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दूसरे मेडिकल कालेजों में शिफ्ट होंगे फरीदाबाद के गोल्ड फील्ड मेडिकल कालेज के विद्यार्थी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Sat, 26 Mar 2016 01:59 AM IST
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मेडिकल यूनिवर्सिटी
- फोटो : अमर उजाला
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फरीदाबाद के गोल्ड फील्ड मेडिकल कालेज में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थी अब प्रदेश के दूसरे मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट किए जाएंगे। यह फैसला रोहतक स्थिति हेल्थ यूनिवर्सिटी प्रशासन और मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के बीच चली मैराथन बैठक में लिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एमसीआई से विद्यार्थियों को दूसरे मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने की अनुमति मांगी है।
विश्वविद्यालय के इस फैसले से फरीदाबाद के गोल्ड फील्ड मेडिकल कालेज में अध्ययनरत करीब 400 विद्यार्थियों का भविष्य चौपट होने से बच गया है। ध्यान रहे कि फरीदाबाद के मेडिकल कालेज से आए करीब 300 एमबीबीएस विद्यार्थियों ने शुक्रवार को हेल्थ यूनिवर्सिटी में खूब हंगामा किया।
वीसी कार्यालय के बाहर विद्यार्थियों संग उनके परिजनों ने भी घंटों नारेबाजी की। उनकी मांग थी कि संस्थान में पढ़ रहे 400 विद्यार्थियों के भविष्य को बचाने के लिए उन्हें किसी दूसरे कालेज में शिफ्ट किया जाए। वीसी से मिलने से रोकने पर आवेश में आए विद्यार्थियों ने नारेबाजी शुरू कर दी और गेट को हिलाने लगे।
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सुरक्षा कर्मचारियों के पुलिस बल बुलाने की चेतावनी के बाद ही विद्यार्थी माने। हालांकि बाद में उन्हें गेट के अंदर आने दिया गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन और मेडिकल कालेज प्रबंधक के बीच दोपहर ढाई बजे बैठक शुरू हुई जो रात साढ़े 10 बजे तक चली। इस दौरान विद्यार्थियों की मांग के अनुसार फैसला लिया गया। अब विद्यार्थी मेवात, खानपुर, रोहतक और अग्रोहा मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट किए जाएंगे।
ढाई बजे शुरू हुई बैठक, रात साढ़े दस बजे फैसला
हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी और कालेज प्रबंधन के बीच दोपहर बाद ढाई बजे से इस मुद्दे पर बैठक शुरू हुई जो रात साढ़े 10 बजे तक चली। इस दौरान फैसला लिया गया कि विद्यार्थियाें के हित में उन्हें दूसरे मेडिकल कॉलेज में समायोजित कर दिया जाए।
फंडिंग से शुरू हुई पूरी समस्या, मान्यता भी गई
दो साल से गोल्ड फील्ड मेडिकल कालेज की मान्यता रद्द है। यहां न तो ओपीडी चालू है और न ही कोई स्टाफ है, जबकि यहां 400 बेड का अस्पताल है। अस्पताल में ताला लगा है। बिजली और पानी तक की व्यवस्था नहीं है। नियम पूरे न करने पर हेल्थ विवि और एमसीआई ने कार्रवाई की है। फंडिंग के अभाव में सारी समस्या खड़ी हुईं हैं। कॉलेज एडवांस भी ले चुका है, लेकिन समस्या जस की तस है। कॉलेज में सरकारी और प्रबंधन कोटे के विद्यार्थियों का भविष्य अब दांव पर है।
मीडियेटर को घेरा
विद्यार्थियों और प्रबंधन के बीच मीडियेटर का कार्य कर रहे एक शख्स ने जब परिजनों और विद्यार्थियों से बात करनी चाही तो सभी ने विरोध कर दिया। मीडियेटर का कहना था कि सभी मिलकर फंड जुटाएंगे तो सब ठीक हो जाएगा। मीडियेटर ने बताया कि उसका भी बेटा वहीं एमबीबीएस कर रहा है, कुछ तो हल निकालना होगा। लेकिन सभी ने स्पष्ट इन्कार कर दिया। गौरतलब है कि उक्त व्यक्ति ने मीडिया से बात करने से और नाम बताने से भी इन्कार कर दिया। बताया जा रहा है कि कालेज प्रबंधकों के साथ उनके पारिवारिक संबंध हैं।
