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Rohtak News: मोबाइल की गिरफ्त में थी जिंदगी...काउंसिलिंग से लौटी उम्मीद
Thu, 05 Feb 2026 04:14 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Thu, 05 Feb 2026 04:14 AM IST
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15-मनोवैज्ञानिक विपिन नैन।
अभिषेक कीरत
रोहतक। मोबाइल की लत न सिर्फ बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रही है बल्कि उन्हें जाने-अंजाने अपराध की दुनिया में धकेल रही है। नागरिक अस्पताल में ऐसे दो केस सामने आए हैं, जहां बच्चों ने ऑनलाइन गेम की लत पूरी करने के लिए अपने पिता के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर गेम और बिटक्वाइन में लाखों रुपये लगा दिए। घरवाले जब तक कुछ समझ पाते काफी देर हो चुकी थी। समझाने की कोशिश की गई तो इन बच्चों ने अपने मम्मी-पापा से मारपीट तक की कोशिश की। हालांकि, काउंसिलिंग और इलाज के बाद अब बच्चे धीरे-धीरे सामान्य जिंदगी में लौट आए हैं। संवाद
मोबाइल छीनते तो मारपीट करने लगता था सातवीं का छात्र
रोहतक नागरिक अस्पताल के मनोचिकित्सक डाॅ. विपिन नैन बताते हैं, मूलरूप से चरखी दादरी व हाल रोहतक निवासी एक व्यक्ति करीब सात माह पहले अपने सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे को लेकर उनके पास आए थे। उनके बेटे को ऑनलाइन गेमिंग की लत लग गई थी। वह पिता का क्रेडिट कार्ड चुराकर पैसे लगाता था। घरवालों को तब पता चला जब करीब तीन लाख रुपये का बिल आया। मम्मी-पापा ने मोबाइल देने से इन्कार किया तो वह रोने-चिल्लाने लगता। मोबाइल छीनने पर मारपीट करता था। सिविल अस्पताल में बच्चे की काउंसिलिंग की गई। बाद में केस रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। हालांकि, अभिभावक बच्चे को पीजीआई के बजाय गुरुग्राम ले गए। वहां उसका इलाज कराया।
बिटक्वाइन में दो लाख गंवाने से डिप्रेशन में चला गया 11वीं का छात्र
डॉ. विपिन नैन बताते हैं, करीब डेढ़ साल पहले रोहतक निवासी व्यक्ति अपने बेटे को लेकर उनके पास आए। 11वीं में पढ़ने वाले छात्र को बिटक्वाइन में इनवेस्टमेंट की लत लग गई थी। वह बच्चा दिन में सोता था और रात भर मोबाइल चलाता था। शुरू में तो उसने कुछ बिटक्वाइन से लाभ कमाया। फिर बाद में करीब दो लाख रुपये हार गया। इससे वह तनाव में आ गया। यहां छात्र की काउंसिलिंग की गई और नींद क्रम सुधारने के लिए दवाएं दी गईं। इससे दिनचर्या में बदलाव आया। अब बच्चा पूरी तरह ठीक है।
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कोविड के बाद बच्चों में मोबाइल की लत बढ़ी है। ऐसे में 14 साल से कम उम्र के बच्चाें को मोबाइल से जितना हो सके दूर रखना चाहिए। अभिभावकों को बच्चों के साथ अधिक समय बिताना चाहिए। अभिभावक खुद भी मोबाइल के इस्तेमाल के प्रति जागरूक रहें।
-डॉ. विनय, प्रोफेसर मानसिक स्वास्थ्य विभाग पीजीआई।
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रोहतक। मोबाइल की लत न सिर्फ बच्चों का भविष्य बर्बाद कर रही है बल्कि उन्हें जाने-अंजाने अपराध की दुनिया में धकेल रही है। नागरिक अस्पताल में ऐसे दो केस सामने आए हैं, जहां बच्चों ने ऑनलाइन गेम की लत पूरी करने के लिए अपने पिता के क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कर गेम और बिटक्वाइन में लाखों रुपये लगा दिए। घरवाले जब तक कुछ समझ पाते काफी देर हो चुकी थी। समझाने की कोशिश की गई तो इन बच्चों ने अपने मम्मी-पापा से मारपीट तक की कोशिश की। हालांकि, काउंसिलिंग और इलाज के बाद अब बच्चे धीरे-धीरे सामान्य जिंदगी में लौट आए हैं। संवाद
मोबाइल छीनते तो मारपीट करने लगता था सातवीं का छात्र
रोहतक नागरिक अस्पताल के मनोचिकित्सक डाॅ. विपिन नैन बताते हैं, मूलरूप से चरखी दादरी व हाल रोहतक निवासी एक व्यक्ति करीब सात माह पहले अपने सातवीं कक्षा में पढ़ने वाले बेटे को लेकर उनके पास आए थे। उनके बेटे को ऑनलाइन गेमिंग की लत लग गई थी। वह पिता का क्रेडिट कार्ड चुराकर पैसे लगाता था। घरवालों को तब पता चला जब करीब तीन लाख रुपये का बिल आया। मम्मी-पापा ने मोबाइल देने से इन्कार किया तो वह रोने-चिल्लाने लगता। मोबाइल छीनने पर मारपीट करता था। सिविल अस्पताल में बच्चे की काउंसिलिंग की गई। बाद में केस रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया। हालांकि, अभिभावक बच्चे को पीजीआई के बजाय गुरुग्राम ले गए। वहां उसका इलाज कराया।
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बिटक्वाइन में दो लाख गंवाने से डिप्रेशन में चला गया 11वीं का छात्र
डॉ. विपिन नैन बताते हैं, करीब डेढ़ साल पहले रोहतक निवासी व्यक्ति अपने बेटे को लेकर उनके पास आए। 11वीं में पढ़ने वाले छात्र को बिटक्वाइन में इनवेस्टमेंट की लत लग गई थी। वह बच्चा दिन में सोता था और रात भर मोबाइल चलाता था। शुरू में तो उसने कुछ बिटक्वाइन से लाभ कमाया। फिर बाद में करीब दो लाख रुपये हार गया। इससे वह तनाव में आ गया। यहां छात्र की काउंसिलिंग की गई और नींद क्रम सुधारने के लिए दवाएं दी गईं। इससे दिनचर्या में बदलाव आया। अब बच्चा पूरी तरह ठीक है।
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कोविड के बाद बच्चों में मोबाइल की लत बढ़ी है। ऐसे में 14 साल से कम उम्र के बच्चाें को मोबाइल से जितना हो सके दूर रखना चाहिए। अभिभावकों को बच्चों के साथ अधिक समय बिताना चाहिए। अभिभावक खुद भी मोबाइल के इस्तेमाल के प्रति जागरूक रहें।
-डॉ. विनय, प्रोफेसर मानसिक स्वास्थ्य विभाग पीजीआई।
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15-मनोवैज्ञानिक विपिन नैन।