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बगैर डिग्री बने हाउस सर्जन, पीजीआई से 4 डॉक्टर टर्मिनेट
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 29 Dec 2015 02:26 AM IST
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प्रदेश के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान यहां स्थित पीजीआई में प्रबंधन की
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सख्ती के बाद बड़े फर्जीवाड़े सामने आ रहे हैं। यहां एमबीबीएस की डिग्री
पूरा किए बिना ही कुछ मेडिकल स्टूडेंट हाउस सर्जन बन कर काम करते हुए मिले
हैं। जांच के बाद चारों को निलंबित कर दिया गया है।
हैरानी की बात है कि जिन डॉक्टरों की बतौर हाउस सर्जन यहां नियुक्ति की गई, उनमें से कई अन्य जगहों पर पीजी कर रहे हैं। जबकि उनके नियुक्ति पत्र पर कई वार्डों में एमबीबीएस छात्र ड्यूटी कर रहे थे और वेतन भी ले रहे थे। सूत्रों की मानें तो अपनी जगह दूसरों से ड्यूटी कराने वाले डॉक्टर इन छात्रों को अपने वेतन का एक हिस्सा भी देते थे।
क्योंकि नौकरी, नाम, मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट सभी उन्हीं के नाम पर था। अब संस्थान इन पर एफआईआर कराने की तैयारी में है, जिसके बाद सभी को पुलिस के हवाले किया जाएगा। प्रबंधन का दावा है कि अभी जांच जारी है और कई ऐसे छात्र पकड़ में आने बाकी हैं।
एफआईआर में अपनी जगह दूसरों को काम करवाने वाले और टर्मिनेट किए गए सभी छात्रों के नाम उजागर किए जाएंगे। जांच अधिकारियाें की मानें तो इस गड़बड़झाले में चिकित्सा छात्र और डॉक्टर दोनों दोषी हैं। इसमें जारी वेतन की रिकवरी 8 से 18 फीसदी ब्याज सहित हो सकती है। एक हाउस सर्जन का वेतन करीब 45 हजार 900 रुपये है। वहीं, 13-14 की जांच पाइप लाइन में है।
संस्थान में 90 के करीब हाउस सर्जन हैं, इसमें आधे छह माह बतौर हाउस सर्जन और आधे छह माह सीनियर हाउस सर्जन काम करते हैं।
10 सालों का खंगाला जा सकता है रिकॉर्ड
पीजीआई की विजिलेंस टीम अब पिछले दस सालों में हुई नियुक्तियों का रिकॉर्ड खंगाल सकती है। हाउस सर्जन और चिकित्सा छात्रों की गड़बड़ी के खुलासे के साथ कुछ नियुक्ति फर्जी दस्तावेजों की भी सामने आई हैं।
जांच अधिकारियों को एसआईएमएच (स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ साइंस) में भी कुछ गड़बड़ी के सुराग हाथ लगे हैं। प्रबंधन इनकी भी जांच कराने के आदेश जारी कर सकता है। बता दें कि इससेे पहले एक टेक्नीशियन को भी टर्मिनेट किया जा चुका है।
एचसीएमएस से भी जा सकती है नौकरी
प्रदेश में कुछ डॉक्टरों ने बतौर हाउस सर्जन अपना नियुक्ति पत्र किसी अन्य को कार्य करने के लिए सौंप दिया और वे खुद एचसीएमएस (हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज) में नौकरी कर रहे हैं।
उनके लिए अब मुसीबत खड़ी हो सकती है। क्योंकि चिकित्सा नियमों के अनुसार यह अपराध की श्रेणी में है। एमबीबीएस छात्र बगैर डिग्री पूरी किए और अपना पंजीकरण कराए किसी मरीज का उपचार नहीं कर सकता। साथ ही कोई भी डॉक्टर अपनी डिग्री का दुरुपयोग नहीं कर सकता।