विद्यार्थियों को दूसरे कॉलेजों में समायोजित करने की मांगी अनुमति
एमसीआई से अनुमति मांगी गई है कि सभी विद्यार्थियों को मेवात, खानपुर, रोहतक और अग्रोहा मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाए। कालेज के संबंध में सरकार को प्रेषित कर दिया गया है, वहां से जो आदेश मिलेंगे, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. ओपी कालरा, वीसी, हेल्थ यूृनिवर्सिटी।
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विश्वविद्यालय के इस फैसले से फरीदाबाद के गोल्ड फील्ड मेडिकल कालेज में अध्ययनरत करीब 400 विद्यार्थियों का भविष्य चौपट होने से बच गया है। ध्यान रहे कि फरीदाबाद के मेडिकल कालेज से आए करीब 300 एमबीबीएस विद्यार्थियों ने शुक्रवार को हेल्थ यूनिवर्सिटी में खूब हंगामा किया।
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वीसी कार्यालय के बाहर विद्यार्थियों संग उनके परिजनों ने भी घंटों नारेबाजी की। उनकी मांग थी कि संस्थान में पढ़ रहे 400 विद्यार्थियों के भविष्य को बचाने के लिए उन्हें किसी दूसरे कालेज में शिफ्ट किया जाए। वीसी से मिलने से रोकने पर आवेश में आए विद्यार्थियों ने नारेबाजी शुरू कर दी और गेट को हिलाने लगे।
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सुरक्षा कर्मचारियों के पुलिस बल बुलाने की चेतावनी के बाद ही विद्यार्थी माने। हालांकि बाद में उन्हें गेट के अंदर आने दिया गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन और मेडिकल कालेज प्रबंधक के बीच दोपहर ढाई बजे बैठक शुरू हुई जो रात साढ़े 10 बजे तक चली। इस दौरान विद्यार्थियों की मांग के अनुसार फैसला लिया गया। अब विद्यार्थी मेवात, खानपुर, रोहतक और अग्रोहा मेडिकल कॉलेजों में शिफ्ट किए जाएंगे।
ढाई बजे शुरू हुई बैठक, रात साढ़े दस बजे फैसला
हेल्थ यूनिवर्सिटी के वीसी और कालेज प्रबंधन के बीच दोपहर बाद ढाई बजे से इस मुद्दे पर बैठक शुरू हुई जो रात साढ़े 10 बजे तक चली। इस दौरान फैसला लिया गया कि विद्यार्थियाें के हित में उन्हें दूसरे मेडिकल कॉलेज में समायोजित कर दिया जाए।
फंडिंग से शुरू हुई पूरी समस्या, मान्यता भी गई
दो साल से गोल्ड फील्ड मेडिकल कालेज की मान्यता रद्द है। यहां न तो ओपीडी चालू है और न ही कोई स्टाफ है, जबकि यहां 400 बेड का अस्पताल है। अस्पताल में ताला लगा है। बिजली और पानी तक की व्यवस्था नहीं है। नियम पूरे न करने पर हेल्थ विवि और एमसीआई ने कार्रवाई की है। फंडिंग के अभाव में सारी समस्या खड़ी हुईं हैं। कॉलेज एडवांस भी ले चुका है, लेकिन समस्या जस की तस है। कॉलेज में सरकारी और प्रबंधन कोटे के विद्यार्थियों का भविष्य अब दांव पर है।
मीडियेटर को घेरा
विद्यार्थियों और प्रबंधन के बीच मीडियेटर का कार्य कर रहे एक शख्स ने जब परिजनों और विद्यार्थियों से बात करनी चाही तो सभी ने विरोध कर दिया। मीडियेटर का कहना था कि सभी मिलकर फंड जुटाएंगे तो सब ठीक हो जाएगा। मीडियेटर ने बताया कि उसका भी बेटा वहीं एमबीबीएस कर रहा है, कुछ तो हल निकालना होगा। लेकिन सभी ने स्पष्ट इन्कार कर दिया। गौरतलब है कि उक्त व्यक्ति ने मीडिया से बात करने से और नाम बताने से भी इन्कार कर दिया। बताया जा रहा है कि कालेज प्रबंधकों के साथ उनके पारिवारिक संबंध हैं।
विद्यार्थियों को दूसरे कॉलेजों में समायोजित करने की मांगी अनुमति
एमसीआई से अनुमति मांगी गई है कि सभी विद्यार्थियों को मेवात, खानपुर, रोहतक और अग्रोहा मेडिकल कॉलेजों में समायोजित किया जाए। कालेज के संबंध में सरकार को प्रेषित कर दिया गया है, वहां से जो आदेश मिलेंगे, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. ओपी कालरा, वीसी, हेल्थ यूृनिवर्सिटी।