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जीएसटी कमियों को नहीं किया दूर, टैक्स चोरी रोकने का नहीं किया प्रावधान
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अमर उजाला सिटी कार्यालय में हुए संवाद कार्यक्रम में बजट की जानकारी देते एक्सपर्ट।
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रोहतक। बजट ने राहत के साथ उलझन भी दी है। सौर ऊर्जा, स्वच्छ हवा-पानी, जैविक उर्वर की बात किसान ही नहीं आम आदमी के हित कही गई है। रोजगार के साधनों और जीएसटी सरलीकरण पर ध्यान न देना थोड़ा मायूसी भरा है। इसी वजह से वैट के मुकाबले जीएसटी कम आया है। टैक्स चोरी की जा रही है। देश की मौजूद जीडीपी 4.5 है। यह उलझन भरा मामला है। इसी तरह नई व पुरानी टैक्स पॉलिसी, उपक्रमों के शेयर बेचने सरीखे सवाल भी संशय भरे हैं। ऐसे में बजट को समझने की जरूरत है। एक्सपर्ट के तौर पर सीए संजय थरेजा ने अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम में लोगों को बजट की बारीकियां समझाते हुए उनकी उलझनें दूर की।
टैक्स दर कम करके रेवेन्यू बढ़ा सकती है सरकार
नया बजट आम आदमी, किसान, व्यापारी सभी के लिए एक समान है। किसी को खास भले नहीं मिला हो, मगर भविष्य कोे बेहतर बनाने पर जरूर ध्यान दिया गया है। किसान अपनी आय सौर ऊर्जा प्लांट के जरिए बढ़ा सकते हैं। उनके लिए अलग से बजट की भी व्यवस्था की गई है। आम आदमी अपनी दैनिक जरूरतों व रोजगार के लिए चिंतित है। व्यापारी टैक्स व दूसरी चिंताओं में घिरा है। सरकार ने इन्हें भी राहत देने का प्रयास किया है। खातधारकों की बैंक गारंटी एक लाख रुपये से बढ़ा कर पांच लाख कर दी गई है। इससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है। हालांकि इसमें और गुंजाइश है। सरकार जीएसटी दर 28 से कम कर 18 प्रतिशत करती है तो हर वर्ग को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे टैक्स भुगतान प्रतिशत भी बढ़ेगा। टैक्स अधिक होने की वजह से इस बार वैट से भी कम जीएसटी आया है। लोग नई के बजाय पुरानी टैक्स पॉलिसी अपनाएं। यह बेहतर है। जीएसटी का सरलीकरण जरूरी है। इस बारे में जीएसटी काउंसिल की 27 फरवरी को होने वाली बैठक में राहत की उम्मीद है।
संजय थरेजा, चार्टेड एकाउंटेंट।
अपना ही पैसा बैंक में भी नहीं है सुरक्षित
बजट से राहत की आस थी। इसकी घोषणा के बाद यह आस भी जाती रही। लोगों को परेशानी ही मिली है। हालात ये हैं कि लोगों का अपना पैसा बैंक तक में सुरक्षित नहीं है। यहां कोई त्रासदी होती है तो महज पांच लाख रुपये ही मिलेगा। सरकार चाहती है कि हम अपना पैसा बैंकों में न रखें। ऐसे में आम आदमी पैसा कहां ले जाए। बाजार अस्थिर है। मंदी के हालात हैं। इससे घाटे का डर बना हुआ है।
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मंजीत यादव, व्यवसायी।
महंगाई रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया
बजट ने वेतन भोगियों को ही परेशान किया है। इसमें पेंशनर्स भी शामिल हैं। कर्मचारी खासकर पेंशनर्स टैक्स का भुगतान कर रहे हैं। जबकि व्यवसायी धड़ल्ले से करोड़ों रुपये का टैक्स चुरा रहे हैं। कर्मचारियों की तरह व्यवसायी भी ईमानदारी से टैक्स का भुगतान करें। बजट में महिलाओं के लिए कुछ नहीं है। फ्रूट या ड्राय फ्रूट ही नहीं सब्जी तक महंगी है। इस बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
कमलेश गुलाटी,
कामकाजी महिलाएं मायूस, नया काम करना मुश्किल
सरकार के बजट में कामकाजी महिलाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। उन्हें मायूसी हाथ लगी है। कामकाजी महिलाएं नया काम शुरू नहीं कर सकती। देश में एक तरफ करोड़ों रुपये का ब्याज चोरी किया जा रहा है। दूसरी तरफ प्याज सरीखी खाद्य सामग्री 60 रुपये किलो के भाव बिक रही है। सरकार को इन जरूरी व छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हुए बजट जारी करना चाहिए था।
