{"_id":"57c73a124f1c1b78292cb6fc","slug":"nagar-nigam-furniter-fraud-haryana-rohtak-vigilence","type":"story","status":"publish","title_hn":"फर्नीचर घोटाले में मेयर कार्यालय पहुंची विजिलेंस, घंटेभर तक पूछताछ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
फर्नीचर घोटाले में मेयर कार्यालय पहुंची विजिलेंस, घंटेभर तक पूछताछ
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 01 Sep 2016 02:15 AM IST
विज्ञापन
मेयर कार्यालय में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर भी मिलने पर विजिलेंस ने की पूछताछ
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर निगम के फर्नीचर घोटाले की जांच करने के लिए विजिलेंस टीम बुधवार को मेयर कार्यालय पहुंची। यहां मेयर के साथ ही सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के मिलने पर उनसे भी पूछताछ की गई। फर्नीचर खरीद में टेंडर व बिलों से संबंधित सभी कागजात भी मांगे, जो निगम के पास होने की बात कही गई। इस तरह विजिलेंस की टीम के आने से नगर निगम के पुराने कार्यालय में हड़कंप मचा रहा तो अधिकारी भी काफी परेशान दिखाई दिए।
नगर निगम हाउस की बैठक में 19 फरवरी 2014 को एक प्रस्ताव पास किया गया। इसमें पार्षदों को अपने वार्ड में कार्यालय खोलने के लिए कहा गया था। कार्यालयों के लिए फर्नीचर खरीदने को एक कमेटी बनाई गई। इसमें मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, एकाउंट ऑफिसर व एमई को रखा गया था। उस समय तीन दुकानदारों से कुटेशन मंगवाई गई, जिनमें से एक फर्नीचर हाउस से सामान मंगवा लिया गया और 19 लाख 63 हजार रुपये का भुगतान किया गया। भुगतान अगस्त से दिसंबर 2014 तक अलग-अलग किस्तों में किया गया। पार्षद अशोक खुराना, जयकिशन शर्मा, पूनम किलोई, अजय जैन, ममता रानी, सुशीला इंदौरा ने फर्नीचर खरीद में घोटाले का आरोप लगाते हुए तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर अनु श्योकंद को शिकायत दी। उस समय जांच में खानापूर्ति की गई और जांच ट्रेनी आईएएस विक्रम को दी गई। उनकी जांच में आरोप सही पाए गये। यह फाइल दिसंबर 2015 में शासन को भेज दी गई। इस पर ही संज्ञान लेते हुए सीएम खट्टर ने 6 जुलाई 2016 को विजिलेंस जांच के आदेश दिए और मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी को नोटिस करने के आदेश हुए। उस समय निगम में एमई व एकाउंट ऑफिसर रहने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश भी दिए गए। सीएम के आदेश के बाद शासन से पत्र मिलते ही विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी। बुधवार को विजिलेंस की टीम नगर निगम के पुराने कार्यालय में स्थित मेयर के कार्यालय में पहुंचे। वहां मेयर रेनू डाबला के अलावा सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी भी मौजूद थे। वहां से विजिलेंस की टीम ने इन तीनों के अलावा सभी को बाहर कर दिया, जिससे वह उनसे पूछताछ कर सके। उनके घंटों तक पूछताछ करने के बाद फर्नीचर के टेंडर से लेकर बिलों तक का रिकार्ड मांगा गया। इस पर मेयर रेनू डाबला ने वह रिकार्ड नगर निगम के अधीक्षक कार्यालय में होने की बात कही। इसके बाद विजिलेंस की टीम वहां से चली गई।
मेयर व अन्य से फर्नीचर घोटाले से संबंधित कागजात मांगे गए। इसके लिए ही टीम गई थी और वहां उनसे इसको लेकर ही बातचीत भी की गई। रामभज, डीएसपी विजिलेंस
विज्ञापन
नगर निगम हाउस की बैठक में 19 फरवरी 2014 को एक प्रस्ताव पास किया गया। इसमें पार्षदों को अपने वार्ड में कार्यालय खोलने के लिए कहा गया था। कार्यालयों के लिए फर्नीचर खरीदने को एक कमेटी बनाई गई। इसमें मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी, एकाउंट ऑफिसर व एमई को रखा गया था। उस समय तीन दुकानदारों से कुटेशन मंगवाई गई, जिनमें से एक फर्नीचर हाउस से सामान मंगवा लिया गया और 19 लाख 63 हजार रुपये का भुगतान किया गया। भुगतान अगस्त से दिसंबर 2014 तक अलग-अलग किस्तों में किया गया। पार्षद अशोक खुराना, जयकिशन शर्मा, पूनम किलोई, अजय जैन, ममता रानी, सुशीला इंदौरा ने फर्नीचर खरीद में घोटाले का आरोप लगाते हुए तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर अनु श्योकंद को शिकायत दी। उस समय जांच में खानापूर्ति की गई और जांच ट्रेनी आईएएस विक्रम को दी गई। उनकी जांच में आरोप सही पाए गये। यह फाइल दिसंबर 2015 में शासन को भेज दी गई। इस पर ही संज्ञान लेते हुए सीएम खट्टर ने 6 जुलाई 2016 को विजिलेंस जांच के आदेश दिए और मेयर रेनू डाबला, सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी को नोटिस करने के आदेश हुए। उस समय निगम में एमई व एकाउंट ऑफिसर रहने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश भी दिए गए। सीएम के आदेश के बाद शासन से पत्र मिलते ही विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी। बुधवार को विजिलेंस की टीम नगर निगम के पुराने कार्यालय में स्थित मेयर के कार्यालय में पहुंचे। वहां मेयर रेनू डाबला के अलावा सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा, डिप्टी मेयर अशोक भाटी भी मौजूद थे। वहां से विजिलेंस की टीम ने इन तीनों के अलावा सभी को बाहर कर दिया, जिससे वह उनसे पूछताछ कर सके। उनके घंटों तक पूछताछ करने के बाद फर्नीचर के टेंडर से लेकर बिलों तक का रिकार्ड मांगा गया। इस पर मेयर रेनू डाबला ने वह रिकार्ड नगर निगम के अधीक्षक कार्यालय में होने की बात कही। इसके बाद विजिलेंस की टीम वहां से चली गई।
विज्ञापन
मेयर व अन्य से फर्नीचर घोटाले से संबंधित कागजात मांगे गए। इसके लिए ही टीम गई थी और वहां उनसे इसको लेकर ही बातचीत भी की गई। रामभज, डीएसपी विजिलेंस