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Rohtak News: नोटिस बने मतदाताओं की मुसीबत, मिसमैच सुधारने में लग रहे घंटे
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फोटो-55: नगर परिषद कार्यालय में नोटिस की सुनवाई के लिए पहुंचे मतदाता। संवाद
बहादुरगढ़। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत गलत मैपिंग, नाम में मिसमैच और अन्य गड़बड़ियों को लेकर जारी नोटिस के बाद मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें आपत्तियों और जरूरी दस्तावेजों के साथ सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक संबंधित बीएलओ के समक्ष पहुंचने का समय दिया जा रहा है लेकिन कई जगह प्रक्रिया पूरी नहीं होने से लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
मतदाताओं का कहना है कि निर्धारित समय पर पहुंचने के बावजूद बीएलओ के नहीं मिलने या प्रक्रिया पूरी नहीं होने से उन्हें दोबारा चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और कामकाजी लोगों को अधिक परेशानी हो रही है।
सेक्टर छह में मंगलवार को कुछ मतदाता नोटिस के बाद बीएलओ से मिलने पहुंचे, लेकिन मौके पर बीएलओ नहीं मिलीं। काफी देर इंतजार के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। सेक्टर छह निवासी प्रमोद राजपूत ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ बीएलओ के पास पहुंचे थे, लेकिन कर्मचारी मौजूद नहीं मिलीं। उन्होंने कहा कि जब विभाग नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुला रहा है तो निर्धारित समय और स्थान पर बीएलओ की मौजूदगी भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
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मतदाताओं ने प्रशासन से मांग की है कि नोटिस से जुड़ी गड़बड़ियों के समाधान के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती की जाए और सुनवाई की प्रक्रिया व्यवस्थित की जाए, ताकि लोगों को घंटों इंतजार न करना पड़े।
फोटो-55:
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मतदाताओं का कहना है कि निर्धारित समय पर पहुंचने के बावजूद बीएलओ के नहीं मिलने या प्रक्रिया पूरी नहीं होने से उन्हें दोबारा चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और कामकाजी लोगों को अधिक परेशानी हो रही है।
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सेक्टर छह में मंगलवार को कुछ मतदाता नोटिस के बाद बीएलओ से मिलने पहुंचे, लेकिन मौके पर बीएलओ नहीं मिलीं। काफी देर इंतजार के बाद उन्हें वापस लौटना पड़ा। सेक्टर छह निवासी प्रमोद राजपूत ने बताया कि वह अपनी पत्नी के साथ बीएलओ के पास पहुंचे थे, लेकिन कर्मचारी मौजूद नहीं मिलीं। उन्होंने कहा कि जब विभाग नोटिस देकर सुनवाई के लिए बुला रहा है तो निर्धारित समय और स्थान पर बीएलओ की मौजूदगी भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
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मतदाताओं ने प्रशासन से मांग की है कि नोटिस से जुड़ी गड़बड़ियों के समाधान के लिए पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती की जाए और सुनवाई की प्रक्रिया व्यवस्थित की जाए, ताकि लोगों को घंटों इंतजार न करना पड़े।
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