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जहरीली हुई शहर की आबोहवा

Wed, 16 Dec 2015 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Wed, 16 Dec 2015 01:18 AM IST
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दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर के बाद अब शहर के लिए खतरे की घंटी बच चुकी है।
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अगर शहर में बढ़ रहे प्रदूषण के लिए जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। एमडीयू के पर्यावरण एवं विज्ञान विभाग की ओर से जारी किए गए सर्वे रिपोर्ट के आधार पर तीन सालों में शहर का प्रदूषण स्तर दो मानक से पांच गुना बढ़ चुका है।

ऐसे में प्रदूषण की वजह से शहरवासियों में बीमारी का भी खतरा बढ़ रहा है।

प्रदूषण की मात्रा लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन नियंत्रण की तरफ कोई ध्यान नहीं है। जिले में लगभग दस लाख जनसंख्या है। हर साल हजारों से अधिक वाहन भी सड़कों पर उतर जाते हैं।
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एमडीयू के पर्यावरण एवं विज्ञान विभाग द्वारा समय-समय पर प्रदूषण के हालात जानने के लिए सर्वे किया जाता है। इस सर्वे के आंकड़े देखें तो फिलहाल में शहर की स्थिति ठीक नहीं है।
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सबसे ज्यादा हालात खराब आरएसपीएम नामक प्रदूषण की है। मानक के अनुसार, आरएसपीएम की संख्या 60 माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब होनी चाहिए, लेकिन पिछले 3 वर्षों में यह संख्या बढ़कर 300 माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब तक पहुंच चुकी है।


हवा में घुलने वाले कार्बनिक और अकार्बनिक तत्वों के कणों को आरएसपीएम कहा जाता है। इनका आकार 10 माइक्रोन से भी कम होता है। कंस्ट्रक्शन के समय यह प्रदूषण सबसे अधिक निकलता है।


प्लास्टिक का सामान, सिंथेटिक रेशे और पर्दे आदि घरेलू सामान में इनके मिलने की अधिक आशंका रहती है। यह कण वातावरण से रसायनिक अभिक्रिया और गाड़ियों के धुंए से उत्पन्न होते हैं, जो नाक के माध्यम से सीधे व्यक्ति के फेफेडों की कार्यक्षमता को प्रभावित करते हैं।

यह है वाहनों से निकलने वाले प्रदूषण के हालात
सर्वे के अनुसार शहर में वाहनों का प्रदूषण कम नहीं है। सामान्यत: पर्यावरण में नाइट्रोजन डाईऑक्साइड की मात्रा 40 माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब और कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा 02 माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब होनी चाहिए। इसके अलावा सल्फर की मात्रा भी 50 माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब से कम होनी चाहिए।

सर्वे में सामने आई इनकी स्थिति पर नजर डाले तो नाइट्रोजन डाईऑक्साइड की मात्रा 55 माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब और कार्बन मोनो ऑक्साइड की मात्रा बढ़कर 1200 माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब पर पाई गई थी, जो बेहद खतरनाक है।


यह है आरएसपीएम की स्थिति
2013 - 155
2014 - 250
2015 - 300
नोट : यह संख्या माइक्रोग्राम परमीटर क्यूब में है।

वर्जन
शहर में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। ऐसे में सांस, दमा और कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। लोगों को जागरूक होकर सतर्कता बरतनी होगी, तभी इससे निजात मिल सकती है।
- प्रो. राजेश धनखड़, विभागाध्यक्ष पर्यावरण एवं विज्ञान विभाग, एमडीयू
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