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जिले में धान की फसल पर हॉपर का हमला

Tue, 12 Oct 2021 01:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 12 Oct 2021 01:27 AM IST
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Hopper's attack on paddy crop in the district
खेतों में खराब हुई धान की फसल। संवाद
पहले धान पर मौसम की मार पड़ी, अब धान की फसल पर हॉपर कीट का हमला हो गया है। शुरुआती आकलन के अनुसार जिले के ज्यादातर गांवों में इसका प्रभाव है। नुकसान का जायजा लेने के लिए खेतीबाड़ी विभाग फील्ड सर्वे करवा रहा है। किसानों को भी हॉपर, उसके खतरे और खात्मे के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
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हर साल हॉपर का मामूली हमला कहीं न कहीं होता रहता है, लेकिन इस बार इसका प्रकोप काफी ज्यादा है। खेतीबाड़ी विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार मौसम इसके लिए बहुत अनुकूल है। खेतों में पानी भरा है, दिन में गर्मी है और रात को हल्की ठंड हो जाती है। यही मौसम हॉपर को सूट करता है। इसलिए इसका प्रकोप तेजी से बढ़ा है। हॉपर ह्वाइट, ब्राउन और ब्लैक होते हैं। इसमें ब्लैक हॉपर का प्रकोप है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह कीट इतना खतरनाक है कि अगर तीन दिन तक इसकी रोकथाम न की जाए तो पूरा खेत खत्म हो जाता है। किसानों ने शिकायत की थी कि बारिश और तेज हवाओं से धान की फसल खेतों में बिछ गई। लेकिन इसकी वजह भी हॉपर है। यह कीट धान के पौधे के निचले हिस्से से सारा रस चूस लेता है। निचला हिस्सा कमजोर होता है और तैयार पौधे का भार नहीं उठा पाता, जिससे वह गिर जाता है।
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इकोनॉमिक थ्रेस-ओल्ड लेवल ज्यादा
खेतीबाड़ी विभाग के ब्लॉक कृषि अधिकारी डॉ. यशपाल दहिया ने बताया कि हॉपर का प्रकोप इकोनॉमिक थ्रेस-ओल्ड (ईटीएल) लेवल के आधार पर नापते हैं। अगर ईटीएल का स्तर दस से नीचे है तो इसका मतलब यह है कि कीट का प्रकोप कम है। अगर इससे ज्यादा है तो कीटनाशक स्प्रे की जरूरत पड़ेगी। इस बार ईटीएल काफी ज्यादा है। इसलिए किसानों को कीटनाशक स्प्रे करने को कहा जा रहा है।
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रेत के साथ कीटनाशक का छिड़काव कारगर
डॉ. यशपाल दहिया ने बताया कि कीटनाशक स्प्रे में कई बार समय लग जाता है। किसान पहले कीटनाशक खरीदता है, फिर छिड़काव करने वाले को ढूंढता है, इसमें काफी वक्त बर्बाद हो जाता है। ऐसे में रेत के साथ कीटनाशक का छिड़काव काफी कारगर है। आधा लीटर डाइक्लोरो वाश को पचास किलो रेत में मिलाने के बाद शाम पांच-छह बजे, जब हवा रुक जाती है, प्रभावित फसल पर डालने से कीट मर जाते हैं। अगर हवा चल रही है तो किसान चेहरा दूसरी तरफ कर के छिड़काव करे, मुंह को अच्छे ढंग से ढकें। लेकिन जिस खेत में पानी भरा होगा, वहां यह विधि काम नहीं चलेगी।

व्हाट्स एप ग्रुपों से किसानों को कर रहे जागरूक
डॉ. यशपाल दहिया ने बताया कि ब्लॉक स्तर पर किसानों के व्हाट्स एप ग्रुप बनाए गए हैं, जहां किसान लगातार फोटो और वीडियो डाल रहे हैं। कृषि अधिकारी उन ग्रुपों में ही उनका समाधान बता रहे हैं। किसानों को कीटनाशक और स्प्रे करने कि विधि आदि बताई जा रही है। क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट के लिए गांवों में गए कृषिकर्मी भी किसानों को जागरूक कर रहे हैं। सबसे अहम बात यह है कि किसानों को नियमित अपने खेत की पड़ताल करनी होगी।
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