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वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में 9 क्विंटल के क्लोरीन गैस का सिलिंडर लीक, मची अफरा-तफरी

Thu, 19 Sep 2019 02:00 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 19 Sep 2019 02:00 AM IST
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Cylinder leak of 9 quintal chlorine gas in water treatment plant, chaos
सेक्टर-1 के जल घर में बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से क्लोरीन गैस सिलिंडर बदलते समय वाल्व टूटने से क
हुडा सेक्टर -1 में बारह साल पहले बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से सोमवार को जलघर कर्मियों की लापरवाही के चलते सिलेंडर बदलने के दौरान वाल्व टूटने से क्लोरीन गैस लीक हो गई। जिसने मंगलवार की रात को सेक्टर वासियों की नींद हराम कर दी। गैस लीक की सूचना मिलते ही लोगों में अफरा - तफरी मच गई और आसपास रहने वालों को मंगलवार से लेकर बुधवार तक आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत रही। इस दौरान उनको रात जाग कर काटनी पड़ी। दूसरी ओर, गैस के प्रभाव से टैंक की सैकड़ों मछलियां मर गईं। परेशान लोगों ने बुधवार सुबह आरडब्ल्यूए प्रधान व स्थानीय पार्षद कदम सिंह अहलावत के नेतृत्व में जलघर का घेराव कर दिया। इस दौरान हुडा अधिकारियों से बातचीत की। वहीं, कंपनी की ओर से आए अधिकारी से कोई ठोस कदम न उठाए जाने के सवाल पर उनकी नोकझोंक भी हुई। इसके बाद हुडा प्रशासन की ओर से फायर ब्रिगेड और क्रेन की मदद से सिलिंडर को रॉ वाटर टैंक में डाल दिया गया। लेकिन करीब 52 घंटे तक पानी के भीतर भी गैस का रिसाव होता रहा। लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस टीम मंगलवार रात वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पहुंची और हुडा अधिकारियों से बात की। इसके बाद क्लोरीन सप्लाई करने वाली कंपनी को सूचना दे कर मौके पर बुलाया गया और बोरियों से सिलिंडर पर पानी के भीतर दबाव बनाया गया। बुधवार शाम 4 बजे सिलिंडर से गैस का रिसाव बंद होने पर उसे पानी से बाहर निकाला गया।
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पेड़ की पत्तियां सूखी, 100 से अधिक घरों मे रहा प्रभाव
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के भीतर लगे पेड़ - पौधों पर भी इस गैस का असर रहा। पेड़ की पत्तियां सूख गई है। इसके आस पास के 100 से अधिक घरों में इस गैस का प्रभाव अधिक रहा। गैस के प्रभाव से टैंक की मछलियां मर गईं। वहीं, टैंक की काई हरी से सफेद हो गई है।
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क्लोरीन गैस से होने वाली परेशानी
: फेफड़े में अधिक मात्रा में गैस जाने पर आदमी की मौत भी हो सकती है।
: आंखों में जलन होती है। रोशनी भी जाने की संभावना रहती है।
: कैंसर होने की 80 प्रतिशत संभावना होती है।
: उदर, मलाशय, दिल की बीमारियां होती है।
: क्लोरीन के कारण उल्टियां होती हैं।
दिल्ली की टीम ने डाला डेरा
हुडा के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में पानी की सफाई का ठेका क्लोर एक्वा केमिकल कंपनी के पास है। उसकी ओर से दो ऑपरेटर प्लांट में तैनात है। इनका काम सिलिंडर बदलना व उसकी देखरेख करना है। दिल्ली की कंपनी के निदेशक धनंजय त्रिपाठी भी सुबह चार बजे प्लांट पहुंचे।
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लापरवाही से हुई घटना
क्लोरीन गैस सिलिंडर को बदलने के दौरान सावधानी नहीं रखी गई। इस कारण घटना हुई। क्लोरीन गैस अगर सांस लेते समय फेफड़ों में अधिक मात्रा में पहुंच जाए तो व्यक्ति की मौत भी हो सकती है।

- एसपी खटकड़, एचओडी केमेस्ट्री विभाग एमडीयू
वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में क्लोरीन का सिलिंडर बदलने के दौरान वॉल्व टूटने से गैस लीक हुई थी। जिसे पानी के टैंक में डाला गया था। बुधवार चार बजे गैस का रिसाव बंद होने पर सिलिंडर को वाटर टैंक से बाहर निकाल दिया गया है।
- डीके आहुजा, अधीक्षण अभियंता, हुडा
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