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गौड़ ब्राह्मण आयुर्वेदिक कॉलेज के वजूद पर मान्यता का संकट
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 07 Nov 2015 02:33 AM IST
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गौड़ ब्राह्मण आयुर्वेदिक कॉलेज का वजूद अब संकट में आ गया है। पहले से
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ही आर्थिक स्थिति जर्जर होने की मार झेल रहे कॉलेज की अब मान्यता पर भी
संकट आ गया है। पीजीआई (हेल्थ यूनिवर्सिटी) से संबद्ध इस कॉलेज को
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने इस बार मान्यता नहीं दी है।
जबकि एंट्रेंस के दौरान कॉलेज की 100 सीटों को अभ्यर्थियों केसामने रखा गया था। मान्यता नहीं मिलने से अब एक तरफ कॉलेज का वजूद संकट में आ गया है तो दूसरी तरफ इस कॉलेज में प्रवेश लेने का ख्वाब देखते हुए एंट्रेंस देने वाले हजारों विद्यार्थियों का भविष्य भी अधर में लटक गया है। कॉलेज प्रबंधन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री तक गुहार लगा चुका है।
गांव ब्राह्मणवास स्थित इस आयुर्वेदिक कॉलेज में पिछले सत्र तक प्रवेश हुए थे। इस बार भी बीएएमएस प्रथम वर्ष की सौ सीटों पर प्रवेश होना था। जुलाई में इसकी कवायद हेल्थ यूनिवर्सिटी ने शुरू भी की और अपने प्रोस्पेक्टस में गौड़ ब्राह्मण आयुर्वेदिक कॉलेज का विकल्प भी अभ्यर्थियों को दिया। 19 जुलाई को एंट्रेंस एग्जाम हुआ। एंट्रेंस देने वाली एक छात्रा ने बताया कि गौड़ ब्राह्मण कॉलेज में प्रवेश के लिए करीब 6000 से ज्यादा विद्यार्थियों ने एंट्रेंस एग्जाम दिया। लेकिन इस कॉलेज में आज तक प्रवेश नहीं हुए हैं।
मापदंड पूरे नहीं
पीजीआई प्रशासन ने इस कॉलेज की प्रथम वर्ष की सीटों पर प्रवेश रोक दिया। मामला यूनिवर्सिटी की उच्च कमेटी तक भी गया, लेकिन कमेटी ने साफ तौर पर कह दिया कि मापदंड पूरे नहीं होने से मान्यता नहीं दी जा सकती है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि सिर्फ तीन शिक्षकों की कमी के बाबत मान्यता रोक ली गई।
इसलिए रोकी गई मान्यता
प्राचार्य चंद्रशेखर पांडेय ने बताया कि कॉलेज की मान्यता पर शिक्षकों की कमी के चलते रोक लगी है। हमारे यहां नियमानुसार शिक्षक हैं। इस वक्त 60 शिक्षक हैं, लेकिन कम से कम 8 डिग्री धारी शिक्षकों का होना जरूरी है। इनमें से तीन शिक्षक स्थायी होने चाहिए। प्राचार्य का कहना है कि जिन तीन शिक्षकों का नियमित होना जरूरी है, उन्हें आर्थिक संकट के चलते वेतन नहीं दिया जा रहा था। इसी बात को यूनिवर्सिटी ने कमी मान लिया और मान्यता रोक दी।
जबकि एंट्रेंस के दौरान कॉलेज की 100 सीटों को अभ्यर्थियों केसामने रखा गया था। मान्यता नहीं मिलने से अब एक तरफ कॉलेज का वजूद संकट में आ गया है तो दूसरी तरफ इस कॉलेज में प्रवेश लेने का ख्वाब देखते हुए एंट्रेंस देने वाले हजारों विद्यार्थियों का भविष्य भी अधर में लटक गया है। कॉलेज प्रबंधन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री तक गुहार लगा चुका है।
गांव ब्राह्मणवास स्थित इस आयुर्वेदिक कॉलेज में पिछले सत्र तक प्रवेश हुए थे। इस बार भी बीएएमएस प्रथम वर्ष की सौ सीटों पर प्रवेश होना था। जुलाई में इसकी कवायद हेल्थ यूनिवर्सिटी ने शुरू भी की और अपने प्रोस्पेक्टस में गौड़ ब्राह्मण आयुर्वेदिक कॉलेज का विकल्प भी अभ्यर्थियों को दिया। 19 जुलाई को एंट्रेंस एग्जाम हुआ। एंट्रेंस देने वाली एक छात्रा ने बताया कि गौड़ ब्राह्मण कॉलेज में प्रवेश के लिए करीब 6000 से ज्यादा विद्यार्थियों ने एंट्रेंस एग्जाम दिया। लेकिन इस कॉलेज में आज तक प्रवेश नहीं हुए हैं।
मापदंड पूरे नहीं
पीजीआई प्रशासन ने इस कॉलेज की प्रथम वर्ष की सीटों पर प्रवेश रोक दिया। मामला यूनिवर्सिटी की उच्च कमेटी तक भी गया, लेकिन कमेटी ने साफ तौर पर कह दिया कि मापदंड पूरे नहीं होने से मान्यता नहीं दी जा सकती है। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि सिर्फ तीन शिक्षकों की कमी के बाबत मान्यता रोक ली गई।
इसलिए रोकी गई मान्यता
प्राचार्य चंद्रशेखर पांडेय ने बताया कि कॉलेज की मान्यता पर शिक्षकों की कमी के चलते रोक लगी है। हमारे यहां नियमानुसार शिक्षक हैं। इस वक्त 60 शिक्षक हैं, लेकिन कम से कम 8 डिग्री धारी शिक्षकों का होना जरूरी है। इनमें से तीन शिक्षक स्थायी होने चाहिए। प्राचार्य का कहना है कि जिन तीन शिक्षकों का नियमित होना जरूरी है, उन्हें आर्थिक संकट के चलते वेतन नहीं दिया जा रहा था। इसी बात को यूनिवर्सिटी ने कमी मान लिया और मान्यता रोक दी।