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विश्व क्षय रोग दिवस पर विशेष: 2035 तक टीबी को जड़ से मिटाने का प्रयास
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Wed, 23 Mar 2016 02:16 AM IST
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केंद्र सरकार ने मैदान में चोटिल खिलाड़ियों को मौके पर ही मरहम पट्टी देने के आदेश जारी किए हैं।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन का प्रयास है कि वर्ष 2035 तक टीबी जड़ से खत्म हो। भारत भी प्रयास कर रहा है कि पूरे देश को टीबी मुक्त किया जाए। इसके लिए लाइलाज केसों पर ध्यान दिया जाएगा। सरकार ने भी हिदायत जारी की है कि चिकित्सक टीबी रोगी की जानकारी स्वास्थ्य अधिकारी को देगा। यह जानकारी पीजीआई के छाती एवं श्वास रोग विभागाध्यक्ष डॉ. के.बी. गुप्ता ने दी।
एक सर्वे में सामने आया है कि विश्व में करीब 550000 शिशु टीबी की बीमारी से पीड़ित हैं और उनमें से करीब 80 हजार की मृत्यु हो चुकी है। एक आंकड़े के अनुसार हरियाणा में हर साल 16 से 20 हजार फेफड़ों की टीबी के मरीज पाए गए, जिनके बलगम में टीबी के कीटाणु थे। पीजीआई में भी 1600 से 2000 बलगम के कीटाणु वाली टीबी के रोगी पता लगाए गए, जिनका सफलता से उपचार किया जा रहा है।
जारी प्रेस बयान में उन्होंने बताया कि 24 मार्च को दुनियाभर में क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। इसका ध्येय है लोगों को इस बीमारी के विषय में जागरूक करना और क्षय रोग की रोकथाम के लिए कदम उठाना। इस वर्ष की थीम ‘एकजुट हो जाएं, टीबी रोग भगाएं’ रखी गई है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि जहां पहले टीबी मरीज खुद अस्पताल में आकर अपनी बीमारी के बारे में बताकर दवाई लेता था और कई बार दवाई बीच में बंद कर देता था।
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अब ऐसे मरीजों की विशेष निगरानी का जिम्मा हेल्थ वर्करों को सौंपा गया है, जो एचआईवी, मधुमेह, धूम्रपान, नशा, कुपोषण व बच्चों पर विशेष रुप से ध्यान रखेंगे। इससे कोई भी मरीज दवाई बीच में नहीं छोड़ सकेगा। शुरुआत में लापरवाही से बिगड़ी टीबी एमडीआर का रुप ले सकती है, जिसका इलाज काफी जटल हो जाता है। धूम्रपान की लत ने हमारे शिशुओं को भी इसकी चपेट में लेना शुरू कर दिया है।
टीबी के लक्षण
- लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी के साथ बलगम आना।
- बुखार शाम को बढ़ जाना (दो सप्ताह से ऊपर)।
- बलगम के साथ खून आना।
- कमजोरी व थकावट महसूस होना।
- भूख कम लगना।
- वजन में लगातार गिरावट होना।
बचाव के तरीके
1 . टीबी के रोगी लगातार व पूरा इलाज लें।
2. भीड़-भाड़ से बचें, अपने आसपास का वातावरण स्वच्छ रखें।
3. रोगी जहां कहीं ना थूकें, इससे बीमारी फैलती है।
4. खांसते व छींकते समय रोगी रुमाल से मुंह व नाक को ढकें।
5. रोगी को धूम्रपान, मदिरा व नशीली वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
टीबी : कुछ तथ्य
1. लंबे बुखार को टाइफाइड मानकर अनदेखी ना करें और तुरंत अपना बलगम टेस्ट व एक्सरे करवाएं।
2. यह खानदानी बीमारी एवं आनुवांशिक रोग नहीं है। टीबी एक संक्रामक रोग है। यह जीवाणु द्वारा फैलता है, जिसे माईक्रोबैक्टिरियम टयूबर क्यूलोसिस कहते हैं। मुख्यत: यह फेफड़ों को प्रभावित करती है। हालांकि यह शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है।
3. यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने व थूकने से फैलती है।
4. अधूरी दवाइयां लेना व अधूरा इलाज बीमारी को लाइलाज कर देता है।
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एक सर्वे में सामने आया है कि विश्व में करीब 550000 शिशु टीबी की बीमारी से पीड़ित हैं और उनमें से करीब 80 हजार की मृत्यु हो चुकी है। एक आंकड़े के अनुसार हरियाणा में हर साल 16 से 20 हजार फेफड़ों की टीबी के मरीज पाए गए, जिनके बलगम में टीबी के कीटाणु थे। पीजीआई में भी 1600 से 2000 बलगम के कीटाणु वाली टीबी के रोगी पता लगाए गए, जिनका सफलता से उपचार किया जा रहा है।
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जारी प्रेस बयान में उन्होंने बताया कि 24 मार्च को दुनियाभर में क्षय रोग दिवस मनाया जाता है। इसका ध्येय है लोगों को इस बीमारी के विषय में जागरूक करना और क्षय रोग की रोकथाम के लिए कदम उठाना। इस वर्ष की थीम ‘एकजुट हो जाएं, टीबी रोग भगाएं’ रखी गई है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि जहां पहले टीबी मरीज खुद अस्पताल में आकर अपनी बीमारी के बारे में बताकर दवाई लेता था और कई बार दवाई बीच में बंद कर देता था।
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अब ऐसे मरीजों की विशेष निगरानी का जिम्मा हेल्थ वर्करों को सौंपा गया है, जो एचआईवी, मधुमेह, धूम्रपान, नशा, कुपोषण व बच्चों पर विशेष रुप से ध्यान रखेंगे। इससे कोई भी मरीज दवाई बीच में नहीं छोड़ सकेगा। शुरुआत में लापरवाही से बिगड़ी टीबी एमडीआर का रुप ले सकती है, जिसका इलाज काफी जटल हो जाता है। धूम्रपान की लत ने हमारे शिशुओं को भी इसकी चपेट में लेना शुरू कर दिया है।
टीबी के लक्षण
- लगातार दो सप्ताह से अधिक खांसी के साथ बलगम आना।
- बुखार शाम को बढ़ जाना (दो सप्ताह से ऊपर)।
- बलगम के साथ खून आना।
- कमजोरी व थकावट महसूस होना।
- भूख कम लगना।
- वजन में लगातार गिरावट होना।
बचाव के तरीके
1 . टीबी के रोगी लगातार व पूरा इलाज लें।
2. भीड़-भाड़ से बचें, अपने आसपास का वातावरण स्वच्छ रखें।
3. रोगी जहां कहीं ना थूकें, इससे बीमारी फैलती है।
4. खांसते व छींकते समय रोगी रुमाल से मुंह व नाक को ढकें।
5. रोगी को धूम्रपान, मदिरा व नशीली वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
टीबी : कुछ तथ्य
1. लंबे बुखार को टाइफाइड मानकर अनदेखी ना करें और तुरंत अपना बलगम टेस्ट व एक्सरे करवाएं।
2. यह खानदानी बीमारी एवं आनुवांशिक रोग नहीं है। टीबी एक संक्रामक रोग है। यह जीवाणु द्वारा फैलता है, जिसे माईक्रोबैक्टिरियम टयूबर क्यूलोसिस कहते हैं। मुख्यत: यह फेफड़ों को प्रभावित करती है। हालांकि यह शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है।
3. यह बीमारी संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने व थूकने से फैलती है।
4. अधूरी दवाइयां लेना व अधूरा इलाज बीमारी को लाइलाज कर देता है।