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विभाग के पास दो मशीनें, जांच का ठेका निजी कंपनी को
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 14 Aug 2015 02:08 AM IST
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पीजीआई में हो रहे बीजीए टेस्ट (ब्लड गैस एनालिसिस) में गोलमाल और इस पर कुलपति की कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
22 जुलाई को बायो केमिस्ट्री विभाग की आपात विभाग स्थित लैब में पहुंचे कुलपति ने इससे संबंधित कई सवाल पूछे और व्यवस्थाओं पर सवाल खडे़ किए। खुद की जांच मशीन होने के बावजूद स्टैंड बाय के नाम पर निजी कंपनी को 7000 जांच का ठेका देना सवालों के घेरे में आ गया।
सूत्रों का कहना है कि बायो केमिस्ट्री विभाग के पास बीजीए जांच करने के लिए दो मशीन चालू हालत में हैं। यहां रोजाना 150 से 200 जांच होती हैं।
ये जांच करना पीजीआई की मशीन की क्षमता में है। इसके बावजूद विभाग ने हर माह सात हजार बीजीए जांच करने का ठेका निजी कंपनी को दे दिया है।
अब सवाल उठता है कि जब इतनी जांच होती ही नहीं तो ठेका किस बात का दिया गया और वह भी जब स्वयं के पास दो मशीनें उपलब्ध हैं।
सूत्रों का कहना है कि इसमें प्रतिमाह चार से पांच लाख रुपये का खेल होता है। हैरानी की बात है कि पूरा मामला उठने के बाद भी किसी ने मशीन की हार्ड डिस्क कब्जे में लेने की जहमत नहीं उठाई। यदि इसे फारमेट कर दिया जाता है तो कोई सबूत नहीं बचेगा। रही बात जांच कराने वाले मरीजों की संख्या की वह तो रजिस्टर में कभी भी मैनुअल भरी जा सकती है।
नॉलेज पार्ट: ये होती है बीजीए जांच
ब्लड गैस एनालिसिस जांच में मरीज के रक्त में आक्सीजन, पीएच व इलेक्ट्रान जांचे जाते हैं। इलेक्ट्रान में सोडियम व पोटाशियम की जांचकर इसके हिसाब से मरीज को उपचार दिया जाता है।
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22 जुलाई को बायो केमिस्ट्री विभाग की आपात विभाग स्थित लैब में पहुंचे कुलपति ने इससे संबंधित कई सवाल पूछे और व्यवस्थाओं पर सवाल खडे़ किए। खुद की जांच मशीन होने के बावजूद स्टैंड बाय के नाम पर निजी कंपनी को 7000 जांच का ठेका देना सवालों के घेरे में आ गया।
सूत्रों का कहना है कि बायो केमिस्ट्री विभाग के पास बीजीए जांच करने के लिए दो मशीन चालू हालत में हैं। यहां रोजाना 150 से 200 जांच होती हैं।
ये जांच करना पीजीआई की मशीन की क्षमता में है। इसके बावजूद विभाग ने हर माह सात हजार बीजीए जांच करने का ठेका निजी कंपनी को दे दिया है।
अब सवाल उठता है कि जब इतनी जांच होती ही नहीं तो ठेका किस बात का दिया गया और वह भी जब स्वयं के पास दो मशीनें उपलब्ध हैं।
सूत्रों का कहना है कि इसमें प्रतिमाह चार से पांच लाख रुपये का खेल होता है। हैरानी की बात है कि पूरा मामला उठने के बाद भी किसी ने मशीन की हार्ड डिस्क कब्जे में लेने की जहमत नहीं उठाई। यदि इसे फारमेट कर दिया जाता है तो कोई सबूत नहीं बचेगा। रही बात जांच कराने वाले मरीजों की संख्या की वह तो रजिस्टर में कभी भी मैनुअल भरी जा सकती है।
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नॉलेज पार्ट: ये होती है बीजीए जांच
ब्लड गैस एनालिसिस जांच में मरीज के रक्त में आक्सीजन, पीएच व इलेक्ट्रान जांचे जाते हैं। इलेक्ट्रान में सोडियम व पोटाशियम की जांचकर इसके हिसाब से मरीज को उपचार दिया जाता है।
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