बोले अधिकारी
अभी तक 5 को निलंबित किया जा चुका है और मामला पुलिस को देने की तैयारी है। हम किसी भी सूरत में गलत व्यक्ति के हाथाें में मरीजों को नहीं सौंपेंगे। जांच टीम काम कर रही है, उसकी रिपोर्ट पर हम कार्रवाई करेंगे।
- डॉ. ओपी कालरा, कुलपति, हेल्थ यूनिवर्सिटी रोहतक।
हैरानी की बात है कि जिन डॉक्टरों की बतौर हाउस सर्जन यहां नियुक्ति की गई, उनमें से कई अन्य जगहों पर पीजी कर रहे हैं। जबकि उनके नियुक्ति पत्र पर कई वार्डों में एमबीबीएस छात्र ड्यूटी कर रहे थे और वेतन भी ले रहे थे। सूत्रों की मानें तो अपनी जगह दूसरों से ड्यूटी कराने वाले डॉक्टर इन छात्रों को अपने वेतन का एक हिस्सा भी देते थे।
क्योंकि नौकरी, नाम, मोबाइल नंबर, बैंक अकाउंट सभी उन्हीं के नाम पर था। अब संस्थान इन पर एफआईआर कराने की तैयारी में है, जिसके बाद सभी को पुलिस के हवाले किया जाएगा। प्रबंधन का दावा है कि अभी जांच जारी है और कई ऐसे छात्र पकड़ में आने बाकी हैं।
एफआईआर में अपनी जगह दूसरों को काम करवाने वाले और टर्मिनेट किए गए सभी छात्रों के नाम उजागर किए जाएंगे। जांच अधिकारियाें की मानें तो इस गड़बड़झाले में चिकित्सा छात्र और डॉक्टर दोनों दोषी हैं। इसमें जारी वेतन की रिकवरी 8 से 18 फीसदी ब्याज सहित हो सकती है। एक हाउस सर्जन का वेतन करीब 45 हजार 900 रुपये है। वहीं, 13-14 की जांच पाइप लाइन में है।
संस्थान में 90 के करीब हाउस सर्जन हैं, इसमें आधे छह माह बतौर हाउस सर्जन और आधे छह माह सीनियर हाउस सर्जन काम करते हैं।
10 सालों का खंगाला जा सकता है रिकॉर्ड
पीजीआई की विजिलेंस टीम अब पिछले दस सालों में हुई नियुक्तियों का रिकॉर्ड खंगाल सकती है। हाउस सर्जन और चिकित्सा छात्रों की गड़बड़ी के खुलासे के साथ कुछ नियुक्ति फर्जी दस्तावेजों की भी सामने आई हैं।
जांच अधिकारियों को एसआईएमएच (स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ साइंस) में भी कुछ गड़बड़ी के सुराग हाथ लगे हैं। प्रबंधन इनकी भी जांच कराने के आदेश जारी कर सकता है। बता दें कि इससेे पहले एक टेक्नीशियन को भी टर्मिनेट किया जा चुका है।
एचसीएमएस से भी जा सकती है नौकरी
प्रदेश में कुछ डॉक्टरों ने बतौर हाउस सर्जन अपना नियुक्ति पत्र किसी अन्य को कार्य करने के लिए सौंप दिया और वे खुद एचसीएमएस (हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज) में नौकरी कर रहे हैं।
उनके लिए अब मुसीबत खड़ी हो सकती है। क्योंकि चिकित्सा नियमों के अनुसार यह अपराध की श्रेणी में है। एमबीबीएस छात्र बगैर डिग्री पूरी किए और अपना पंजीकरण कराए किसी मरीज का उपचार नहीं कर सकता। साथ ही कोई भी डॉक्टर अपनी डिग्री का दुरुपयोग नहीं कर सकता।
बोले अधिकारी
अभी तक 5 को निलंबित किया जा चुका है और मामला पुलिस को देने की तैयारी है। हम किसी भी सूरत में गलत व्यक्ति के हाथाें में मरीजों को नहीं सौंपेंगे। जांच टीम काम कर रही है, उसकी रिपोर्ट पर हम कार्रवाई करेंगे।
- डॉ. ओपी कालरा, कुलपति, हेल्थ यूनिवर्सिटी रोहतक।