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Rohtak News: अचानक मरीजों की मौत केे बाद प्रोपोफोल इंजेक्शन का बैच वापस मंगाया

Fri, 30 Oct 2026 12:36 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 30 Oct 2026 12:36 AM IST
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Batch of Propofol injections recalled following sudden patient deaths
रोहतक। पीजीआई में कुछ समय पहले मरीजों की अचानक मौत के मामले सामने आने के बाद प्रोपोफोल नामक इंजेक्शन के विशेष बैच को तत्काल प्रभाव से बंद कर वापस मंगाया गया है। यह निर्णय औषधि नियंत्रक अधिकारी रोहतक डॉ. मनदीप मान के निर्देशों पर लिया गया है। चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) के निर्देश मिलने के बाद संस्थान ने यह कदम उठाया है। इंजेक्शन को जांच के लिए लैब भेजा गया है। जांच पूरी होने तक इसके उपयोग पर रोक लगा दी गई है।
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संस्थान के केंद्रीय स्टोर ने सभी विभागाध्यक्षों को इस संबंध में पत्र भेजा है। पत्र में इंजेक्शन के संबंधित बैच का उपयोग तुरंत बंद करने को कहा गया है। यह इंजेक्शन नियॉन कंपनी द्वारा निर्मित है। इसका निर्माण फरवरी में हुआ था और इसकी समाप्ति तिथि जनवरी 2028 है। औषधि नियंत्रक अधिकारी ने 29 अक्तूबर को केंद्रीय स्टोर के औषधि भंडार का निरीक्षण किया था। डीएमईआर ने 28 अक्तूबर को इस संबंध में पत्र जारी किया था। इस इंजेक्शन का उपयोग ऑपरेशन के दौरान मरीजों को बेहोश करने के लिए किया जाता है।
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मरीजों के हित में लिया फैसला
सभी विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने पास मौजूद इस बैच का पूरा स्टॉक केंद्रीय स्टोर में वापस जमा कराएं। मरीजों की देखभाल के हित में यह कदम उठाया गया है। केंद्रीय स्टोर के औषधि भंडार में उपलब्ध प्रोपोफोल इंजेक्शन के अन्य बैचों की मांग करने को भी कहा गया है।
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सैंपल जांच के लिए भेजे, 11,283 इंजेक्शन कब्जे में लिए
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय (डीएमईआर) को शिकायत की गई थी। इसके बाद निदेशालय ने उपायुक्त रोहतक और खाद्य एवं औषधि प्रशासन को मामले का संज्ञान लेने के लिए कहा। इसके बाद जिला औषधि नियंत्रक अधिकारी पीजीआई पहुंचे और जांच की। निरीक्षण के दौरान संस्थान के केंद्रीय स्टोर में इंजेक्शन मिले। इनके उपयोग पर तत्काल रोक लगा दी गई है।


सर्जरी से पहले बेहोश करने के लिए होता है प्रयोग
प्रोपोफोल इंजेक्शन का उपयोग सर्जरी या चिकित्सा प्रक्रियाओं से पहले और उनके दौरान मरीज को बेहोश करने या नींद लाने के लिए किया जाता है। इसे नसों के माध्यम से दिया जाता है और इसका असर बहुत तेजी से होता है। दूध जैसा दिखने के कारण इसे मिल्क ऑफ एनेस्थीसिया भी कहा जाता है।
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