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होलिका दहन का शुभ मुहूर्त शाम 4:12 से 6:37 तक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 22 Mar 2016 09:08 AM IST
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महिलाओं की होली
- फोटो : अमर उजाला
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भद्रा और पूर्णिमा की जुगलबंदी ने अबकी बार होलिका दहन पर लोगों को असमंजस में डाल दिया है। माताएं अपनी संतानों के सुख, समृद्धि और दीर्घायु के लिए होलिका पूजन को लेकर असमंजस में हैं। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक 22 मार्च को दोपहर 3:13 मिनट पर पूर्णिमा शुरू होगी, जो 23 मार्च को तीन पहर से अधिक समय यानी शाम 5:31 बजे तक रहेगी। पूर्णिमा के साथ भद्रा काल भी शुरू होगा, जो देर रात 4:22 बजे तक रहेगा।
पूर्णिमा के दिन ही होलिका दहन का नियम है। इसलिए 23 मार्च को प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में ही होलिका दहन किया जाएगा और 24 मार्च को दुलहंडी पर रंग बरसेंगे।
होलिका दहन एक दिन बाद यानी बुधवार को है। जहां गली-मोहल्ले में डांडे लग गए हैैं, वहीं शहर के बाजार भी सजकर तैयार हैं। महिलाओं ने पूजन के लिए खरीददारी भी करनी शुरू कर दी है। पंडित संदीप पाठक ने बताया कि 23 मार्च को होलिका दहन के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं। प्रथम मुहूर्त शाम 4:12 बजे से 6:37 बजे तक है और दूसरा मुहूूर्त प्रदोष काल में शाम 5:30 बजे है। ये दोनों ही मुहूर्त होेलिका दहन के लिए शुभ हैं।
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पंडित ओम प्रकाश ने बताया कि 23 मार्च को संतानों की दीर्घायु के लिए होलिका पूजन सुबह नौ से 11 बजे तक स्थिर लग्न और वृष लग्न में करें। इसके बाद दोपहर में 3:30 से शाम 5:47 बजे तक भी पूजन किया जा सकता है।
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पूर्णिमा के दिन ही होलिका दहन का नियम है। इसलिए 23 मार्च को प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में ही होलिका दहन किया जाएगा और 24 मार्च को दुलहंडी पर रंग बरसेंगे।
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होलिका दहन एक दिन बाद यानी बुधवार को है। जहां गली-मोहल्ले में डांडे लग गए हैैं, वहीं शहर के बाजार भी सजकर तैयार हैं। महिलाओं ने पूजन के लिए खरीददारी भी करनी शुरू कर दी है। पंडित संदीप पाठक ने बताया कि 23 मार्च को होलिका दहन के लिए दो शुभ मुहूर्त हैं। प्रथम मुहूर्त शाम 4:12 बजे से 6:37 बजे तक है और दूसरा मुहूूर्त प्रदोष काल में शाम 5:30 बजे है। ये दोनों ही मुहूर्त होेलिका दहन के लिए शुभ हैं।
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पंडित ओम प्रकाश ने बताया कि 23 मार्च को संतानों की दीर्घायु के लिए होलिका पूजन सुबह नौ से 11 बजे तक स्थिर लग्न और वृष लग्न में करें। इसके बाद दोपहर में 3:30 से शाम 5:47 बजे तक भी पूजन किया जा सकता है।