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नगर निगम की हाउस मीटिंग में डीसी के सामने हंगामा, धरा का धरा रह गया शहर का बजट और विकास के सपने

Fri, 08 Apr 2016 02:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Fri, 08 Apr 2016 02:44 AM IST
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निगम हाउस की बैठक - फोटो : amar ujala
रोहतक। शहर के पार्षद 6 माह बाद हुई निगम हाउस की बैठक में भी विकास को लेकर गंभीर नहीं हुए। गंभीरता तो दूर, यहां अपनी पार्षद पत्नी को सहारा देने पहुंचे उनके पति ही आपस में भिड़ गए। नगर निगम में हुए फर्नीचर घोटाले को लेकर उठाए सवाल पर पार्षद पूनम किलोई के पति सूरजमल किलोई और सीनियर डिप्टी मेयर मंजू हुड्डा के पति बिजेंद्र हुड्डा के बीच थप्पड़ और लात-घूंसे चले। दोनों ने एक दूसरे के कुर्ते भी फाड़ दिए। डीसी के सामने ही जमकर हंगामा हुआ।
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गामा बढ़ने पर डीसी अतुल कुमार मीटिंग को रद्द कर बीच में ही चले गए। न तो शहर को बजट पास हो सका और न ही किसी विकास प्रस्ताव पर मुहर लग सकी। डीसी का कहना है कि अगली मीटिंग में किसी भी पार्षद क पति को नहीं घुसने दिया जाएगा। हाथापाई होने से पहले भी विकास कार्य नहीं कराने को लेकर पार्षदों ने कई बार हंगामा किया। 
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इससे पहले, बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे लघु सचिवालय के सभागार में नगर निगम हाउस की मीटिंग शुरू हुई। बैठक शुरू होने से पहले ही पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। वार्ड-14 की पार्षद नीरा भटनागर व उनके पति नरौत्तामल भटनागर ने अफसरों पर विकास कार्य पूरा नहीं करने का आरोप लगाया। वार्ड 19 के पार्षद अनिल ने कहा कि विकास कार्यों के बारे में कोई अफसर सुनने को तैयार नहीं है। लेकिन पार्षद इतने कमजोर नहीं हैं कि उनके काम नहीं किए जाएं।
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वार्ड 18 की पार्षद पूनम और उनके पति सूरजमल ने भी विकास कार्य नहीं कराने का आरोप लगाया। वार्ड 1 के पार्षद राजबीर सैनी ने सफाई कर्मचारी नहीं होने के कारण हालात खराब होने की बात कहते हुए हंगामा किया। इसके बाद वार्ड 5 के पार्षद सूरजमल रोज ने कहा कि सभी पार्षद एक-एक करके अपनी बात रखेंगे। अब मीटिंग की कार्रवाई शुरू की गई तो पार्षदों ने बजट पास करने से इंकार कर दिया। कहा कि उनके पास बजट की कॉपी ही नहीं भेजी गई है। पहले वे बजट को देखेंगे-समझेंगे, तभी उसे पास करेंगे। बजट से इंकार करने पर आम मीटिंग शुरू कर दी गई। डीसी अतुल कुमार ने प्रस्ताव रखने शुरू किए तो उनको मंजूरी भी मिलने लगी। लेकिन इस दौरान ही वार्ड 18 की पार्षद पूनम के पति सूरजमल किलोई ने नगर निगम में हुए फर्नीचर घोटाले के मामले में कार्रवाई की मांग करते हुए बात उठाई। इस पर वार्ड 6 की पार्षद और सीनियर डिप्टी मेयर मंजू रानी के पति बिजेंद्र हुड्डा भड़क गए।
हुड्डा ने कहा कि क्या हम चोर हैं। दोनों में तू-तू-मैं-मैं शुरू हुई और एक दूसरे को गाली देने लगे। हुड्डा किलोई की कुर्सी के पास आ गए और दोनों में मारपीट शुरू हो गई। डीसी और अन्य पार्षदों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, लेकिन वे आपस में लात-घूंसे चलाते रहे। मारपीट में दोनों के कुर्ते भी फट गए। मामला बिगड़ता देख डीसी तुरंत ही मीटिंग रद्द करने की घोषणा कर निकल गए। निगम के ज्वाइंट कमिश्नर अरविंद मल्हान, एटीपी के. के. वार्ष्णेय, बिजली निगम के एक्सईएन जेसी शर्मा समेत अन्य अधिकारी बैठे रहे। दोनों को किसी तरह शांत किया और उनको उनकी पार्षद पत्नी वहां से लेकर चली गईं। दोपहर 12 बजे तक चली बैठक में पार्षद पति बच्चों की तरह लड़े और शहर की झोली खाली की खाली रह गई।
6 महीने बाद हुई थी बोर्ड की बैठक
नगर निगम हाउस बोर्ड की आखिरी बैठक अक्टूबर 2015 में हुई थी। पहले पंचायत चुनाव और उसके बाद दंगों के कारण बैठक रद करनी पड़ी। अब बैठक रखी तो पार्षद पति भिड़ गए।
50 करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव और 1000 लाइटों को मिल चुकी थी मंजूरी
जिस समय नगर निगम हाउस बोर्ड की बैठक में मारपीट हुई, उससे पहले शहर के विकास पर चर्चा चल रही थी। अमृत योजना के तहत 497 करोड़ को पहले फेज में पास कराने के लिए फाइल शासन को भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल चुकी थी। इससे वाटर सप्लाई, सीवरेज, पार्किंग, डिवाइडर आदि की समस्या खत्म होने की उम्मीद है। इसके अलावा डी प्लान में 50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव पास हो चुका था। शहर में 1000 लाइटें लगवाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन मीटिंग कैंसिल होने से कुछ नहीं हो सका। 
पार्षद पतियों पर होती रोक तो नहीं होता बवाल
नगर निगम में महिला पार्षदों के साथ उनके पति भी मीटिंग में मौजूद रहते हैं और पार्षदों की जगह वे खुद समस्या रखते हैं। इस तरह महिला पार्षदों को बोलने तक नहीं दिया जाता है। एक बार इस पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन फिर से प्रस्ताव पास करके पार्षद पतियों को एंट्री दे दी गई। अगर पार्षद पतियों पर रोक होती तो शायद यह घटना नहीं होती। 

जिस तरह से मीटिंग में मारपीट हुई है, यह काफी गलत है। सभी पार्षद आपस में परिवार की तरह हैं और उनके बीच फिर से भाईचारा बन जाएगा। उन सभी से बैठकर बातचीत की जाएगी, ताकि दोबारा ऐसा न हो। 

रेनू डाबला, मेयर, नगर निगम
नगर निगम हाउस बोर्ड की बैठक में महिला पार्षदों के आने पर रोक लगाई जाएगी। इसके बाद भी दोबारा किसी मीटिंग में इस तरह मारपीट हुई तो उसे सख्ती से निपटा जाएगा और एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। 
अतुल कुमार, डीसी और निगम आयुक्त, रोहतक। 
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