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देशभक्ति की अलख जगाएगी भगत सिंह की डायरी : यादवेंद्र
Rohtak
Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
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रेवाड़ी। देशभक्त युवा संगठन के निमंत्रण पर बुधवार को रेवाड़ी आए शहीदे-आजम भगत सिंह के पौत्र यादवेंद्र सिंह संधु ने कहा कि शहीद भगत सिंह की हस्तलिखित डायरी व उनके विचार देश के युवाओं में देशभुक्त की अलख जगाएंगे। विभिन्न संगठनों के सहयोग से उनका परिवार शीघ्र ही इस डायरी को हिंदी अनुवाद के साथ जनता को समर्पित करेगा। उन्होंने कहा कि डायरी में उनके हस्तलिखित विचारों को स्कैन करके हिंदी अनुवाद के साथ लोगों के सामने लाया जाएगा। इस डायरी में भगत सिंह के व्यक्तित्व एवं उनके जीवन दर्शन की झलक मिलेगी। डायरी में शहीदे-आजम के साथ-साथ शहीद बटुकेश्वर दत्त के भी हस्ताक्षर हैं। यह जानकारी उन्होंने कमला पैलेस में दी।
उन्होंने बताया कि यह डायरी 2007 में पंजाब सरकार के सहयोग से भगत सिंह के जन्मशताब्दी के मौके पर पंजाबी में प्रकाशित की जा चुकी है। अब वह हरियाणा में शहीदे आजम व क्रांतिकारियों के लिए कार्य कर रहे विभिन्न युवा संगठनों से मुलाकात भी कर रहे हैं। करनाल और गुड़गांव के बाद रेवाड़ी में उन्हें युवाओं का पूर्ण समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि डायरी में देश की तत्कालीन स्थितियों, इंग्लैंड व भारत के किसानों के बीच की आर्थिक स्थित का अंतर, भारत व अन्य देशों में कानून की स्थिति समेत विभिन्न पहलुओं पर बेबाक विचार रखे गए हैं। उन्होंने बताया कि 404 पृष्ठों की इस डायरी संभवत: मार्च तक प्रकाशित कर दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि शहीदे आजम 716 दिन जेल में रहे और 12 सितंबर 1929 को डायरी लेखन शुरू किया। इस डायरी में बटुकेश्वर दत ने दूसरी जेल में स्थानांतरित होने से पूर्व 12 जुलाई 1930 को हस्ताक्षर किए थे। इस डायरी को लाहौर से शहीदे आजम के भाई सरदार कुलवीर सिंह अपने साथ फरीदाबाद लाए थे और उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे व शहीदे-आजम के भतीजे भावर सिंह संधु ने इसे इसे संभाला। अब उन्होंने इस डायरी के माध्यम से हिंदी में शहीदे- आजम की आवाज को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। इस अवसर पर देशभक्त युवा संगठन के पदाधिकारी ओमबीर, विनोद यादव, राकेश भार्गव, डा. अभय सिंह, दयाराम आर्य, डा. विनोद कुमार, वीर भगत सिंह युवा दल के दिनेश कपूर, नवयुग युवा संगठन के सुधीर ठाकरान, प्रोफेसर अनिरुद्ध, मिलन, सुनील एडवोकेट, रणवीर आदि उपस्थित थे।
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उन्होंने बताया कि यह डायरी 2007 में पंजाब सरकार के सहयोग से भगत सिंह के जन्मशताब्दी के मौके पर पंजाबी में प्रकाशित की जा चुकी है। अब वह हरियाणा में शहीदे आजम व क्रांतिकारियों के लिए कार्य कर रहे विभिन्न युवा संगठनों से मुलाकात भी कर रहे हैं। करनाल और गुड़गांव के बाद रेवाड़ी में उन्हें युवाओं का पूर्ण समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि डायरी में देश की तत्कालीन स्थितियों, इंग्लैंड व भारत के किसानों के बीच की आर्थिक स्थित का अंतर, भारत व अन्य देशों में कानून की स्थिति समेत विभिन्न पहलुओं पर बेबाक विचार रखे गए हैं। उन्होंने बताया कि 404 पृष्ठों की इस डायरी संभवत: मार्च तक प्रकाशित कर दी जाएगी।
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उन्होंने बताया कि शहीदे आजम 716 दिन जेल में रहे और 12 सितंबर 1929 को डायरी लेखन शुरू किया। इस डायरी में बटुकेश्वर दत ने दूसरी जेल में स्थानांतरित होने से पूर्व 12 जुलाई 1930 को हस्ताक्षर किए थे। इस डायरी को लाहौर से शहीदे आजम के भाई सरदार कुलवीर सिंह अपने साथ फरीदाबाद लाए थे और उनकी मृत्यु के बाद उनके बेटे व शहीदे-आजम के भतीजे भावर सिंह संधु ने इसे इसे संभाला। अब उन्होंने इस डायरी के माध्यम से हिंदी में शहीदे- आजम की आवाज को जन-जन तक पहुंचाने का बीड़ा उठाया है। इस अवसर पर देशभक्त युवा संगठन के पदाधिकारी ओमबीर, विनोद यादव, राकेश भार्गव, डा. अभय सिंह, दयाराम आर्य, डा. विनोद कुमार, वीर भगत सिंह युवा दल के दिनेश कपूर, नवयुग युवा संगठन के सुधीर ठाकरान, प्रोफेसर अनिरुद्ध, मिलन, सुनील एडवोकेट, रणवीर आदि उपस्थित थे।
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