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पीजीआई में डॉक्टरों की हड़ताल खत्म
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 24 Dec 2015 02:25 AM IST
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पीजीआई में सोमवार आधी रात को शुरू हुई डॉक्टरों की हड़ताल मंगलवार रात
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तीन बजे खत्म हो गई। हड़ताली डॉक्टर वीसी डॉ. ओ. पी. कालरा और कुछ वरिष्ठ
डॉक्टरों के साथ हुई आधी रात के बाद शुरू हुई आपात बैठक में अपनी समस्या भी
नहीं रख पाए। एक के बाद एक सभी मांगों का खंडन कर दिया गया और हड़ताल को
बेवजह करार देते हुए काम पर लौटने की चेतावनी दे दी गई।
हड़ताली डॉक्टरों को दो टूक कहा गया कि वे काम पर लौट जाए अन्यथा नियमानुसार होने वाली कार्रवाई के लिए तैयार रहें। पीजीआई सूत्रों के अनुसार कुलपति डॉ. कालरा सोमवार को चंडीगढ़ गए हुए थे।
निदेशक की आपात बैठक के बाद भी हल नहीं निकला तो रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (आरडीए) ने हड़ताल जारी रखते हुए बुधवार सुबह वीसी से मिलने की बात कही। लेकिन वीसी मंगलवार रात को ही संस्थान में पहुंच गए और आरडीए के साथ रात डेढ़ बजे तक बैठक की।
पीजीआई अधिकारियों पर लगातार दबाव था कि हड़ताल खत्म कराई जाए। बैठक में अधिकारियों ने डॉक्टरों से पूछा कि उनकी हड़ताल करने की वजह क्या है। इस पर संसाधनों की कमी और डॉक्टरों की सुरक्षा को मुख्य मुद्दा बताया गया। प्रबंधन की ओर से जवाब दिया गया कि वर्षों पुरानी जरूरतों को चुटकी में पूरा नहीं किया जा सकता है।
जिन युवकों ने डॉक्टरों के साथ मारपीट की, उन्हें पहले ही जेल भेजा जा चुका है। सभी काम नियमानुसार और समयानुसार होते हैं, इसलिए डॉक्टर बेवजह हड़ताल कर आमजन को क्यों परेशान कर रहे हैं। हड़ताली डॉक्टरों को अधिकारियाें ने दस मिनट का समय दिया और कहा कि वे तय करें कि काम पर लौटेंगे या हड़ताल जारी रखेंगे। यदि हड़ताल जारी रहती है तो कार्रवाई के लिए भी तैयार रहें।
इस पर डॉक्टरों ने विचार विमर्श कर मौके पर ही हड़ताल समाप्त करने का आश्वासन दे दिया और तीन बजे तक अपनी सीटों पर जा कर काम संभाल लिया।
हड़ताली डॉक्टरों को दो टूक कहा गया कि वे काम पर लौट जाए अन्यथा नियमानुसार होने वाली कार्रवाई के लिए तैयार रहें। पीजीआई सूत्रों के अनुसार कुलपति डॉ. कालरा सोमवार को चंडीगढ़ गए हुए थे।
निदेशक की आपात बैठक के बाद भी हल नहीं निकला तो रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (आरडीए) ने हड़ताल जारी रखते हुए बुधवार सुबह वीसी से मिलने की बात कही। लेकिन वीसी मंगलवार रात को ही संस्थान में पहुंच गए और आरडीए के साथ रात डेढ़ बजे तक बैठक की।
पीजीआई अधिकारियों पर लगातार दबाव था कि हड़ताल खत्म कराई जाए। बैठक में अधिकारियों ने डॉक्टरों से पूछा कि उनकी हड़ताल करने की वजह क्या है। इस पर संसाधनों की कमी और डॉक्टरों की सुरक्षा को मुख्य मुद्दा बताया गया। प्रबंधन की ओर से जवाब दिया गया कि वर्षों पुरानी जरूरतों को चुटकी में पूरा नहीं किया जा सकता है।
जिन युवकों ने डॉक्टरों के साथ मारपीट की, उन्हें पहले ही जेल भेजा जा चुका है। सभी काम नियमानुसार और समयानुसार होते हैं, इसलिए डॉक्टर बेवजह हड़ताल कर आमजन को क्यों परेशान कर रहे हैं। हड़ताली डॉक्टरों को अधिकारियाें ने दस मिनट का समय दिया और कहा कि वे तय करें कि काम पर लौटेंगे या हड़ताल जारी रखेंगे। यदि हड़ताल जारी रहती है तो कार्रवाई के लिए भी तैयार रहें।
इस पर डॉक्टरों ने विचार विमर्श कर मौके पर ही हड़ताल समाप्त करने का आश्वासन दे दिया और तीन बजे तक अपनी सीटों पर जा कर काम संभाल लिया।