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Rohtak News: प्रदूषण और बदलते खानपान से सांसों पर गहरा रहा संकट
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रोहतक।
प्रदूषण और बदलते खानपान से सांसों पर संकट गहराता जा रहा है। नागरिक अस्पताल में बच्चों की ओपीडी में रोजाना 60 से 65 मरीज सांस की समस्या के आ रहे हैं। इनमें से करीब 11 बच्चे अस्थमा के लक्षण के आ रहे हैं। अस्थमा सांस की बीमारी है। इसमें मरीज के फेफड़ों के वायुमार्ग में सूजन हो जाने से नली संकीर्ण हो जाती है, इसके कारण सांस रुक-रुक कर आती है। मरीज जल्दी सांस लेने की कोशिश करता है लेकिन सही मात्रा में ऑक्सीजन न पहुंचने से मरीज हांफने लगता है और सांस फूल जाती है। अस्थमा के मरीज को चिकित्सक इनहेलर परामर्श करते हैं ताकि वायुमार्ग नली खुली रहे सांस लेने में समस्या न उत्पन्न हो। हर माह में करीब 2000 बच्चे सिर्फ सांस की समस्या के आ रहे हैं। इसमें पांच प्रतिशत अस्थमा के मरीज हैं।
कारण
प्रदूषण।
-धूल।
धूम्रपान।
बचाव के उपाय
-धूल से बचें, मास्क लगाएं।
- इलाज के दौरान शारीरिक गतिविधि कम करें।
- साधारण व्यायाम, योग करें।
अस्थमा के संकेत :
- -सीने में घरघराहट (सीटी सी आवाज)।
- सांस लेने में तकलीफ।
- सीने में जकड़न और खांसी।
सांस लेने में हो रही दिक्कत अस्थमा का कारक हो सकता है। इसमें सीने में घरघराहट, सीने में जकड़न, खांसी, सांस लेने में तकलीफ आदि समस्या होती है। ऐसे मरीज को शारीरिक गतिविधियों में दिक्कतें आती हैं। जैसे दौड़ते वक्त अचानक सांस का फूलना आदि।
-डॉ. रोहित कपूर, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल
अस्थमा एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है। सांस लेने वाली नली के संकीर्ण हो जाने से रुक-रुककर सांस आती है। इसे अस्थमा का संकेत माना जाता है। अब फसलों का सीजन है। इस मौसम सांस के मरीज बढ़ जाते हैं।
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-डॉ. कुलप्रतिभा, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल
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प्रदूषण और बदलते खानपान से सांसों पर संकट गहराता जा रहा है। नागरिक अस्पताल में बच्चों की ओपीडी में रोजाना 60 से 65 मरीज सांस की समस्या के आ रहे हैं। इनमें से करीब 11 बच्चे अस्थमा के लक्षण के आ रहे हैं। अस्थमा सांस की बीमारी है। इसमें मरीज के फेफड़ों के वायुमार्ग में सूजन हो जाने से नली संकीर्ण हो जाती है, इसके कारण सांस रुक-रुक कर आती है। मरीज जल्दी सांस लेने की कोशिश करता है लेकिन सही मात्रा में ऑक्सीजन न पहुंचने से मरीज हांफने लगता है और सांस फूल जाती है। अस्थमा के मरीज को चिकित्सक इनहेलर परामर्श करते हैं ताकि वायुमार्ग नली खुली रहे सांस लेने में समस्या न उत्पन्न हो। हर माह में करीब 2000 बच्चे सिर्फ सांस की समस्या के आ रहे हैं। इसमें पांच प्रतिशत अस्थमा के मरीज हैं।
कारण
प्रदूषण।
-धूल।
धूम्रपान।
बचाव के उपाय
-धूल से बचें, मास्क लगाएं।
- इलाज के दौरान शारीरिक गतिविधि कम करें।
- साधारण व्यायाम, योग करें।
अस्थमा के संकेत :
- -सीने में घरघराहट (सीटी सी आवाज)।
- सांस लेने में तकलीफ।
- सीने में जकड़न और खांसी।
सांस लेने में हो रही दिक्कत अस्थमा का कारक हो सकता है। इसमें सीने में घरघराहट, सीने में जकड़न, खांसी, सांस लेने में तकलीफ आदि समस्या होती है। ऐसे मरीज को शारीरिक गतिविधियों में दिक्कतें आती हैं। जैसे दौड़ते वक्त अचानक सांस का फूलना आदि।
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-डॉ. रोहित कपूर, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल
अस्थमा एक लंबे समय तक चलने वाली बीमारी है। सांस लेने वाली नली के संकीर्ण हो जाने से रुक-रुककर सांस आती है। इसे अस्थमा का संकेत माना जाता है। अब फसलों का सीजन है। इस मौसम सांस के मरीज बढ़ जाते हैं।
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-डॉ. कुलप्रतिभा, बाल रोग विशेषज्ञ, नागरिक अस्पताल