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Rohtak News: कोर्ट का रहम से इन्कार...मासूम सरताज भी किसी का बेटा था, माता-पिता के शवों के बीच खड़ा कर मारी थी गोली

Sat, 24 Feb 2024 02:38 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sat, 24 Feb 2024 02:38 AM IST
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Court refuses mercy... Innocent Sartaj was also someone's son, he was shot while standing between the dead bodies of his parents
रोहतक। ढाई साल का मासूम सरताज भी किसी का बेटा था, जिसे कोच सुखविंदर अंगुली पकड़कर अखाड़े की पहली मंजिल पर ले गया। माता-पिता के शवों के बीच खड़ा करके उसके सिर में गोली मार दी। ऐसे व्यक्ति के साथ रहम नहीं किया जा सकता। 12 फरवरी 2021 की शाम जाट कालेज के अखाड़े में छह हत्याएं ही नहीं, बल्कि विश्वास का भी कत्ल हुआ था। वारदात से समाज में आए बदलाव पर गहरा असर पड़ेगा, क्योंकि माता-पिता अपनी बेटियों को अखाड़ों में भेजते समय कई बार सोचेंगे। ऐसे में सरकार और अखाड़ा संचालक मिलकर महिला पहलवानों की सुरक्षा को सुनिश्चित करें। शुक्रवार को 288 पेज का फैसला सुनाते हुए एएसजे डॉक्टर गगनगीत कौर ने यह टिप्पणी की।
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पीड़ित पक्ष के वकील जय हुड्डा ने बताया कि 19 फरवरी को अदालत ने जाट कालेज अखाड़ा हत्याकांड के दोषी कुश्ती कोच सुखविंदर को छह लोगों की हत्या व एक पर हत्या के प्रयास का दोषी करार दिया था। 21 फरवरी को सजा पर बहस के दौरान सुखविंदर ने रहम के लिए दया याचिका दायर की थी। कोर्ट से कहा था कि उसके बूढ़े माता-पिता हैं। साथ ही सात साल का बेटा है। पत्नी तलाक ले चुकी है। ऐसे में बेटे की परवरिश करने वाला कोई नहीं है। ऐसे में उसके सजा देते समय नरमी बरती जाए। अदालत ने शुक्रवार को दोषी को फांसी की सुनाते हुए कहा, क्या दोषी सुखविंदर किसी नरमी का हकदार है। बच्चे सरताज को ऊपर ले जाने और फिर उसकी मां साक्षी मलिक के शव के पास ले गया। उसकी इस हरकत से दोषी ने यह भी नहीं सोचा कि उन चंद मिनटों में अपनी मां को खून से लथपथ देखकर वह छोटा बच्चा किस सदमे से गुजरा होगा। इसके बाद दोषी ने मासूम सरताज पर गोली चला दी और गोली उसकी खोपड़ी में घुस गई।
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माता-पिता बेटियों को अखाड़े में भेजते समय कई बार सोचेंगे
अदालत ने कहा कि, वारदात से पहलवानों परिवारों ही नहीं, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम होंगे। महिला पहलवान 17 वर्षीय पूजा तोमर की हत्या से आमूलचूल बदलाव आएगा। रूढ़ीवादी समाज में भी बदलाव आया है, जब ग्रामीण क्षेत्र से भी माता-पिता अपनी बेटियों को खेल के क्षेत्र खासकर कश्ती में कैरियर बनाने की अनुमति दे रहे हैं। क्योंकि कुश्ती में गोल्फ, बैडमिंटन, टेनिस व दूसरे खेलों जैसे महंगे उपकरणों की जरूरत नहीं पड़ती। वित्तीय और सामाजिक दायरे के अंदर रहकर माता-पिता बेटियों को आगे बढ़ा रहे हैं। जाट कालेज अखाड़ा हत्याकांड से जनता के मन में संदेह पैदा हो रहा है। अब अखाड़े सुरक्षित नहीं रह गए हैं। ऐसे क्षेत्र में यह वारदात गहरी छाप छोड़ेगी, जहां कुश्ती का खेल महिलाओं व परिवारों के लिए एक जुनून है। अब माता-पिता बच्चों को अखाड़े में भेजते समय कई बार सोचेंगे।
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महत्वाकांक्षी है दोषी कोच सुखविंदर
कोर्ट ने कहा कि दोषी कोच सुखविंदर ने कहा कि वह एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी है। उसका कॅरिअर खराब हो जाएगा। दोषी यह नहीं सोच रहा कि उसके हाथों जान गंवाने वाले कुश्ती कोच मनोज मलिक, कोच सतीश दलाल, प्रदीप मलिक के अलावा 17 साल की महिला खिलाड़ी पूजा का भी अपना खेल का कॅरिअर था। खेल अनुशासन व स्वच्छ प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करते हैं, लेकिन दोषी सुखविंदर इतना महत्वाकांक्षी है कि वह अपने दोस्तों-सहयोगियों को भी कुश्ती के क्षेत्र में आगे आते नहीं देख सका। खुद को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का पहलवान बताना और अपने कॅरिअर की चिंता करना यह दर्शाता है कि उनमें खेल भावना का सर्वथा अभाव था। यहां तक कि वह एक महिला पहलवान खिलाड़ी पूजा को भी बर्दाश्त नहीं कर सका, जो पहलवान मथुरा से सपने लेकर रोहतक आई थी। दोषी सुखविंदर ने उसकी भी हत्या कर दी क्योंकि वह सतीश, मनोज और प्रदीप का पूजा का पक्ष लेना और उनके खिलाफ शिकायत करना बर्दाश्त नहीं कर सका। इतना ही नहीं, हत्या के बाद भी पूजा को बदनाम करने का प्रयास किया। बचाव में ऐसा करना दोषी की मानसिकता को दर्शाता है।

