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शिवाजी कॉलोनी थाने के तात्कालीन एसएचओ समेत आठ के खिलाफ कोर्ट में केस
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संशोधित : शिवाजी कालोनी थाने के तत्कालीन एसएचओ समेत आठ के खिलाफ कोर्ट में केस
- रिश्वत के आरोप में एसआई को पकड़वाने वाले के खिलाफ दर्ज किया था फर्जी केस
- अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अदालत में लड़ खुद को किया पाक - साफ साबित
- अब थाने के पुलिस कर्मचारियों पर पावर का दुरुपयोग करने का केस किया दायर
विकास सैनी
रोहतक। पद और पावर का दुरुपयोग करने के आरोपों के चलते शिवाजी कॉलोनी थाने के तत्कालीन एसएचओ समेत पुलिस के आठ जवानों की मुश्किल बढ़ गई है। जान से मारने की धमकी देने वालाें के खिलाफ कार्रवाई न करके शिकायतकर्ता पर केस दर्ज करना उनके करियर पर भारी पड़ सकता है। इन आठों के खिलाफ पीड़ित की शिकायत पर विभिन्न धाराओं के तहत कोर्ट में केस दर्ज हो गया है। यहां से फैसला पीड़ित के पक्ष में गया तो इनकी नौकरी तक जा सकती है।
जनता कालोनी निवासी अधिवक्ता फूल कुमार ने बताया कि वर्ष 2013 में वह डीएलएफ में नौकरी करता था। यहां कुछ साथियों ने धमकी दी। इस बारे में शिवाजी कालोनी थाने में शिकायत दी। कार्रवाई के नाम पर पुलिस कर्मचारी ने 1500 रुपये रिश्वत मांगी। यह रिश्वत उसे दे दी। इस बारे में आईजी सत्यप्रकाश रंगा ने कार्रवाई करते हुए रिश्वत लेने के आरोपी पुलिस कर्मचारी को निलंबित कर दिया। इस मामले की जांच एएसपी सुलोचना ने की।
रिश्वत के आरोप में पकड़वाने पर दर्ज किया फर्जी केस
अधिवक्ता ने बताया कि रिश्वत के मामले में समझौते का दबाव बनाया गया। दबाव नहीं माना तो पुलिस कर्मचारी ने धमकी दिलवाई। इस बारे में पुलिस को शिकायत देने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा पुलिस कर्मचारियों ने मेरे ही खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया। इस केस में 24 अप्रैल 2018 को अदालत में मुझे बरी कर दिया। पुलिस कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाई।
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एसपी व सीएम विंडो पर शिकायत के बाद खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
कोर्ट के फैसले के बाद कोई अपील या रिवीजन नहीं हुआ। इसके बाद शिवाजी कॉलोनी थाने के तत्कालीन एसएचओ समेत आठ कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दी। थाने में शिकायत की सुनवाई नहीं हुई तो एसपी कार्यालय व सीएम विंडो पर शिकायत दी। यहां से भी इनकार ही मिला। इसके चलते अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। 12 फरवरी 2019 को अपने साथ हुई ज्यादती को लेकर अदालत में शिकायत दी। जेएमआईसी विवेक सिंह की अदालत ने केस मंजूर करते हुए आगामी 20 अप्रैल की सुनवाई का समय दिया है।
पीड़ित पर केस का दबाव बना बदलवाया बयान
अधिवक्ता ने बताया कि रिश्वत के मामले से खुद को निकालने के लिए पुलिस कर्मचारी ने मेरे खिलाफ फर्जी केस दर्ज करा दिया। इसके चलते समझौता करना पड़ा। दबाव में अपना बयान बदलना पड़ा। अदालत में मुझे पुलिस कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की बात कहनी पड़ी। इसके बाद मामला रफा दफा हुआ।
अपनी बेगुनाही के लिए पांच साल लड़नी पड़ी लड़ाई
अधिवक्ता ने बताया कि मेरे साथ घटना वर्ष 2013 में घटी। इसके बाद से मामला सुलझने के बजाय उलझता ही गया। मेरे ही खिलाफ केस दर्ज हुआ। मुझे ही पुलिस व कोर्ट के चक्कर लगाने पड़े। आखिर वर्ष 2018 में अदालत ने मुझे बरी किया तो कुछ राहत मिली। इसके लिए पांच साल लगातार लड़ना पड़ा।
कोर्ट में इनके खिलाफ दायर हुआ केस
कोर्ट में दायर केस में शिवाजी कॉलोनी थाने के आठ कर्मचारियों के नाम दिए गए हैं। इनमें पूर्व एसएचओ नरेंद्र सिंह, ईएसआई रमेश कुमार, एसआई रामफल, ईएचसी राजेश कुमार, ईएसआई शमशेर सिंह, कांस्टेबल सुरेंद्र, कांस्टेबल हरदीप सिंह, कांस्टेबल राजेश कुमार शामिल है। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 166, 167, 182, 192, 194, 196, 211, 218, 219, 220, 354, 120बी व 34 के तहत केस दर्ज करने की अपील की गई है।
