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अब प्रदेश मुख्यालय से चलेगी एंबुलेंस सेवा, पंचकूला में होगा कंट्रोल रूम
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Fri, 12 Jun 2015 02:36 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में मौजूद एंबुलेंस सेवाआें को केंद्रीकृत करने की तैयारी शुरू कर दी है।
जल्द ही सरकारी एंबुलेंस पंचकूला स्थित विभाग के मुख्यालय से संचालित होंगी।
व्यवस्था रहेगी कि एंबुलेंस के लिए 102 नंबर पर की गई कॉल सीधा पंचकूला कंट्रोल रूम में पहुंचेगी। यहां मौजूद ऑपरेटर मरीज के सबसे पास वाले एंबुलेंस चालक को उसके पास भेजेगा।
ये ऑपरेटर जीपीएस के माध्यम से पूरे प्रदेश में एंबुलेंस की लोकेशन पर भी नजर रखेंगे। फिलहाल देश के 15 राज्याें में केंद्रीकृत एंबुलेंस सेवा चल रही हैं।
ये होगा फायदा
इस कवायद के पीछे विभाग की मंशा एंबुलेंस के खेल में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की है।
लगातार एंबुलेंस चालकाें पर निजी चिकित्सकाें से साठगांठ और मरीजाें से अधिक रकम वसूलने के आरोप लगते रहे हैं। कई जिलाें में तो बाकायदा एंबुलेंस रैकेट भी सामने आया है।
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अगर सेवा को केंद्रीकृत किया जाएगा तो मरीज को सबसे पास वाली एंबुलेंस आसानी से उपलब्ध हो सकेगी और जीपीएस से उस पर नजर भी रखी जा सकेगी।
बदला जा सकता है एंबुलेंस को बुलाने वाला 102 नंबर भी
सूत्राें की मानें तो विभाग जल्द ही एंबुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर 102 को भी बदल सकता है। नया नंबर 108 जारी किया जा सकता है। हालांकि इसकी घोषणा पूरे प्रदेश में एंबुलेंस सेवा के केंद्रीकृत होने के बाद ही की जाएगी।
जिला कंट्रोल रूम पर खतरा
सेवा केंद्रीकृत होने का नुकसान सिविल अस्पतालाें में जिलास्तरीय एंबुलेंस कंट्रोल रूम के कर्मचारियाें को होगा। जिलाें में बैठे ऑपरेटरों और सहायकाें का काम खत्म हो जाएगा। ऐसे में सरकार इनकी सेवाएं खत्म करने जैसा सख्त कदम भी उठा सकती है।
वर्जन
‘इस बारे में चर्चा चल रही है। हालांकि इसमें वक्त लगेगा, लेकिन विभाग ने इस बारे में गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है।’
डा. शिवकुमार, सीएमओ, रोहतक।
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जल्द ही सरकारी एंबुलेंस पंचकूला स्थित विभाग के मुख्यालय से संचालित होंगी।
व्यवस्था रहेगी कि एंबुलेंस के लिए 102 नंबर पर की गई कॉल सीधा पंचकूला कंट्रोल रूम में पहुंचेगी। यहां मौजूद ऑपरेटर मरीज के सबसे पास वाले एंबुलेंस चालक को उसके पास भेजेगा।
ये ऑपरेटर जीपीएस के माध्यम से पूरे प्रदेश में एंबुलेंस की लोकेशन पर भी नजर रखेंगे। फिलहाल देश के 15 राज्याें में केंद्रीकृत एंबुलेंस सेवा चल रही हैं।
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ये होगा फायदा
इस कवायद के पीछे विभाग की मंशा एंबुलेंस के खेल में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम कसने की है।
लगातार एंबुलेंस चालकाें पर निजी चिकित्सकाें से साठगांठ और मरीजाें से अधिक रकम वसूलने के आरोप लगते रहे हैं। कई जिलाें में तो बाकायदा एंबुलेंस रैकेट भी सामने आया है।
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अगर सेवा को केंद्रीकृत किया जाएगा तो मरीज को सबसे पास वाली एंबुलेंस आसानी से उपलब्ध हो सकेगी और जीपीएस से उस पर नजर भी रखी जा सकेगी।
बदला जा सकता है एंबुलेंस को बुलाने वाला 102 नंबर भी
सूत्राें की मानें तो विभाग जल्द ही एंबुलेंस के लिए टोल फ्री नंबर 102 को भी बदल सकता है। नया नंबर 108 जारी किया जा सकता है। हालांकि इसकी घोषणा पूरे प्रदेश में एंबुलेंस सेवा के केंद्रीकृत होने के बाद ही की जाएगी।
जिला कंट्रोल रूम पर खतरा
सेवा केंद्रीकृत होने का नुकसान सिविल अस्पतालाें में जिलास्तरीय एंबुलेंस कंट्रोल रूम के कर्मचारियाें को होगा। जिलाें में बैठे ऑपरेटरों और सहायकाें का काम खत्म हो जाएगा। ऐसे में सरकार इनकी सेवाएं खत्म करने जैसा सख्त कदम भी उठा सकती है।
वर्जन
‘इस बारे में चर्चा चल रही है। हालांकि इसमें वक्त लगेगा, लेकिन विभाग ने इस बारे में गंभीरता से विचार शुरू कर दिया है।’
डा. शिवकुमार, सीएमओ, रोहतक।