विश्वास का भी किया कत्ल, नहीं तो बिना हथियार भी खुद की रक्षा कर सकते थे मृतक
कोर्ट ने कहा कि दोषी ने योजनाबंद तरीके से एक-एक करके मनोज मलिक, साक्षी, सतीश दलाल व प्रदीप मलिक को कमरे में बुलाया और हत्या करता चला गया। जैसे ही साथी अंदर गए तो वे पहले साथी को खून से लथपथ देखकर चौंक जाते। दोषी तभी सिर में गोली मार देता। मृतकों का जरा भी संदेह नहीं था कि दोषी उनको मार डालेगा, नहीं तो वे बिना हथियार भी अपनी रक्षा कर सकते थे। दोषी उनको धोखे से अंदर बुलाता और सिर में गोली मार देता। कोर्ट ने कहा कि जब दोषी सुखविंदर बच्चे सरजात को अपने साथ ऊपर पहली मंजिल पर ले गया, तब सरताज चुपचाप उसके साथ चला गया, क्योंकि वह सुखविंदर को जानता था। उसकी भी हत्या कर दी।

छह हत्याओं के बाद भी नहीं हुआ पछतावा, अमरजीत को बुलाकर गोली मार दी
अदालत ने कहा कि दोषी ने अखाड़े के अंदर छह लोगों को गोली मारने के बाद कोच अमरजीत को मारने का प्रयास किया। उसे कॉल करके कॉलेज के बाहर बुलाया और गोली मारकर फरार हो गया। इस तरह दोषी ने 12 फरवरी की शाम 6 बजकर 32 मिनट से 7 बजकर 46 मिनट के बीच शैतानी तरीके से एक-एक करके हत्या की बर्बर वारदात को अंजाम दिया।



अदालत ने दोषी सुखविंदर को फांसी की सजा दी है। साथ ही कहा है कि दोषी दया का पात्र नहीं है। कैसे उसने ढाई साल के सरताज के सिर में गोली मार दी। यह बताते हुए वे भावुक हो गए।
एडवोकेट जय हुड्डा, वकील पीड़ित पक्ष

उसके भाई मनोज मलिक, भाभी साक्षी व भतीजे सरताज की हत्या हुई थी। तीन साल तक अदालत में केस लड़ा गया। कोर्ट से न्याय की उम्मीद है, जो आज मिल गया है। वे दोषी को फांसी की सजा देने से संतुष्ट हैं।
प्रमोद मलिक, मृतक मनोज मलिक का भाई

अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हूं। फैसले की कॉपी लेकर हाईकोर्ट में अपील करेंगे। अदालत ने बचाव पक्ष की ओर से रखे तथ्यों की जगह पीड़ित पक्ष के तथ्यों पर ही फोकस किया है। वे आखिरी तक लड़ेंगे। सुखविंदर कोच नार्मल है। उसे करनाल जेल भेजा गया है।
गौरव ढुल, वकील बचाव पक्ष
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गवाही के अलावा पुलिस की जांच को देखते हुए उम्मीद थी कि कोच सुखविंदर को फांसी की सजा होगी। इससे सभी मृतकों के परिजन संतुष्ट हैं। उसका भाई प्रदीप मलिक रेलवे में अधिकारी था। उसके भाई को भी बेरहमी से मार दिया गया।

विक्रम मलिक, मृतक प्रदीप मलिक का भाई
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फैसले को लेकर कोर्ट के अंदर व बाहर लगा रहा वकीलों का तांता
बहुचर्चित जाट कॉलेज अखाड़ा हत्याकांड को लेकर फैसले के समय कोर्ट के अंदर व बाहर वकीलों का तांता लगा रहा। वर्क सस्पेंड के बावजूद काफी संख्या में वकील कोर्ट परिसर में मौजूद रहे।
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