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पूर्व छात्र ने ही बनाई एमडीयू की फर्जी वेबसाइट, कर रहा था लिंक और मैटर का इस्तेमाल
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 07 Jul 2016 02:22 AM IST
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एमडीयू
- फोटो : file photo
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महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाने के साथ ही फेसबुक और ट्विटर पर अकाउंट बनाकर विवि का लिंक, लोगो और मैटर का इस्तेमाल करने वाला एमडीयू का ही पूर्व छात्र है। मामले का खुलासा होेते ही विवि ने युवक को कार्रवाई की चेतावनी दी तो उसने तीनों अकाउंट से विवि के सभी रिकॉर्ड को तुरंत प्रभाव से हटा दिया। साथ ही, विवि के उच्च अधिकारियों से लिखित में माफी मांग ली।
फर्जी साइट बनाने वाला विवि का पूर्व छात्र बहादुरगढ़ का रहने वाला है। उसने 37 दिन पहले वेबसाइड को बनाया था। इसके बाद से विवि के लिंक, लोगो और मैटर का उपयोग कर रहा था। गौड़ ब्राह्मण कॉलेज से बीएड पास युवक ने तीन-तीन जगह विवि के अधिकारिक लोगो का इस्तेमाल किया है। हालांकि, पूरा मामला साइबर क्राइम के तहत आता है, लेकिन किसी भी तरह के नुकसान संबंधित मामला सामने नहीं आने के कारण विवि प्रशासन फिलहाल एफआईआर दर्ज कराने के मूड में नहीं है। विवि के कंप्यूटर साइंस विभाग के उच्च अधिकारियों की टीम मामले के सभी बिंदुओं पर बारीकी से जांच कर रही है।
विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www.mdurohtak.ac.in है, जबकि बहादुरगढ़ के युवक ने इसी साल 30 मई को इसी से मिलते जुलते वेबसाइट बनाई। अपनी वेबसाइट से उसने एमडीयू के लिंक को जोड़ दिया। इस लिंक पर क्लिक करते ही विवि की अधिकारिक वेबसाइट खुल जाती थी। इस वजह से छात्रों के लिए विवि की अधिकारिक और फर्जी वेबसाइट में अंतर कर पाना मुश्किल था। समय-समय पर वह विवि की ओर से निकाले जा रहे विज्ञापनों को अपनी वेबसाइट पर इस्तेमाल करता था। यही नहीं, फेसबुक अकाउंट पर एमडीयू के सभी कांटेक्ट और सूचनाओं को भी रि-प्रोड्यूस कर रहा था। हालांकि, ट्विटर पर विवि से संबंधित जानकारियाें का बहुत कम इस्तेमाल किया जा रहा था।
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इंटरनेट यूजर्स अन्य वेबसाइट से भ्रमित न हों
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (मदवि) के जनसंपर्क विभाग के निदेशक सुनित मुखर्जी ने इंटरनेट यूजर्स को अन्य वेबसाइट से भ्रमित नहीं होने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.mdurohtak.ac.in है। विवि की दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट www.mdudde.net है। वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर फेसबुक का पेज Maharshi Dayanand University Rohtak नाम से है। फेसबुक पर न्यूज ग्रुप में M.D. University News नाम से ग्रुप भी विश्वविद्यालय जनसंपर्क कार्यालय संचालित करता है। टिवट्र पर @dprmdurtk टिवट्र हैंडल से वे बतौर डीपीआर टिवट्स डालते हैं। मुखर्जी ने कहा कि विद्यार्थी केवल वैध सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ही विवि संबंधित जानकारियों के लिए इंटैरेक्शन करें। किसी भी वांछित जानकारी के लिए विवि के विश्वविद्यालय कंप्यूटर सेंटर या जनसंपर्क कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
युवक ने हटा दिये सभी विवि के सभी रिकॉर्ड
बहादुरगढ़ के युवक ने एमडीयू के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाई थी। साथ ही फेसबुक और ट्विटर पर विवि के अधिकारिक लोगो और सूचनाओं का प्रयोग कर रहा था, जोकि गलत है। जब उसे साइबर क्राइम के तहत एफआईआर कराने की चेतावनी दी गई, तो उसने वेबसाइट के साथ दोनों अकाउंट से विवि के सभी रिकॉर्ड को हटा दिया। विवि प्रशासन से माफी भी मांगी है। वेबसाइट उसने खुद बनाई थी। इसमें विवि के लिंक को जोड़ दिया था। इस लिंक से विवि की अधिकारिक वेबसाइट खुल जाती थी। मामले की जांच चल रही है। एफआईआर के संबंध में उच्च अधिकारियों से बात की जा रही है।
- डॉ. जीपी सरोहा, डायरेक्टर, यूसीसी
विवि प्रशासन की छवि खराब करने के विरोध में उतरा स्वाभिमान मंच
रोहतक। एमडीयू के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर विवि प्रशासन की छवि खराब करने के विरोध में स्वाभिमान मंच उतर आया है। विवि के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के पूर्व प्रधान कुलवंत मलिक ने बुधवार को बैठक की। स्वाभिमान मंच के नेतृत्व में हुई बैठक में विवि के नाम पर गलत वेबसाइट का प्रयोग करने पर कड़े शब्दों में विरोध किया गया। मलिक ने प्रशासन से अनुरोध किया कि इस तरह के व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जाए। अगर प्रशासन ने कठोर कदम नहीं उठाया तो स्वाभिमान मंच कठोर कदम उठाएगा। इस अवसर पर मंच के अध्यक्ष ताराचंद यादव, सूरजभान, अजमेर सिंह, बलजीत सिंह, सतीश त्यागी, जयभगवान ढाका, दिवान सिंह, भरपूर सिंह, पवन नांदल, सत्यबीर वत्स, सुरेंद्र फौगाट, ओमप्रकाश, राजेश, राजबीर दलाल, राजेंद्र लाल, विक्रम दहिया मौजूद रहे।
