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मजदूरों और आंगनबाड़ी वर्करों ने किया प्रदर्शन
Rohtak
Updated Sat, 09 Nov 2013 05:44 AM IST
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रोहतक। भवन निर्माण कारीगर मजदूर यूनियन और आंगनबाड़ी वर्कर सहायिका यूनियन ने शहर में प्रदर्शन किया। इसके बाद सदस्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते लघु सचिवालय पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा।
शुक्रवार को दोनों यूनियन के सदस्य मानसरोवर पार्क में एकत्रित हुए। ऑल इंडिया यूटीयूसी के जिला प्रधान जिले सिंह ने कहा कि महंगाई ने जीना मुश्किल कर दिया है। डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस, बिजली के रेट बढ़ा कर सरकार महंगाई बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कीमों में कार्यरत आंगनबाड़ी वर्करों-सहायिकाओं, मिड-डे मील वर्करों आदि को सरकार अपना कर्मचारी नहीं मानती और न ही उन्हें सरकार की ओर से घोषित न्यूनतम मजदूरी दी जाती है। मानदेय भत्ते के नाम से उन्हें मामूली सी रकम दी जाती है। गांवों में चालू दिहाड़ी 350 रुपये है परन्तु मनरेगा मजदूरों को सरकार मात्र 200 रुपये देती है। इसी तरह भवन निर्माण श्रमिकोें के पंजीकरण कराने में श्रम विभाग बाधा डाल रहा है, जिससे ज्यादातर मजदूर-मिस्त्री सरकार द्वारा घोषित आर्थिक सहायता से वंचित हैं।
ज्ञापन में सरकार से मांग की कि सभी को 15000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन, 2500 रुपये मासिक पेंशन, आंगनबाड़ी वर्करों-सहायिकाओं का सेवाकाल 5 वर्ष बढ़ाया जाए, 65 साल की उम्र होने पर रिटायर किया जाए, जिन वर्करों-सहायिकाओं को 60 साल की उम्र में रिटायर कर गया है, उन्हें पुन: सेवा में लिया जाए, भवन निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण सरल करने, जन्म प्रमाण पत्र की शर्त हटाने, सरकार द्वारा घोषित आर्थिक सहायता बढ़ाई जाए, बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए। प्रदर्शनकारियों को भवन निर्माण कारीगर मजदूर यूनियन के जिला सचिव जगदीशचन्द्र, आंगनबाड़ी वर्कर सहायिका यूनियन की राज्य महासचिव पुष्पा दलाल ने भी संबोधित किया।
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शुक्रवार को दोनों यूनियन के सदस्य मानसरोवर पार्क में एकत्रित हुए। ऑल इंडिया यूटीयूसी के जिला प्रधान जिले सिंह ने कहा कि महंगाई ने जीना मुश्किल कर दिया है। डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस, बिजली के रेट बढ़ा कर सरकार महंगाई बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कीमों में कार्यरत आंगनबाड़ी वर्करों-सहायिकाओं, मिड-डे मील वर्करों आदि को सरकार अपना कर्मचारी नहीं मानती और न ही उन्हें सरकार की ओर से घोषित न्यूनतम मजदूरी दी जाती है। मानदेय भत्ते के नाम से उन्हें मामूली सी रकम दी जाती है। गांवों में चालू दिहाड़ी 350 रुपये है परन्तु मनरेगा मजदूरों को सरकार मात्र 200 रुपये देती है। इसी तरह भवन निर्माण श्रमिकोें के पंजीकरण कराने में श्रम विभाग बाधा डाल रहा है, जिससे ज्यादातर मजदूर-मिस्त्री सरकार द्वारा घोषित आर्थिक सहायता से वंचित हैं।
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ज्ञापन में सरकार से मांग की कि सभी को 15000 रुपये मासिक न्यूनतम वेतन, 2500 रुपये मासिक पेंशन, आंगनबाड़ी वर्करों-सहायिकाओं का सेवाकाल 5 वर्ष बढ़ाया जाए, 65 साल की उम्र होने पर रिटायर किया जाए, जिन वर्करों-सहायिकाओं को 60 साल की उम्र में रिटायर कर गया है, उन्हें पुन: सेवा में लिया जाए, भवन निर्माण श्रमिकों का पंजीकरण सरल करने, जन्म प्रमाण पत्र की शर्त हटाने, सरकार द्वारा घोषित आर्थिक सहायता बढ़ाई जाए, बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए। प्रदर्शनकारियों को भवन निर्माण कारीगर मजदूर यूनियन के जिला सचिव जगदीशचन्द्र, आंगनबाड़ी वर्कर सहायिका यूनियन की राज्य महासचिव पुष्पा दलाल ने भी संबोधित किया।
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