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Rohtak News: बिल्डर ने नहीं बनाकर दिया फ्लैट, लौटाने होंगे 6 लाख 89 हजार रुपये 12 प्रतिशत ब्याज सहित

Sun, 14 Jan 2024 12:47 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 14 Jan 2024 12:47 PM IST
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Builder did not build the flat and gave it, will have to return Rs 6 lakh 89 thousand with 12 percent interest
रोहतक। दिल्ली रोड पर बिल्डर ने आवेदन के बावजूद 3 बीएचके का फ्लैट बनाकर नहीं दिया। साथ ही 3 लाख 43 हजार रुपये राशि जब्त कर ली। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बिल्डर को आदेश दिया है कि एक माह में याचिकाकर्ता को 6 लाख 89 हजार रुपये 12 प्रतिशत ब्याज सहित लौटाए। साथ में 25 हजार रुपये हर्जाने व 5 हजार रुपये कानून खर्च के तौर पर दे।
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आयोग के रिकार्ड में प्रीत विहार हाल में सनसिटी 35 निवासी संजय ने दिसंबर 2022 में आयोग में याचिका दायर की थी कि दिल्ली की एक कंपनी ने दिल्ली रोड पर फ्लैट की बुकिंग शुरू की थी। 2013 में उसने खेड़ी साध निवासी भगत सिंह सिंधु से 3 बीएचके का फ्लैट खरीदा था। इसके लिए 4 लाख रुपये की राशि दी थी। इसके बाद 4 लाख 84 हजार 255 रुपये की राशि का भुगतान किया था। उससे कहा गया कि आवंटन के समय फ्लैट से संबंधित शर्त पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। बाद में आश्वासन सही साबित नहीं हुआ। क्योंकि साइट पर निर्माण शुरू नहीं किया गया। उसने अपने पैसे 8 लाख 84 हजार 255 रुपये 18 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से वापस मांगे। साथ ही कानूनी खर्च व विशेष हर्जाने के तौर पर 50 हजार रुपये की मांग की। जब संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो पीड़ित 2022 में आयोग का दरवाजा खटखटाया। बिल्डर ने आयोग के नोटिस के जवाब में कहा कि रिफंड का विकल्प होने के बावजूद याचिकाकर्ता की तरफ से अप्रैल 2013 में 4 लाख 84 हजार 255 रुपये की राशि जमा करवाई। इतना ही नहीं, आवेदनकर्ता योजना में रुचि रखता था, इसलिए उससे तीसरी किस्त 3 लाख 53 हजार 702 रुपये मांगी गई। याचिकाकर्ता ने भुगतान नहीं किया तो उसका आवंटन रद्द कर दिया। साथ ही भुगतान की गई कुल राशि में से 3 लाख 43 हजार 100 रुपये जब्त कर ली गई। आयोग ने सुनवाई की तो पाया कि याचिकाकर्ता ने फ्लैट के लिए किस्त के तौर पर बिल्डर को 6 लाख 89 हजार 415 रुपये जमा करवाए हैं। इसके बावजूद याचिकाकर्ता को फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया। इतना ही नहीं, लंबे समय तक बिल्डर ने फ्लैट निर्माण शुरू नहीं किया। आयोग ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद बिल्डर को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता को 6 लाख 89 हजार 415 रुपये, 12 प्रतिशत ब्याज सहित दें। साथ ही मुआवजे के तौर पर 25 हजार रुपये और कानूनी खर्च के तौर पर 5 हजार रुपये दिए जाएं।
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