{"_id":"58fd1a784f1c1bb1028b4976","slug":"convocation-mdu-function-haryana-university-rohtak-governor-student","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहली बार हुआ इतना बड़ा दीक्षांत समारोह, झूम उठे विद्यार्थी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहली बार हुआ इतना बड़ा दीक्षांत समारोह, झूम उठे विद्यार्थी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 24 Apr 2017 02:49 AM IST
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एमडीयू के समारोह में दी गई 838 पीएचडी, 823 स्वर्ण पदक, 17 बेस्ट थीसिस और 324 अन्य डिग्री
- फोटो : amar ujala
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दीक्षांत समारोह में पीएचडी, स्वर्ण पदक और अन्य डिग्रियां लेकर विद्यार्थी झूम उठे। यूनिवर्सिटी के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर दीक्षांत समारोह किया गया। इसमें विद्यार्थियों को संस्कारी जीवन जीने की शपथ दिलाई गई। न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली को विधि एवं न्याय के क्षेत्र में योगदान और माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बीके कुठियाला को उच्चतर शिक्षा, विशेष रूप से मीडिया के क्षेत्र में योगदान के लिए डी-लिट की मानद उपाधि दी गई।
मुख्यातिथि राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर और कुलपति प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान राज्यपाल प्रो. सोलंकी ने करीब 22 मिनट के भाषण में विद्यार्थियों को संस्कार, चरित्र और गुरु-शिष्य का पाठ पढ़ाया। उन्होंने 838 पीएचडी, 823 स्वर्ण पदक, 17 बेस्ट थीसिस और 324 यूजी-पीजी की डिग्रियां दी गईं। विद्यार्थियों को पीएचडी, पदक और अन्य डिग्री पहले ही दे दी गई थे। इसके बाद विद्यार्थियों के अलग-अलग ग्रुप को मंच पर बुलाया गया, जहां पर मुख्यातिथि के साथ फोटो कराया और फिर अगले ग्रुप को भेजा गया। मंच संचालन मानविकी संकाय के डीन प्रो. सुरेंद्र कुमार, प्राध्यापिका डॉ. दिव्या मल्हान, डॉ. गुंजन मलिक और निदेशक युवा कल्याण डॉ. जगबीर राठी ने किया। उपाधि एवं पदक प्रदान का कार्य परीक्षा नियंत्रक डॉ. बीएस सिंधु और रजिस्ट्रार जितेंद्र भारद्वाज ने उपाधियों की औपचारिक घोषणा की।
यूनिवर्सिटी में हर वर्ष होगा दीक्षांत समारोह
समारोह के दौरान राज्यपाल ने कहा कि यह खेद का विषय है कि पांच साल बाद यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह हो रहा है। समारोह हर साल होना चाहिए। उन्होंने वीसी प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया से भी कहा कि अब हर साल यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह कराएं। कुलपति ने भी इसके लिए आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2012 में समारोह हुआ था।
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श्रीराम- एक विवेचन का विमोचन
समारोह के दौरान राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने महिला छात्रावास की वार्डन डॉ. सुनीता मल्हान की पुस्तक श्रीराम-एक विवेचन का विमोचन भी किया। उन्होंने इस पुस्तक के लिए डॉ. मल्हान को बधाई दी।
नहीं आए शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा
दीक्षांत समारोह में शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा को भी शिरकत करनी थी, लेकिन ऐनवक्त पर पता चला कि किन्हीं कारणों से शिक्षामंत्री नहीं आ सकते।
करीब एक घंटा लेट पहुंचे राज्यपाल
समारोह में राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी को निर्धारित समय के अनुसार 11 बजे पहुंचना था, लेकिन राज्यपाल करीब एक घंटा लेट पहुंचे। राज्यपाल के पहुंचने के बाद करीब 12:20 बजे दीक्षांत समारोह का शुभारंभ हुआ।
ये रहे मौजूद