शीतल शर्मा, ब्यूटीशियन।
जीएसटी से बचना चाहते हैं, इसलिए नहीं लेते बिल
बजट ने आम आदमी ही नहीं व्यवसायियों के लिए भी कुछ नहीं दिया। गैस सिलिंडर के दाम जरूर बढ़ गए हैं। जीएसटी को लेकर राहत नहीं मिली है। लोग भी जीएसटी से बचना चाहते हैं। यही वजह है मिठाई हो या दवाई बिल के अतिरिक्त टैक्स की बात आते ही लोग आगे चल पड़ते हैं। लोग खुद बिल नहीं लेते हैं। दुकानदार को माल बेचना है। इसलिए बगैर बिल ही ग्राहक को सामान बेचा जा रहा है।
वीरेंद्र राठी, व्यवसायी।
व्यापारियों को टैक्स पॉलिसी की बारीकियां समझाएं अधिकारी
सरकार ने जीएसटी के सरलीकरण पर ध्यान नहीं दिया है। टैक्स में किसी तरह की राहत भी नहीं दी गई है। इसके साथ असमंजस की स्थिति और बना दी है। कर्मचारी या व्यवसायी नई पॉलिसी ले या पुरानी। इस बात को लेकर हर व्यक्ति परेशान है। किस पॉलिसी में फायदा है, किस में नुकसान। यह स्पष्ट करने के लिए टैक्स विभाग को व्यापारियों के सेमीनार आयोजित करने चाहिए, ताकि संशय दूर हो सके।
राजू भूटानी, प्रधान, मार्बल एसोसिएशन।
बाजार में सकारात्मक चीजों को रखा जाए आगे
बजट जारी हो गया है। इसमें सरकार ने कई प्रावधान किए हैं। हर वर्ग के लिए थोड़ा-थोड़ा देने का दावा किया गया है, जबकि असल समस्या मंदी की है। इसे लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है। बाजार को मंदी से उबारने के लिए सकारात्मक चीजों को आगे रखा जाए। ताकि व्यापारी हो या आम आदमी सभी को राहत मिल सके, क्योंकि नकारात्मक प्रचार का असर सीधा सिटीजन पर पड़ रहा है।
दीपू नागपाल, अध्यक्ष, रोटी डे संस्था।
टैक्स स्लैब कम होने पर मिलेगी राहत
बजट में टैक्स को लेकर खास ध्यान नहीं दिया गया है, जबकि यह सबसे जरूरी है। इसी से विकास कार्यों के लिए धन आता है। सरकार टैक्स स्लैब कम कर दे तो ज्यादा कर जमा होगा। इससे सभी को राहत मिलेगी। टैक्स दर अधिक होने के चलते लोग इसे चुकाने से बचने का रास्ता तलाश रहे हैं। डेविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स पहले कंपनी देती थी। अब डेविडेंट को खुद यह भुगतान करना होगा। इसे वापस लिया जाए।
अमित जैन, प्रधान, बैग एसोसिएशन रेलवे रोड।
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टैक्स दर कम करके रेवेन्यू बढ़ा सकती है सरकार
नया बजट आम आदमी, किसान, व्यापारी सभी के लिए एक समान है। किसी को खास भले नहीं मिला हो, मगर भविष्य कोे बेहतर बनाने पर जरूर ध्यान दिया गया है। किसान अपनी आय सौर ऊर्जा प्लांट के जरिए बढ़ा सकते हैं। उनके लिए अलग से बजट की भी व्यवस्था की गई है। आम आदमी अपनी दैनिक जरूरतों व रोजगार के लिए चिंतित है। व्यापारी टैक्स व दूसरी चिंताओं में घिरा है। सरकार ने इन्हें भी राहत देने का प्रयास किया है। खातधारकों की बैंक गारंटी एक लाख रुपये से बढ़ा कर पांच लाख कर दी गई है। इससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है। हालांकि इसमें और गुंजाइश है। सरकार जीएसटी दर 28 से कम कर 18 प्रतिशत करती है तो हर वर्ग को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे टैक्स भुगतान प्रतिशत भी बढ़ेगा। टैक्स अधिक होने की वजह से इस बार वैट से भी कम जीएसटी आया है। लोग नई के बजाय पुरानी टैक्स पॉलिसी अपनाएं। यह बेहतर है। जीएसटी का सरलीकरण जरूरी है। इस बारे में जीएसटी काउंसिल की 27 फरवरी को होने वाली बैठक में राहत की उम्मीद है।
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संजय थरेजा, चार्टेड एकाउंटेंट।
अपना ही पैसा बैंक में भी नहीं है सुरक्षित
