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गुरमीत के जेल आने के बाद बदली कैदियों और बंदियों की बैरक
Updated Sat, 02 Sep 2017 02:28 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। राम रहीम की वजह से जेल के अंदर कैदियों और बंदियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने के कारण 13 कैदियों ने जेल के अंदर भूख हड़ताल शुरू कर दी है। शुक्रवार को पेशी पर आए एक बंदी ने इसका खुलासा किया। भूख हड़ताल पर बैठे सभी बंदियों ने जेल प्रशासन पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। बंदियों का कहना है कि जब तक उन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जाती वह भूख हड़ताल पर रहेंगे। एडवोकेट राजेश साहरण ने बताया कि गांव कारौर निवासी अनिल सुनारिया जेल में हत्या के मामले में बंद है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। शुक्रवार को अनिल पेशी के लिए कोर्ट लाया गया था। यहां पर उसने अपने वकील राजेश साहरण को बताया कि जिस दिन राम रहीम को जेल में लाया गया था तो जेल प्रशासन ने उनका बैरक खाली करवा दिया था। इसके बाद 13 बंदियों को दूसरे बैरक में बंद कर दिया था। इनमें अनिल भी शामिल था। आरोप है कि बैरक में बंदियों को ओढ़ने के लिए चादर और कंबल कुछ नहीं दिया गया है। कई बार इसकी मंाग भी की जा चुकी है। कई बार जेल प्रशासन के सामने मांग रखने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके विरोध में बंदियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। जब इस संबंध में जेल अधीक्षक ने बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
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रोहतक। राम रहीम की वजह से जेल के अंदर कैदियों और बंदियों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलने के कारण 13 कैदियों ने जेल के अंदर भूख हड़ताल शुरू कर दी है। शुक्रवार को पेशी पर आए एक बंदी ने इसका खुलासा किया। भूख हड़ताल पर बैठे सभी बंदियों ने जेल प्रशासन पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। बंदियों का कहना है कि जब तक उन्हें मूलभूत सुविधाएं नहीं दी जाती वह भूख हड़ताल पर रहेंगे। एडवोकेट राजेश साहरण ने बताया कि गांव कारौर निवासी अनिल सुनारिया जेल में हत्या के मामले में बंद है। मामला कोर्ट में विचाराधीन है। शुक्रवार को अनिल पेशी के लिए कोर्ट लाया गया था। यहां पर उसने अपने वकील राजेश साहरण को बताया कि जिस दिन राम रहीम को जेल में लाया गया था तो जेल प्रशासन ने उनका बैरक खाली करवा दिया था। इसके बाद 13 बंदियों को दूसरे बैरक में बंद कर दिया था। इनमें अनिल भी शामिल था। आरोप है कि बैरक में बंदियों को ओढ़ने के लिए चादर और कंबल कुछ नहीं दिया गया है। कई बार इसकी मंाग भी की जा चुकी है। कई बार जेल प्रशासन के सामने मांग रखने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके विरोध में बंदियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी। जब इस संबंध में जेल अधीक्षक ने बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।