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ऐसे में घर बैठे कैसे होगी एमबीबीएस की पढ़ाई...
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प्रदेश का सबसे बड़ा चिकित्सा संस्थान पीजीआईएमएस (स्नातकोत्तर चिकित्सा विज्ञान संस्थान) इन दिनों खुद बीमार नजर आ रहा है। लोगों का इलाज करने के साथ-साथ भावी चिकित्सक तैयार करने वाले इस संस्थान में व्यवस्थाएं चरमराई हुई है। हालात ये हैं कि एमबीबीएस की पढ़ाई करने वालों के लिए लेक्चर थियेटर तक नहीं हैं। संस्थान ने विद्यार्थियों को घर पर ही ऑनलाइन पढ़ाने का प्रयास किया तो यह सिस्टम भी तकनीकी गड़बड़ी के कारण बंद हो गया। ऐसे में घर बैठे विद्यार्थी कैसे एबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बनेंगे, यह अपने आप में सवाल खड़े कर रहा है।
पीजीआई में एमबीबीएस की 250 सीटें हैं। इस पंचवर्षीय कोर्स में हर वर्ष इतने ही विद्यार्थियों के दाखिला लेने से पांच वर्ष में इनकी संख्या 1250 हो जाती है। इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कम से कम पांच लेक्चर थियेटर की जरूरत है। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को कोविड काल में सामाजिक दूरी के तहत पढ़ाना मुश्किल है। इसके लिए कई लेक्चर थियेटरों की जरूरत है। जबकि संस्थान में फिलहाल एक ही लेक्चर थियेटर है। मेडिकल कॉलेज एवं निदेशक कार्यालय के पीछे स्थिति लेक्चर थियेटर नंबर पांच है। यही विद्यार्थियों को कुछ पढ़ाने लायक स्थिति में है। इसके भी माइक सिस्टम में गड़बड़ी रहती है।
लेक्चर थियेटरों की कमी व महामारी को देखते हुए संस्थान प्रबंधन में विद्यार्थियों को घर पर ही ऑनलाइन पढ़ाने की योजना बनाई। यह योजना भी धराशायी हो गई। इसकी वजह ऑनलाइन पढ़ाई कराने वाले सिस्टम का फेल हो जाना बताया गया है। इसके कारण ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं हो पाई। ऐसे में विद्यार्थी परेशान हैं। यही स्थिति बनी रही तो उनके लिए घर पर रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करना मुश्किल नजर आ रहा है।
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लेक्चर वन थियेटर का बदला फर्नीचर
पीजीआई के एमएस कार्यालय के पास लेक्चर वन थियेटर है। यह संस्थान का सबसे पुराना व अहम लेक्चर थियेटर है। विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए कक्षा लगानी हो, सेमिनार हो, कार्यालय संबंधी बैठक हो या अन्य कार्यक्रम यहीं आयोजन किया जाता है। इन दिनों यहां इसके नवीनीकरण का काम चल रहा है। इस थियेटर का फर्नीचर बदलकर इसे नया रूप देने का काम लगभग पूरा हो चुका है। इस थियेटर के चालू होने से विद्यार्थियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
संस्थान में थियेटर की समस्या का समाधान हो गया है। लेक्चर वन थियेटर का काम भी पूरा हो चुका है। ऑनलाइन सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी आई थी। यह समस्या एक-दो दिन ही रही। अब सब ठीक है। विद्यार्थियों की पढ़ाई में किसी तरह की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
- प्रो. सरिता मग्गू, डीन, पीजीआईएमएस
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पीजीआई में एमबीबीएस की 250 सीटें हैं। इस पंचवर्षीय कोर्स में हर वर्ष इतने ही विद्यार्थियों के दाखिला लेने से पांच वर्ष में इनकी संख्या 1250 हो जाती है। इन विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कम से कम पांच लेक्चर थियेटर की जरूरत है। इतनी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को कोविड काल में सामाजिक दूरी के तहत पढ़ाना मुश्किल है। इसके लिए कई लेक्चर थियेटरों की जरूरत है। जबकि संस्थान में फिलहाल एक ही लेक्चर थियेटर है। मेडिकल कॉलेज एवं निदेशक कार्यालय के पीछे स्थिति लेक्चर थियेटर नंबर पांच है। यही विद्यार्थियों को कुछ पढ़ाने लायक स्थिति में है। इसके भी माइक सिस्टम में गड़बड़ी रहती है।
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लेक्चर थियेटरों की कमी व महामारी को देखते हुए संस्थान प्रबंधन में विद्यार्थियों को घर पर ही ऑनलाइन पढ़ाने की योजना बनाई। यह योजना भी धराशायी हो गई। इसकी वजह ऑनलाइन पढ़ाई कराने वाले सिस्टम का फेल हो जाना बताया गया है। इसके कारण ऑनलाइन पढ़ाई भी नहीं हो पाई। ऐसे में विद्यार्थी परेशान हैं। यही स्थिति बनी रही तो उनके लिए घर पर रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करना मुश्किल नजर आ रहा है।
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लेक्चर वन थियेटर का बदला फर्नीचर
पीजीआई के एमएस कार्यालय के पास लेक्चर वन थियेटर है। यह संस्थान का सबसे पुराना व अहम लेक्चर थियेटर है। विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए कक्षा लगानी हो, सेमिनार हो, कार्यालय संबंधी बैठक हो या अन्य कार्यक्रम यहीं आयोजन किया जाता है। इन दिनों यहां इसके नवीनीकरण का काम चल रहा है। इस थियेटर का फर्नीचर बदलकर इसे नया रूप देने का काम लगभग पूरा हो चुका है। इस थियेटर के चालू होने से विद्यार्थियों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
संस्थान में थियेटर की समस्या का समाधान हो गया है। लेक्चर वन थियेटर का काम भी पूरा हो चुका है। ऑनलाइन सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी आई थी। यह समस्या एक-दो दिन ही रही। अब सब ठीक है। विद्यार्थियों की पढ़ाई में किसी तरह की दिक्कत नहीं आने दी जाएगी।
- प्रो. सरिता मग्गू, डीन, पीजीआईएमएस