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खुलासाः यूजीसी की बिना अनुमति एफडीडीआई ने किया एमओयू
ब्यूरो/ अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 15 Jan 2016 10:04 PM IST
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यूजीसी की अनुमति के बिना ही एफडीडीआई और मेवाड़ यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू हो गया। यह खुलासा आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी से हुआ है।
देशभर के फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के आठ संस्थान हैं। वर्ष 2012 में एफडीडीआई और मेवाड़ यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू हुआ था, जो मई 2015 में खत्म हो गया था।
इस एमओयू के बाद से संस्थान की डिग्री को लेकर विवाद शुरू हो गया था। अब एफडीडीआई और मेवाड़ यूनिवर्सिटी के एमओयू को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल, छात्र संदीप प्रियदर्शी ने यूजीसी से आरटीआई के तहत कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी।
आरटीआई में यूजीसी ने स्पष्ट कहा है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी और संस्थान के बीच हुए एमओयू को लेकर कभी कोई अनुमति ही नहीं दी। अब ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि बिना यूजीसी की अनुमति के किस आधार पर एमओयू साइन हो गया और यूजीसी को इससे गुमराह क्यों रखा गया?
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एमओयू नियमानुसार नहीं
संस्थान में दिसंबर के दूसरे सप्ताह में सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हुईं थीं। इन परीक्षाओं को लेकर छात्रों ने सवाल उठाए थे कि जब तक डिग्री को लेकर फैसला नहीं आता तब तक परीक्षाओं का कोई आधार नहीं है। तभी से अधिकतर छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार कर रखा है।
पिछले वर्ष हुआ इग्नू से एमओयू
मई, 2015 में मेवाड़ के साथ एमओयू खत्म होने के बाद संस्थान ने इग्नू के साथ एमओयू कर दिया, लेकिन इग्नू की तरफ से केवल 2015 के सत्र में आने वाले छात्रों को ही डिग्री मिलेगी।
यह बोले छात्र
छात्र संदीप प्रियदर्शी का कहना है कि आरटीआई में मेवाड़ यूनिवर्सिटी और एफडीडीआई के बीच हुए एमओयू को स्टेट्स मांगा गया था, जिसमें यह खुलासा हुआ है। इसमें यूजीसी ने बताया कि कोई भी स्टेट यूनिवर्सिटी स्टेट से बाहर कोई सेंटर या फिर डिग्री नहीं दे सकती।
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देशभर के फुटवियर डिजाइन एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट के आठ संस्थान हैं। वर्ष 2012 में एफडीडीआई और मेवाड़ यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू हुआ था, जो मई 2015 में खत्म हो गया था।
इस एमओयू के बाद से संस्थान की डिग्री को लेकर विवाद शुरू हो गया था। अब एफडीडीआई और मेवाड़ यूनिवर्सिटी के एमओयू को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। दरअसल, छात्र संदीप प्रियदर्शी ने यूजीसी से आरटीआई के तहत कई बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी।
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आरटीआई में यूजीसी ने स्पष्ट कहा है कि उन्होंने यूनिवर्सिटी और संस्थान के बीच हुए एमओयू को लेकर कभी कोई अनुमति ही नहीं दी। अब ऐसे में सवाल खड़े हो रहे हैं कि बिना यूजीसी की अनुमति के किस आधार पर एमओयू साइन हो गया और यूजीसी को इससे गुमराह क्यों रखा गया?
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एमओयू नियमानुसार नहीं
संस्थान में दिसंबर के दूसरे सप्ताह में सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू हुईं थीं। इन परीक्षाओं को लेकर छात्रों ने सवाल उठाए थे कि जब तक डिग्री को लेकर फैसला नहीं आता तब तक परीक्षाओं का कोई आधार नहीं है। तभी से अधिकतर छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार कर रखा है।
पिछले वर्ष हुआ इग्नू से एमओयू
मई, 2015 में मेवाड़ के साथ एमओयू खत्म होने के बाद संस्थान ने इग्नू के साथ एमओयू कर दिया, लेकिन इग्नू की तरफ से केवल 2015 के सत्र में आने वाले छात्रों को ही डिग्री मिलेगी।
यह बोले छात्र
छात्र संदीप प्रियदर्शी का कहना है कि आरटीआई में मेवाड़ यूनिवर्सिटी और एफडीडीआई के बीच हुए एमओयू को स्टेट्स मांगा गया था, जिसमें यह खुलासा हुआ है। इसमें यूजीसी ने बताया कि कोई भी स्टेट यूनिवर्सिटी स्टेट से बाहर कोई सेंटर या फिर डिग्री नहीं दे सकती।