समारोह में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा के वीसी प्रो. विजय कायत, भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां की वीसी प्रो. आशा कादियान, चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद के वीसी मेजर जनरल रणजीत सिंह, जस्टिस प्रमोद कोहली की पत्नी मीना कोहली, प्रो. बीके कुठियाला की पत्नी मधु कुठियाला, डॉ. वंदना पूनिया, सीईसी नई दिल्ली के निदेशक प्रो. राजबीर सिंह, पीजीआईएमएस के रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल, निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी और पीआरओ पंकज नैन मौजूद रहे।
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मुख्यातिथि राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी, सहकारिता मंत्री मनीष ग्रोवर और कुलपति प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया ने दीप जलाकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान राज्यपाल प्रो. सोलंकी ने करीब 22 मिनट के भाषण में विद्यार्थियों को संस्कार, चरित्र और गुरु-शिष्य का पाठ पढ़ाया। उन्होंने 838 पीएचडी, 823 स्वर्ण पदक, 17 बेस्ट थीसिस और 324 यूजी-पीजी की डिग्रियां दी गईं। विद्यार्थियों को पीएचडी, पदक और अन्य डिग्री पहले ही दे दी गई थे। इसके बाद विद्यार्थियों के अलग-अलग ग्रुप को मंच पर बुलाया गया, जहां पर मुख्यातिथि के साथ फोटो कराया और फिर अगले ग्रुप को भेजा गया। मंच संचालन मानविकी संकाय के डीन प्रो. सुरेंद्र कुमार, प्राध्यापिका डॉ. दिव्या मल्हान, डॉ. गुंजन मलिक और निदेशक युवा कल्याण डॉ. जगबीर राठी ने किया। उपाधि एवं पदक प्रदान का कार्य परीक्षा नियंत्रक डॉ. बीएस सिंधु और रजिस्ट्रार जितेंद्र भारद्वाज ने उपाधियों की औपचारिक घोषणा की।
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यूनिवर्सिटी में हर वर्ष होगा दीक्षांत समारोह
समारोह के दौरान राज्यपाल ने कहा कि यह खेद का विषय है कि पांच साल बाद यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह हो रहा है। समारोह हर साल होना चाहिए। उन्होंने वीसी प्रो. बिजेंद्र कुमार पूनिया से भी कहा कि अब हर साल यूनिवर्सिटी में दीक्षांत समारोह कराएं। कुलपति ने भी इसके लिए आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि इससे पहले वर्ष 2012 में समारोह हुआ था।
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श्रीराम- एक विवेचन का विमोचन
समारोह के दौरान राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने महिला छात्रावास की वार्डन डॉ. सुनीता मल्हान की पुस्तक श्रीराम-एक विवेचन का विमोचन भी किया। उन्होंने इस पुस्तक के लिए डॉ. मल्हान को बधाई दी।
नहीं आए शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा
दीक्षांत समारोह में शिक्षामंत्री रामबिलास शर्मा को भी शिरकत करनी थी, लेकिन ऐनवक्त पर पता चला कि किन्हीं कारणों से शिक्षामंत्री नहीं आ सकते।
करीब एक घंटा लेट पहुंचे राज्यपाल
समारोह में राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी को निर्धारित समय के अनुसार 11 बजे पहुंचना था, लेकिन राज्यपाल करीब एक घंटा लेट पहुंचे। राज्यपाल के पहुंचने के बाद करीब 12:20 बजे दीक्षांत समारोह का शुभारंभ हुआ।
ये रहे मौजूद
समारोह में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा के वीसी प्रो. विजय कायत, भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय खानपुर कलां की वीसी प्रो. आशा कादियान, चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय जींद के वीसी मेजर जनरल रणजीत सिंह, जस्टिस प्रमोद कोहली की पत्नी मीना कोहली, प्रो. बीके कुठियाला की पत्नी मधु कुठियाला, डॉ. वंदना पूनिया, सीईसी नई दिल्ली के निदेशक प्रो. राजबीर सिंह, पीजीआईएमएस के रजिस्ट्रार डॉ. एचके अग्रवाल, निदेशक जनसंपर्क सुनित मुखर्जी और पीआरओ पंकज नैन मौजूद रहे।