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आतंक की उस रात चंद कदमों की दूरी पर था काल
विनीत तोमर /अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 19 Jul 2016 03:06 AM IST
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28 जून की रात इस्तांबुल एयरपोर्ट पर हुए आतंकी हमले में फंस गए थे एमडीयू के प्रोफेसर
- फोटो : amar ujala
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रात के करीब 10:30 बजे एयरपोर्ट के ग्राउंड फ्लोर पर तेज धमाका हुआ। विस्फोट की आवाज सुनकर जैसे ही नीचे देखा तो आंखों के सामने भयावह मंजर था। खून से लथपथ लाशें इधर-उधर बिखरी पड़ी थीं। विस्फोट करने के बाद आत्मघाती हमलावर सेकेंड फ्लोर की तरफ आ रहा था। एक पल के लिए सांसें थम गईं, लगा कि अब जिंदगी बचाने वाला कोई नहीं है, लेकिन अचानक सुरक्षा बलों ने आत्मघाती हमलावर को मार गिराया। इसके बाद जाकर जान में जान आई। दहशत का यह मंजर 28 जून की रात तुर्की के इस्तांबुल एयरपोर्ट पर हुए विस्फोट का है, जिसकी आंखों देखी दास्तां एमडीयू के प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र छिल्लर ने अमर उजाला को सुनाई।
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के कंप्यूटर साइंस एवं एप्लीकेशन विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र छिल्लर 28 जून को दिल्ली से रूमानिया जाने के लिए रवाना हुए थे। वहां पर उन्हें 29 जून से 2 जुलाई तक यूनिवर्सिटी ऑफ रूमानिया में आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस में भाग लेना था। डॉ. छिल्लर ने बताया कि शाम करीब तीन बजे उनकी फ्लाइट तुर्की के इस्तांबुल एयरपोर्ट पर पहुंची। वहां से रात करीब 12 बजे रूमानिया की फ्लाइट पकड़नी थी। वह दूसरी मंजिल पर बैठकर फ्लाइट का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच रात करीब 10:30 बजे ग्राउंड फ्लोर पर तेज धमाका हुआ और कुछ ही पल बाद एक और धमाका हुआ। लगातार दो धमाकों के बाद एयरपोर्ट पर भगदड़ मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। विस्फोटों में दो आत्मघाती बम हमलावर मौके पर ही मारे गए, जबकि उनका तीसरा साथी दूसरी मंजिल को उड़ाने के लिए सीढ़ियों की तरफ बढ़ रहा था। इसी बीच सुरक्षा बलों ने उसे मार गिराया। प्रो. छिल्लर ने बताया कि यदि आत्मघाती आतंकी नहीं मारा जाता तो आज वह जिंदा नहीं होते। ताबड़तोड़ हुए विस्फोटों के बाद चारों तरफ से खून से लथपथ लाशें पड़ी थीं। लगभग तीन घंटे तक खौफनाक मंजर बना रहा। सुबह करीब तीन बजे एयरपोर्ट खाली कराया गया। आतंक की उस भयावह रात को याद करके प्रो. छिल्लर आज भी कांप उठते हैं।
नहीं मिली मदद, महंगे रेट पर दिया होटल
एयरपोर्ट खाली कराने के बाद यात्रियों को बस से होटल में लाया गया। होटल संचालकों ने भी मदद करने की बजाय मौके का फायदा उठाया। पहले जहां कमरे का रेट 100 डॉलर था उस रात होटल वालों ने 200 से 300 डॉलर में कमरा दिया। अगले दिन दोपहर के समय फ्लाइट शुरू हुई, तब जाकर वह रूमानिया जा सके।
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एयरपोर्ट की सुरक्षा पर उठाए सवाल
डॉ. छिल्लर का कहना है कि भारत में एयरपोर्ट की सुरक्षा अच्छी है। इस्तांबुल एयरपोर्ट मेन गेट पर चेकिंग नहीं हुई। कोई भी व्यक्ति हाल में एंट्री कर सकता है। इसके बाद उसकी चेकिंग होती है। एयरपोर्ट पर ऐसी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसी का फायदा आतंकी उठाते हैं।
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के कंप्यूटर साइंस एवं एप्लीकेशन विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेंद्र छिल्लर 28 जून को दिल्ली से रूमानिया जाने के लिए रवाना हुए थे। वहां पर उन्हें 29 जून से 2 जुलाई तक यूनिवर्सिटी ऑफ रूमानिया में आयोजित इंटरनेशनल कांफ्रेंस में भाग लेना था। डॉ. छिल्लर ने बताया कि शाम करीब तीन बजे उनकी फ्लाइट तुर्की के इस्तांबुल एयरपोर्ट पर पहुंची। वहां से रात करीब 12 बजे रूमानिया की फ्लाइट पकड़नी थी। वह दूसरी मंजिल पर बैठकर फ्लाइट का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच रात करीब 10:30 बजे ग्राउंड फ्लोर पर तेज धमाका हुआ और कुछ ही पल बाद एक और धमाका हुआ। लगातार दो धमाकों के बाद एयरपोर्ट पर भगदड़ मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। विस्फोटों में दो आत्मघाती बम हमलावर मौके पर ही मारे गए, जबकि उनका तीसरा साथी दूसरी मंजिल को उड़ाने के लिए सीढ़ियों की तरफ बढ़ रहा था। इसी बीच सुरक्षा बलों ने उसे मार गिराया। प्रो. छिल्लर ने बताया कि यदि आत्मघाती आतंकी नहीं मारा जाता तो आज वह जिंदा नहीं होते। ताबड़तोड़ हुए विस्फोटों के बाद चारों तरफ से खून से लथपथ लाशें पड़ी थीं। लगभग तीन घंटे तक खौफनाक मंजर बना रहा। सुबह करीब तीन बजे एयरपोर्ट खाली कराया गया। आतंक की उस भयावह रात को याद करके प्रो. छिल्लर आज भी कांप उठते हैं।
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नहीं मिली मदद, महंगे रेट पर दिया होटल
एयरपोर्ट खाली कराने के बाद यात्रियों को बस से होटल में लाया गया। होटल संचालकों ने भी मदद करने की बजाय मौके का फायदा उठाया। पहले जहां कमरे का रेट 100 डॉलर था उस रात होटल वालों ने 200 से 300 डॉलर में कमरा दिया। अगले दिन दोपहर के समय फ्लाइट शुरू हुई, तब जाकर वह रूमानिया जा सके।
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एयरपोर्ट की सुरक्षा पर उठाए सवाल
डॉ. छिल्लर का कहना है कि भारत में एयरपोर्ट की सुरक्षा अच्छी है। इस्तांबुल एयरपोर्ट मेन गेट पर चेकिंग नहीं हुई। कोई भी व्यक्ति हाल में एंट्री कर सकता है। इसके बाद उसकी चेकिंग होती है। एयरपोर्ट पर ऐसी लापरवाही नहीं होनी चाहिए। इसी का फायदा आतंकी उठाते हैं।