बजट से राहत की आस थी। इसकी घोषणा के बाद यह आस भी जाती रही। लोगों को परेशानी ही मिली है। हालात ये हैं कि लोगों का अपना पैसा बैंक तक में सुरक्षित नहीं है। यहां कोई त्रासदी होती है तो महज पांच लाख रुपये ही मिलेगा। सरकार चाहती है कि हम अपना पैसा बैंकों में न रखें। ऐसे में आम आदमी पैसा कहां ले जाए। बाजार अस्थिर है। मंदी के हालात हैं। इससे घाटे का डर बना हुआ है।
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मंजीत यादव, व्यवसायी।
महंगाई रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाया
बजट ने वेतन भोगियों को ही परेशान किया है। इसमें पेंशनर्स भी शामिल हैं। कर्मचारी खासकर पेंशनर्स टैक्स का भुगतान कर रहे हैं। जबकि व्यवसायी धड़ल्ले से करोड़ों रुपये का टैक्स चुरा रहे हैं। कर्मचारियों की तरह व्यवसायी भी ईमानदारी से टैक्स का भुगतान करें। बजट में महिलाओं के लिए कुछ नहीं है। फ्रूट या ड्राय फ्रूट ही नहीं सब्जी तक महंगी है। इस बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
कमलेश गुलाटी,
कामकाजी महिलाएं मायूस, नया काम करना मुश्किल
सरकार के बजट में कामकाजी महिलाओं के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है। उन्हें मायूसी हाथ लगी है। कामकाजी महिलाएं नया काम शुरू नहीं कर सकती। देश में एक तरफ करोड़ों रुपये का ब्याज चोरी किया जा रहा है। दूसरी तरफ प्याज सरीखी खाद्य सामग्री 60 रुपये किलो के भाव बिक रही है। सरकार को इन जरूरी व छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखते हुए बजट जारी करना चाहिए था।
शीतल शर्मा, ब्यूटीशियन।
जीएसटी से बचना चाहते हैं, इसलिए नहीं लेते बिल
बजट ने आम आदमी ही नहीं व्यवसायियों के लिए भी कुछ नहीं दिया। गैस सिलिंडर के दाम जरूर बढ़ गए हैं। जीएसटी को लेकर राहत नहीं मिली है। लोग भी जीएसटी से बचना चाहते हैं। यही वजह है मिठाई हो या दवाई बिल के अतिरिक्त टैक्स की बात आते ही लोग आगे चल पड़ते हैं। लोग खुद बिल नहीं लेते हैं। दुकानदार को माल बेचना है। इसलिए बगैर बिल ही ग्राहक को सामान बेचा जा रहा है।
वीरेंद्र राठी, व्यवसायी।
व्यापारियों को टैक्स पॉलिसी की बारीकियां समझाएं अधिकारी
सरकार ने जीएसटी के सरलीकरण पर ध्यान नहीं दिया है। टैक्स में किसी तरह की राहत भी नहीं दी गई है। इसके साथ असमंजस की स्थिति और बना दी है। कर्मचारी या व्यवसायी नई पॉलिसी ले या पुरानी। इस बात को लेकर हर व्यक्ति परेशान है। किस पॉलिसी में फायदा है, किस में नुकसान। यह स्पष्ट करने के लिए टैक्स विभाग को व्यापारियों के सेमीनार आयोजित करने चाहिए, ताकि संशय दूर हो सके।
राजू भूटानी, प्रधान, मार्बल एसोसिएशन।
बाजार में सकारात्मक चीजों को रखा जाए आगे
बजट जारी हो गया है। इसमें सरकार ने कई प्रावधान किए हैं। हर वर्ग के लिए थोड़ा-थोड़ा देने का दावा किया गया है, जबकि असल समस्या मंदी की है। इसे लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है। बाजार को मंदी से उबारने के लिए सकारात्मक चीजों को आगे रखा जाए। ताकि व्यापारी हो या आम आदमी सभी को राहत मिल सके, क्योंकि नकारात्मक प्रचार का असर सीधा सिटीजन पर पड़ रहा है।
दीपू नागपाल, अध्यक्ष, रोटी डे संस्था।
टैक्स स्लैब कम होने पर मिलेगी राहत
बजट में टैक्स को लेकर खास ध्यान नहीं दिया गया है, जबकि यह सबसे जरूरी है। इसी से विकास कार्यों के लिए धन आता है। सरकार टैक्स स्लैब कम कर दे तो ज्यादा कर जमा होगा। इससे सभी को राहत मिलेगी। टैक्स दर अधिक होने के चलते लोग इसे चुकाने से बचने का रास्ता तलाश रहे हैं। डेविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स पहले कंपनी देती थी। अब डेविडेंट को खुद यह भुगतान करना होगा। इसे वापस लिया जाए।
अमित जैन, प्रधान, बैग एसोसिएशन रेलवे रोड।