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फर्जी साइट बनाने वाला विवि का पूर्व छात्र बहादुरगढ़ का रहने वाला है। उसने 37 दिन पहले वेबसाइड को बनाया था। इसके बाद से विवि के लिंक, लोगो और मैटर का उपयोग कर रहा था। गौड़ ब्राह्मण कॉलेज से बीएड पास युवक ने तीन-तीन जगह विवि के अधिकारिक लोगो का इस्तेमाल किया है। हालांकि, पूरा मामला साइबर क्राइम के तहत आता है, लेकिन किसी भी तरह के नुकसान संबंधित मामला सामने नहीं आने के कारण विवि प्रशासन फिलहाल एफआईआर दर्ज कराने के मूड में नहीं है। विवि के कंप्यूटर साइंस विभाग के उच्च अधिकारियों की टीम मामले के सभी बिंदुओं पर बारीकी से जांच कर रही है।
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विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www.mdurohtak.ac.in है, जबकि बहादुरगढ़ के युवक ने इसी साल 30 मई को इसी से मिलते जुलते वेबसाइट बनाई। अपनी वेबसाइट से उसने एमडीयू के लिंक को जोड़ दिया। इस लिंक पर क्लिक करते ही विवि की अधिकारिक वेबसाइट खुल जाती थी। इस वजह से छात्रों के लिए विवि की अधिकारिक और फर्जी वेबसाइट में अंतर कर पाना मुश्किल था। समय-समय पर वह विवि की ओर से निकाले जा रहे विज्ञापनों को अपनी वेबसाइट पर इस्तेमाल करता था। यही नहीं, फेसबुक अकाउंट पर एमडीयू के सभी कांटेक्ट और सूचनाओं को भी रि-प्रोड्यूस कर रहा था। हालांकि, ट्विटर पर विवि से संबंधित जानकारियाें का बहुत कम इस्तेमाल किया जा रहा था।
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इंटरनेट यूजर्स अन्य वेबसाइट से भ्रमित न हों
महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (मदवि) के जनसंपर्क विभाग के निदेशक सुनित मुखर्जी ने इंटरनेट यूजर्स को अन्य वेबसाइट से भ्रमित नहीं होने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.mdurohtak.ac.in है। विवि की दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट www.mdudde.net है। वहीं, सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर फेसबुक का पेज Maharshi Dayanand University Rohtak नाम से है। फेसबुक पर न्यूज ग्रुप में M.D. University News नाम से ग्रुप भी विश्वविद्यालय जनसंपर्क कार्यालय संचालित करता है। टिवट्र पर @dprmdurtk टिवट्र हैंडल से वे बतौर डीपीआर टिवट्स डालते हैं। मुखर्जी ने कहा कि विद्यार्थी केवल वैध सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ही विवि संबंधित जानकारियों के लिए इंटैरेक्शन करें। किसी भी वांछित जानकारी के लिए विवि के विश्वविद्यालय कंप्यूटर सेंटर या जनसंपर्क कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
युवक ने हटा दिये सभी विवि के सभी रिकॉर्ड
बहादुरगढ़ के युवक ने एमडीयू के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाई थी। साथ ही फेसबुक और ट्विटर पर विवि के अधिकारिक लोगो और सूचनाओं का प्रयोग कर रहा था, जोकि गलत है। जब उसे साइबर क्राइम के तहत एफआईआर कराने की चेतावनी दी गई, तो उसने वेबसाइट के साथ दोनों अकाउंट से विवि के सभी रिकॉर्ड को हटा दिया। विवि प्रशासन से माफी भी मांगी है। वेबसाइट उसने खुद बनाई थी। इसमें विवि के लिंक को जोड़ दिया था। इस लिंक से विवि की अधिकारिक वेबसाइट खुल जाती थी। मामले की जांच चल रही है। एफआईआर के संबंध में उच्च अधिकारियों से बात की जा रही है।
- डॉ. जीपी सरोहा, डायरेक्टर, यूसीसी
विवि प्रशासन की छवि खराब करने के विरोध में उतरा स्वाभिमान मंच
रोहतक। एमडीयू के नाम पर फर्जी वेबसाइट बनाकर विवि प्रशासन की छवि खराब करने के विरोध में स्वाभिमान मंच उतर आया है। विवि के गैर शिक्षक कर्मचारी संघ के पूर्व प्रधान कुलवंत मलिक ने बुधवार को बैठक की। स्वाभिमान मंच के नेतृत्व में हुई बैठक में विवि के नाम पर गलत वेबसाइट का प्रयोग करने पर कड़े शब्दों में विरोध किया गया। मलिक ने प्रशासन से अनुरोध किया कि इस तरह के व्यक्ति पर सख्त कार्रवाई की जाए। अगर प्रशासन ने कठोर कदम नहीं उठाया तो स्वाभिमान मंच कठोर कदम उठाएगा। इस अवसर पर मंच के अध्यक्ष ताराचंद यादव, सूरजभान, अजमेर सिंह, बलजीत सिंह, सतीश त्यागी, जयभगवान ढाका, दिवान सिंह, भरपूर सिंह, पवन नांदल, सत्यबीर वत्स, सुरेंद्र फौगाट, ओमप्रकाश, राजेश, राजबीर दलाल, राजेंद्र लाल, विक्रम दहिया मौजूद रहे।