है। दिन में केवल दो सो ओपीडी मरीजों के ही अल्ट्रासाउंड किए जाते है। इसके बाद आए मरीजों को वापस भेजा जा रहा है। अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए बार-बार चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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पीजीआई में मिर्गी का इलाज करवाने के लिए आई हूं। डाॅक्टरों ने एमआरआई की जांच लिखी है। एमआरआई करवाने के लिए 11 अक्तूबर का समय दिया गया है। बाहर महंगे दामों में एमआरआई किए जा रहे है। अब इंतजार करने के अलावा कोई समाधान नहीं है।
-आशा, बौंद कला, चरखी दादरी
पत्नी को कैंसर की शिकायत होने पर इलाज करवाने के लिए आया था। इसके इलाज के लिए एमआरआई जांच करवाने को कहा गया है, लेकिन 26 जुलाई का समय दिया गया है। इतना लंबा इंतजार करने से बीमारी और ज्यादा बढ़ने का खतरा है। सतबीर, हुमायूंपुर निवासी
वर्जन
मरीजों को बेहतर सुविधाएं मिल सके और किसी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़े। इसके लिए लगातार प्रयास किया जा रहा है। डॉ. ज्योत्स्ना सेन, विभागाध्यक्ष, रेडियोलॉजी, पीजीआई रोहतक