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- रिश्वत के आरोप में एसआई को पकड़वाने वाले के खिलाफ दर्ज किया था फर्जी केस
- अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए अदालत में लड़ खुद को किया पाक - साफ साबित
- अब थाने के पुलिस कर्मचारियों पर पावर का दुरुपयोग करने का केस किया दायर
विकास सैनी
रोहतक। पद और पावर का दुरुपयोग करने के आरोपों के चलते शिवाजी कॉलोनी थाने के तत्कालीन एसएचओ समेत पुलिस के आठ जवानों की मुश्किल बढ़ गई है। जान से मारने की धमकी देने वालाें के खिलाफ कार्रवाई न करके शिकायतकर्ता पर केस दर्ज करना उनके करियर पर भारी पड़ सकता है। इन आठों के खिलाफ पीड़ित की शिकायत पर विभिन्न धाराओं के तहत कोर्ट में केस दर्ज हो गया है। यहां से फैसला पीड़ित के पक्ष में गया तो इनकी नौकरी तक जा सकती है।
जनता कालोनी निवासी अधिवक्ता फूल कुमार ने बताया कि वर्ष 2013 में वह डीएलएफ में नौकरी करता था। यहां कुछ साथियों ने धमकी दी। इस बारे में शिवाजी कालोनी थाने में शिकायत दी। कार्रवाई के नाम पर पुलिस कर्मचारी ने 1500 रुपये रिश्वत मांगी। यह रिश्वत उसे दे दी। इस बारे में आईजी सत्यप्रकाश रंगा ने कार्रवाई करते हुए रिश्वत लेने के आरोपी पुलिस कर्मचारी को निलंबित कर दिया। इस मामले की जांच एएसपी सुलोचना ने की।
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रिश्वत के आरोप में पकड़वाने पर दर्ज किया फर्जी केस
अधिवक्ता ने बताया कि रिश्वत के मामले में समझौते का दबाव बनाया गया। दबाव नहीं माना तो पुलिस कर्मचारी ने धमकी दिलवाई। इस बारे में पुलिस को शिकायत देने पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उल्टा पुलिस कर्मचारियों ने मेरे ही खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने समेत अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया। इस केस में 24 अप्रैल 2018 को अदालत में मुझे बरी कर दिया। पुलिस कोई भी आरोप साबित नहीं कर पाई।
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एसपी व सीएम विंडो पर शिकायत के बाद खटखटाया कोर्ट का दरवाजा
कोर्ट के फैसले के बाद कोई अपील या रिवीजन नहीं हुआ। इसके बाद शिवाजी कॉलोनी थाने के तत्कालीन एसएचओ समेत आठ कर्मचारियों के खिलाफ शिकायत दी। थाने में शिकायत की सुनवाई नहीं हुई तो एसपी कार्यालय व सीएम विंडो पर शिकायत दी। यहां से भी इनकार ही मिला। इसके चलते अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। 12 फरवरी 2019 को अपने साथ हुई ज्यादती को लेकर अदालत में शिकायत दी। जेएमआईसी विवेक सिंह की अदालत ने केस मंजूर करते हुए आगामी 20 अप्रैल की सुनवाई का समय दिया है।
पीड़ित पर केस का दबाव बना बदलवाया बयान
अधिवक्ता ने बताया कि रिश्वत के मामले से खुद को निकालने के लिए पुलिस कर्मचारी ने मेरे खिलाफ फर्जी केस दर्ज करा दिया। इसके चलते समझौता करना पड़ा। दबाव में अपना बयान बदलना पड़ा। अदालत में मुझे पुलिस कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने की बात कहनी पड़ी। इसके बाद मामला रफा दफा हुआ।
अपनी बेगुनाही के लिए पांच साल लड़नी पड़ी लड़ाई
अधिवक्ता ने बताया कि मेरे साथ घटना वर्ष 2013 में घटी। इसके बाद से मामला सुलझने के बजाय उलझता ही गया। मेरे ही खिलाफ केस दर्ज हुआ। मुझे ही पुलिस व कोर्ट के चक्कर लगाने पड़े। आखिर वर्ष 2018 में अदालत ने मुझे बरी किया तो कुछ राहत मिली। इसके लिए पांच साल लगातार लड़ना पड़ा।
कोर्ट में इनके खिलाफ दायर हुआ केस
कोर्ट में दायर केस में शिवाजी कॉलोनी थाने के आठ कर्मचारियों के नाम दिए गए हैं। इनमें पूर्व एसएचओ नरेंद्र सिंह, ईएसआई रमेश कुमार, एसआई रामफल, ईएचसी राजेश कुमार, ईएसआई शमशेर सिंह, कांस्टेबल सुरेंद्र, कांस्टेबल हरदीप सिंह, कांस्टेबल राजेश कुमार शामिल है। इनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 166, 167, 182, 192, 194, 196, 211, 218, 219, 220, 354, 120बी व 34 के तहत केस दर्ज करने की अपील की गई है।