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Rohtak News: विडंबना... अपनों का कंधा मिला रहा न समय पर अस्थियां प्रवाहित

Sun, 16 Jun 2024 02:44 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक Updated Sun, 16 Jun 2024 02:44 AM IST
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Irony... the shoulders of loved ones remained intact and the ashes flowed on time.
विजेंद्र कौशिक
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रोहतक। शहर में लावारिस हालत में मिलने वाले शवों को न तो अपनों का कंधा मिल पा रहा है और न ही समय पर अस्थियां प्रवाहित हो पा रही हैं, क्योंकि नगर निगम की तरफ से अस्थियों को हरिद्वार ले जाकर गंगा में प्रवाहित करने की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में दो से ढाई माह तक अस्थियां श्मशान में रखी रहती हैं।
भीषण गर्मी के चलते लावारिस हालत में मिलने वाले शवों की संख्या बढ़ती जा रही है। अकेले मई व जून में अब तक छह शव शहर में मिल चुके हैं। हिसार रोड पर एक दिन में सिटी पुलिस को दो शव मिले थे। दूसरी तरफ जीआरपी को रेलवे के दायरे में छह माह में 30 शव मिल चुके हैं, इनमें से मात्र 12 की शिनाख्त हो पाई है। नियमों के तहत पुलिस 72 घंटे तक शव को शिनाख्त के लिए पीजीआई के डेड हाउस में रखवाती है। शिनाख्त नहीं होने पर नगर निगम को सूचित किया जाता है। नगर निगम का एक कर्मचारी लावारिस शवों को ट्रैक्टर-ट्राॅली में डालकर श्मशान घर में लेकर जाता है। वहां श्मशान घाट प्रबंधन समिति की तरफ से अंतिम संस्कार किया जाता है।
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4400 रुपये में होता है एक शव का अंतिम संस्कार
नगर निगम को लावारिस शवों का अंतिम संस्कार के लिए सरकार की तरफ से 4400 रुपये दिए जाते हैं। इसमें एक हजार रुपये वह कर्मचारी लेता है, जो शव को डेड हाउस से श्मशान में लेकर आता है। 3400 रुपये प्रति शव श्मशान घाट की प्रबंधन समिति को दिए जाते हैं।
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प्राचीन शिव मंदिर श्मशान में महंगा पड़ रहा था अंतिम संस्कार
नगर निगम के एक अधिकारी ने बताया कि करोना काल में लावारिस शवों का अंतिम संस्कार वैश्य संस्था के नजदीक प्राचीन शिव मंदिर श्मशान घर में किया जाता था। वहां लागत ज्यादा बनती थी। ऐसे में शीला बाईपास स्थित रामबाग श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया गया। हर माह 10 से ज्यादा लावारिस शव आते हैं।
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कोट्स

निगम की तरफ से केवल 3400 की राशि अंतिम संस्कार के लिए दी जाती है। अस्थियां प्रवाहित करने के लिए कुछ नहीं दिया जाता। दो माह तक अस्थियां श्मशान में रखते हैं। दिल्ली के एक समाजसेवी रोहतक आते हैं और अस्थियां लेकर प्रवाहित करने हरिद्वार जाते हैं।

- सुरेंद्र बतरा, उपप्रधान, रामबाग श्मशान सेवा समिति
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जीआरपी को छह माह में 30 लावारिस शव मिल चुके हैं। इनमें से 18 की पहचान नहीं हुई है। एक शव शुक्रवार शाम को ही मिला था। 72 घंटे के लिए शव डेड हाउस रखते हैं। इसके बाद अगर शिनाख्त नहीं होती तो शव को पोस्टमार्टम के बाद नगर निगम को सौंप देते हैं। आगे निगम की अंतिम संस्कार करवाता है।
- एएसआई हरिओम मलिक, जीआरपी
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सरकार की ओर से तय नियमों व बजट के दायरे में समय पर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करवाया जाता है। इसके लिए सफाई ब्रांच की ड्यूटी लगी है।
- विजय सिंह, संयुक्त आयुक्त नगर निगम
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