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जेब में लाइसेंस, थाने में केस दर्ज, फिर भी अमित के माथे पर लिख दिया अज्ञात

Fri, 21 Aug 2015 02:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 21 Aug 2015 02:18 AM IST
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पुलिस हिरासत में भालौठ के युवक अमित की मौत ने एक बार फिर पुलिस के अमानवीय चेहरे को सामने ला दिया है।
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ये कैसे मुमकिन है कि पुलिस आधी रात को जिस अमित के घर तक पहुंच गई।

उसे थाने लेकर आई, रात भर थाने में रखा। उस पर छेड़छाड़ का केस तक दर्ज किया गया, लेकिन पुलिस को उसका नाम तक नहीं पता। ऐसा तब है जब अमित की जेब में उसका ड्राइविंग लाइसेंस भी था।

बृहस्पतिवार सुबह 6 बजकर 50 मिनट पर अमित को मृत हालत में पीजीआई लेकर पहुंची पुलिस ने अस्पताल के रिकार्ड में न तो अमित का नाम लिखवाया और न ही पता। उसका रजिस्ट्रेशन अज्ञात के तौर पर करवा दिया गया।
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पोस्टमार्टम के लिए लाई गई अमित की बॉडी पर (माथे पर) अज्ञात का लेबल लगा हुआ था। बाद में जब मामले ने तूल पकड़ा तो पुलिस ने डैड बॉडी के माथे पर लगा लेबल हटवाया और पीजीआई रजिस्टर में मृतक का नाम व पता लिखवाया।
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डीएसपी बोले- छेड़छाड़ को केस दर्ज तो सरपंच बोले- नाम कैसे नहीं पता
युवक की मौत पर भड़के ग्रामीण सुबह ही पीजीआई में पहुंच गए। ग्रामीणों का गुस्सा देख पुलिस बैकफुट पर आ गई। डीएसपी अमित भाटिया और बिजेंद्र सिंह ने गांव के निवर्तमान सरपंच सतीश सहित अन्य ग्रामीणों से बात की। यहां डीएसपी ने बताया कि अमित के खिलाफ रात को ही छेड़छाड़ का केस दर्ज कर लिया गया था। तभी उसकी गिरफ्तारी की गई। इस पर निवर्तमान सरपंच ने पुलिस से कहा कि जब केस दर्ज हो गया था तो पुलिस ने पीजीआई में उसे अज्ञात क्यों दिखाया।   
ये है कहानी
पुलिस के मुताबिक अमित अपने दोस्त के साथ रात को पार्टी करके घर की तरफ जा रहा था। जब वह अपनी गली के तरफ हुआ तो गांव में किराये में मकान में रहने वाला एक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ बाइक से घर की तरफ जा रहा था। तभी अचानक अमित का हाथ बाइक पर बैठी महिला को लग गया। इसी बात पर अमित और महिला के पति की कहासुनी हो गई। अमित के परिजनों का आरोप है कि महिला के पति ने कुछ ही देर में गांव किलोई से अपने दोस्तों के बुलाकर अमित पर हमला कर दिया। 10 मिनट तक लाठी-डंडों से पीटा गया। ग्रामीणों के बीचबचाव के बाद अमित की मां कमला उसे लेकर घर आ गई।
मां को उपचार का दिलासा, फिर अमित को उठा लाई पुलिस
जब पुलिस रात को अमित को गिरफ्तार करने पहुंची तो घर पर अमित और उसकी मां कमला ही थे। अमित के पिता पूर्व फौजी ओमप्रकाश शीला बाईपास पर एक निजी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। वे रात को डयूटी पर थे। पुलिस जब अमित को ले जाने लगी तो कमला ने विरोध किया। कमला ने बताया कि पुलिस ने कहा कि हम अमित का उपचार करा देंगे, लेकिन पुलिस अमित को सीधा थाने में ले गई।
शाम होते-होते बदले परिजनों के सुर
पीजीआई में ग्रामीणों ने हंगामा कर दिया और पुलिस पर कार्रवाई की मांग की। गांव के निवर्तमान सरपंच सतीश भालौठ और जिला परिषद के निवर्तमान अध्यक्ष राजेश फौगाट परिजनों और ग्रामीणों से मिलने पहुंचे। डीसी को जानकारी दी गई। इसके बाद ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट मीनू को मामले की जांच सौंपी गई। अब जांच के बाद कार्रवाई होगी। मृतक के पिता ओमप्रकाश और माता कमला देवी के बयान दर्ज किए गए हैं। कमला के बयान ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज हुए हैं। शाम होते ही परिजनों सुर बदल गए। सुबह जहां पुलिस प्रशासन पर उंगली उठा रहे थे, तो शाम को कुलदीप, प्रियंका, अमित व एक अन्य पर आरोप लगाने लगे।     

8 घंटे तक पुलिस हिरासत में
यदि परिजनों की बात पर गौर किया जाए तो पुलिस ने अमित को करीब 8 घंटे तक कस्टडी में रखा। कमला ने बताया कि पुलिस उसे रात करीब 11 बजे घर से ले गई थी। पीजीआई में मृतक के माथे पर लगी पर्ची पर सुबह 6 बजकर 50 मिनट का समय अंकित किया गया है। आठ घंटे की अवधि के दौरान भी पुलिस ने उसक ी तबीयत खराब होने की सूचना न तो परिजनों को दी और न ही खुद उसका उपचार कराया।
बुझ गया घर का इकलौता चिराग
अविवाहित अमित घर का इकलौता चिराग था। काफी दिनों से परिजन उसकी शादी करने की तैयारी में थे, लेकिन सारे सपने चकनाचूर हो गए।  
पुलिस नहीं दे रही इन सवालों का जवाब
- जब अमित पहले ही गंभीर हालत मेें था तो पुलिस ने उसका उपचार क्यों नहीं कराया?
- अमित के पिता ने जब पुलिस हिरासत में मौत होने की बात शिकायत में लिखी तो पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
- पूरे प्रकरण में पुलिस का एक भी अधिकारी मुंह क्यों नहीं खोल रहा?
- जब पुलिस ने अमित को हिरासत में लिया तो छेड़छाड़ का केस दर्ज करवाने वाले उनके पीछे सदर थाने क्यों आए?
- बार-बार मृतक के माता-पिता को बयान के लिए थाने में क्यों बुलाती रही पुलिस? 
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