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50 साल में पहली बार इस तरह जला हरियाणा

Sat, 20 Feb 2016 12:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Sat, 20 Feb 2016 12:21 AM IST
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first time such stir in haryana

हरियाणा के दामन पर स्वर्ण जयंती वर्ष में ऐसा दाग लगा है जो शायद ही कभी धुल सके। क्योंकि 50 साल होने के बावजूद कभी ऐसा नहीं हुआ था कि प्रदेश का कोई जिला इस तरह से जल रहा हो। लेकिन अब केवल रोहतक ही नहीं, बल्कि कई जिले जलने शुरू हो गए हैं। इसमें सबसे बड़ा दर्द यह हो रहा है कि भाईचारा पूरी तरह से खत्म हो रहा है।

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पंजाब से अलग हुए हरियाणा को 50 साल होने वाले हैं। चंद महीने बाद ही सरकार धूमधाम से स्वर्ण जयंती मनाने वाली थी, लेकिन इससे पहले ही हरियाणा जल उठा। प्रदेश के गठन से अब तक इस तरह की गृहयुद्ध सी स्थिति पहले कभी नहीं रही। ऐसा नहीं है कि आंदोलन पहले नहीं हुए हैं, बल्कि यहां आरक्षण के लिए ही कई बार बड़े आंदोलन हुए। प्रदेश में वर्ष 2010, 2012 के आंदोलन भी हुए हैं। इनकी अगुवाई जाटों के कई बड़े आंदोलनकारियों ने की लेकिन उस समय भी इस तरह का उपद्रव नहीं हुआ। 

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आंदोलन उग्र होते ही स्थिति संभाल ली गई। जिस तरह का दाग इस उपद्रव से हरियाणा के दामन पर 50 साल बाद लगा है, वह शायद ही अगले कई दशकों तक धुल सकेगा। प्रदेश में कोई एक बिरादरी नहीं, बल्कि जाट, पंजाबी, वैश्य, सैनी, राजपूत आदि 36 बिरादरियां मौजूद बसती हैं। लेकिन इस उपद्रव से पहले तक उनमें इस तरह का भाईचारा बना था कि एक-दूसरे के दुख-सुख में हर समय साथ रहते थे। 

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यह भाईचारा आजादी से लगातार चला आ रहा है, लेकिन इस उपद्रव से जातीय सौहार्द की खाई खुद गई है। जातीय संघर्ष होने के कारण लोग एक-दूसरे के जान के दुश्मन बने हुए हैं। हर किसी के जहन में अब एक ही सवाल उठ रहा है कि हरियाणा के दामन पर लगातार बढ़ता जा रहा यह दाग कब से साफ होना शुरू होगा।

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