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कैनाल में डूबे मायना के किशोर का तीन बाद भी सुराग नहीं
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रोहतक। झज्जर रोड स्थित जवाहर लाल नेहरू कैनाल में तीन दिन पहले डूबे मायना के किशोर लक्की का अब तक सुराग नहीं लग सका है। शुक्रवार को परिजन लघु सचिवालय पहुंचे और प्रशासन से नहर का पानी कम करके बच्चे को ढूंढने की मांग की। मौके पर मौजूद वकील सतबीर कल्सन ने कहा कि नहरों में डूबने से लगातार युवाओं की मौत हो रही है, इसके बावजूद प्रशासन पुख्ता कदम नहीं उठाता। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक तीन दिन पहले मायना निवासी मनोज का बेटा 14 वर्षीय लक्की अपने दोस्त 17 वर्षीय सीबू के साथ झज्जर रोड स्थित जवाहर लाल नेहरू कैनाल में नहाने गया था। तेज बहाव में दोनों बह गए। सीबू को राहगीरों ने बचा लिया, लेकिन लक्की तेज बहाव में बह गया। गोताखोरों की मदद से पुलिस व परिजन उसे झज्जर के बाकरा हेड तक तलाश कर चुके हैं, लेकिन कहीं पता नहीं लग रहा। जांच अधिकारी एसआई अश्वनी ने बताया कि सिंचाई विभाग से कैनाल का पानी कम करने की मांग की थी, लेकिन अभी तक पानी कम नहीं हुआ है। इस कारण किशोर को तलाश करने में दिक्कत आ रही है।
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मैं भी खो चुका हूं बेटा, प्रशासन नहीं उठता कोई कदम
एडवोकेट सतबीर कल्सन ने बताया कि जुलाई माह में उसका बेटा राहुल अपने दोस्त हिमांशु के साथ नहर पर गया था। दोनों पानी में डूब गए। अगले दिन 10 किलोमीटर आगे शव मिले थे। प्रशासन को चाहिए कि नहरों पर स्थायी तौर पर गोताखोर लगाएं। साथ ही चेतावनी बोर्ड के साथ-साथ कर्मचारी नियुक्त किए जाएं, जो बच्चों को नहर में जाने से रोकें। वे मायना के परिवार का दर्द समझते हैं। जल्द सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।
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पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक तीन दिन पहले मायना निवासी मनोज का बेटा 14 वर्षीय लक्की अपने दोस्त 17 वर्षीय सीबू के साथ झज्जर रोड स्थित जवाहर लाल नेहरू कैनाल में नहाने गया था। तेज बहाव में दोनों बह गए। सीबू को राहगीरों ने बचा लिया, लेकिन लक्की तेज बहाव में बह गया। गोताखोरों की मदद से पुलिस व परिजन उसे झज्जर के बाकरा हेड तक तलाश कर चुके हैं, लेकिन कहीं पता नहीं लग रहा। जांच अधिकारी एसआई अश्वनी ने बताया कि सिंचाई विभाग से कैनाल का पानी कम करने की मांग की थी, लेकिन अभी तक पानी कम नहीं हुआ है। इस कारण किशोर को तलाश करने में दिक्कत आ रही है।
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मैं भी खो चुका हूं बेटा, प्रशासन नहीं उठता कोई कदम
एडवोकेट सतबीर कल्सन ने बताया कि जुलाई माह में उसका बेटा राहुल अपने दोस्त हिमांशु के साथ नहर पर गया था। दोनों पानी में डूब गए। अगले दिन 10 किलोमीटर आगे शव मिले थे। प्रशासन को चाहिए कि नहरों पर स्थायी तौर पर गोताखोर लगाएं। साथ ही चेतावनी बोर्ड के साथ-साथ कर्मचारी नियुक्त किए जाएं, जो बच्चों को नहर में जाने से रोकें। वे मायना के परिवार का दर्द समझते हैं। जल्द सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर करेंगे।
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