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अजायब खास की ‘खास’ सरपंच बनीं अर्थशास्त्री बेटी
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Mon, 18 Jan 2016 12:59 AM IST
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उम्र 22 साल, क्लास एमए अर्थशास्त्र। कुछ यूं है अजायब खास की ‘खास’ सरपंच
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मनीषा का परिचय, जिसने बेहद कम उम्र और तजुर्बा होने के बाद अनुभवी
सियासतदारों का चुनावी गणित बिगाड़ दिया।
एमडीयू की इस छात्रा ने निवर्तमान सरपंच की पत्नी समेत दो प्रतिद्वंद्वी को एकतरफा मात देते हुए चौधर कब्जा ली। गांव के बड़े-बुुजुर्ग के साथ युवा भी इस खास बेटी की जीत से खुश हैं।
महम ब्लॉक के अजायब खास में 1660 मतदाता हैं। सरपंच की सीट इस बार महिला के लिए आरक्षित थी। पूर्व सरपंच बिजेंद्र ने अपनी पत्नी नविता को चुनावी मैदान में उतार रखा था तो दूसरी ओर सुनीता पत्नी सुरेश भी मोर्चा संभाले थीं। इनके बीच रिटायर्ड फौजी सुरेंद्र की 22 वर्षीय बेटी मनीषा मैदान में उतरी।
गांव की राजनीति का कम अनुभव होने के बाद भी एमडीयू में अर्थशास्त्र से एमए कर रही मनीषा ने वोट बैंक का सामंजस्य बिठाया। ग्रामीणों को मनीषा की इच्छाशक्ति, जज्बा और विकासवादी सोच भा गई। ग्रामीणों का साथ मिला तो मनीषा ने अपने प्रतिद्वंद्वी नविता को 212 वोटों से हराकर जीत हासिल की। साथ ही, जिले में सबसे कम उम्र की सरपंचों में शुमार कर लिया।
चुनाव में जीत के बाद मनीषा ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ अब उसका लक्ष्य गांव का विकास करना भी होगा। सबसे खास मकसद कन्या भ्रूणहत्या को रोकना, बच्चों की पढ़ाई और गांव के विकास को लेकर नई योजनाएं बनाना होगा। इसके साथ ही बेटियों को आत्मरक्षा के लिए तैयार किया जाएगा।
शिक्षक और सहपाठियों से मिलेंगे विकास के नए आइडिया
मनीषा का कहना है कि चुनाव में गांव के लोगों के साथ सहपाठियों का भी पूरा सहयोग मिला।
अंकिता, संदीप और सचिन आदि पिछले कई दिनों से गांव में रहकर चुनाव प्रचार में जुटे थे। पढ़ाई के साथ-साथ सरपंच पद का दायित्व निभाना एक चुनौती होगा, जिसे अच्छे तरीके से निभाउंगी।
मनीषा का मानना है कि वह क्लास में सहपाठियों और शिक्षकों से भी समय-समय पर गांव के विकास को लेकर चर्चा करेगी, जिससे नए-नए आइडिया विकसित होंगे।
एमडीयू की इस छात्रा ने निवर्तमान सरपंच की पत्नी समेत दो प्रतिद्वंद्वी को एकतरफा मात देते हुए चौधर कब्जा ली। गांव के बड़े-बुुजुर्ग के साथ युवा भी इस खास बेटी की जीत से खुश हैं।
महम ब्लॉक के अजायब खास में 1660 मतदाता हैं। सरपंच की सीट इस बार महिला के लिए आरक्षित थी। पूर्व सरपंच बिजेंद्र ने अपनी पत्नी नविता को चुनावी मैदान में उतार रखा था तो दूसरी ओर सुनीता पत्नी सुरेश भी मोर्चा संभाले थीं। इनके बीच रिटायर्ड फौजी सुरेंद्र की 22 वर्षीय बेटी मनीषा मैदान में उतरी।
गांव की राजनीति का कम अनुभव होने के बाद भी एमडीयू में अर्थशास्त्र से एमए कर रही मनीषा ने वोट बैंक का सामंजस्य बिठाया। ग्रामीणों को मनीषा की इच्छाशक्ति, जज्बा और विकासवादी सोच भा गई। ग्रामीणों का साथ मिला तो मनीषा ने अपने प्रतिद्वंद्वी नविता को 212 वोटों से हराकर जीत हासिल की। साथ ही, जिले में सबसे कम उम्र की सरपंचों में शुमार कर लिया।
चुनाव में जीत के बाद मनीषा ने बताया कि पढ़ाई के साथ-साथ अब उसका लक्ष्य गांव का विकास करना भी होगा। सबसे खास मकसद कन्या भ्रूणहत्या को रोकना, बच्चों की पढ़ाई और गांव के विकास को लेकर नई योजनाएं बनाना होगा। इसके साथ ही बेटियों को आत्मरक्षा के लिए तैयार किया जाएगा।
शिक्षक और सहपाठियों से मिलेंगे विकास के नए आइडिया
मनीषा का कहना है कि चुनाव में गांव के लोगों के साथ सहपाठियों का भी पूरा सहयोग मिला।
अंकिता, संदीप और सचिन आदि पिछले कई दिनों से गांव में रहकर चुनाव प्रचार में जुटे थे। पढ़ाई के साथ-साथ सरपंच पद का दायित्व निभाना एक चुनौती होगा, जिसे अच्छे तरीके से निभाउंगी।
मनीषा का मानना है कि वह क्लास में सहपाठियों और शिक्षकों से भी समय-समय पर गांव के विकास को लेकर चर्चा करेगी, जिससे नए-नए आइडिया विकसित होंगे।