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सीताराम सचदेवा की प्रैसवार्ता.......
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शहर की सियासत : हुड्डा समर्थक मेयर प्रत्याशी सीताराम सचदेवा ने कहा-
हेडिंग : पहले कांग्रेसी, फिर हुड्डा का सिपाही, चुनाव चिन्ह न मिलने से मिली मात
: समय कम मिलने से नहीं कर पाए पूरे शहर में प्रचार, फिर भी मिले 50 हजार से ज्यादा वोट
: मंत्री ने कैंप में दिखाई दबंगई, कुर्सी डालकर बैठ गए मतदान केंद्र के बाहर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नगर निगम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मनमोहन गोयल से हारने वाले हुड्डा समर्थक कांग्रेस प्रत्याशी सीताराम सचदेवा का दर्द अब तक कम नहीं हुआ है। सीताराम का कहना है कि उनकी हार का अहम कारण पार्टी के चुनाव चिन्ह पर न लड़ना और प्रचार में कमी रही। अगर कांग्रेस के बड़े नेता खुलकर प्रचार करते तो नतीजा दूसरा होता। वे पहले कांग्रेसी और फिर पूर्व सीएम हुड्डा के सिपाही हैं। वे मंगलवार को कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
सीताराम ने कहा कि छह दिसंबर तक नामांकन दाखिल करना था। एक दिन पहले उनको मेयर चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए हरी झंडी मिली। इसके बाद 14 दिसंबर तक ही वे प्रचार कर सके। समय कम होने के कारण पूरे शहर में मतदाताओं तक नहीं पहुंच सके। इसके बावजूद शहर के हर कोने से उनको वोट मिले हैं। चुनाव में हार के कारण पर सीताराम सचदेवा ने कहा कि पार्टी का चुनाव चिन्ह न मिलना, प्रचार में समय का अभाव, बड़े नेताओं का खुलकर प्रचार न करना अहम वजह रही। दूसरा, गांधी कैंप के अंदर खुद सहकारिता मंत्री लाव लश्कर के साथ घूमते रहे। एक मतदान केंद्र के बाहर ही जमकर बैठ गए। इसका असर मतदाताओं पर पड़ा।
बाक्स
: पार्टी ने विश्वास जताया तो लडूंगा विधानसभा चुनाव
एक सवाल के जवाब में सीताराम सचदेवा ने कहा कि वे कांग्रेसी पहले और हुड्डा के सिपाही बाद में हैं। क्योंकि पार्टी ही सर्वोपरि है। पूर्व सीएम हुड्डा भी पार्टी के सिपाही हैं। अगर पार्टी ने विश्वास व्यक्त किया तो विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं। शहर के लोगों की दुख व तकलीफ में साथ रहूंगा। उनके लिए जो भी काम होगा, कराने का प्रयास करेंगे।
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18 दावेदारों में कुछ साथ नजर आए, कुछ नहीं
पूर्व सीएम से पहले 32 और दिल्ली जाकर करीब 18 समर्थकों ने मेयर का चुनाव लड़ने के लिए आशीर्वाद मांगा था। हुड्डा ने सीताराम सचदेवा को आशीर्वाद देकर मैदान में उतारा। हार के बाद जब सीताराम से पूछा गया कि 18 दावेदारों ने उनका कितना सहयोग किया। इस पर सचदेवा ने कहा कि कुछ साथ प्रचार कर रहे थे, जबकि कुछ नजर नहीं आए। फिर भी सभी ने मिलकर सहयोग किया। इसके बावजूद हार के सवाल पर कहा कि हार तो वोटर के कारण मिली है।
आयोग कार्रवाई करे, नहीं तो जाएंगे अदालत
सीताराम ने कहा कि ओल्ड आईटीआई मैदान में सीएम ने उनकी तरफ इशारा करते हुए टिप्पणी की। इसको लेकर डीसी व चुनाव आयोग को शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वे मामले को लेकर अदालत में जाएंगे।
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शहर की सियासत : हुड्डा समर्थक मेयर प्रत्याशी सीताराम सचदेवा ने कहा-
हेडिंग : पहले कांग्रेसी, फिर हुड्डा का सिपाही, चुनाव चिन्ह न मिलने से मिली मात
: समय कम मिलने से नहीं कर पाए पूरे शहर में प्रचार, फिर भी मिले 50 हजार से ज्यादा वोट
: मंत्री ने कैंप में दिखाई दबंगई, कुर्सी डालकर बैठ गए मतदान केंद्र के बाहर
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। नगर निगम चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मनमोहन गोयल से हारने वाले हुड्डा समर्थक कांग्रेस प्रत्याशी सीताराम सचदेवा का दर्द अब तक कम नहीं हुआ है। सीताराम का कहना है कि उनकी हार का अहम कारण पार्टी के चुनाव चिन्ह पर न लड़ना और प्रचार में कमी रही। अगर कांग्रेस के बड़े नेता खुलकर प्रचार करते तो नतीजा दूसरा होता। वे पहले कांग्रेसी और फिर पूर्व सीएम हुड्डा के सिपाही हैं। वे मंगलवार को कांग्रेस कार्यालय में मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
सीताराम ने कहा कि छह दिसंबर तक नामांकन दाखिल करना था। एक दिन पहले उनको मेयर चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के लिए हरी झंडी मिली। इसके बाद 14 दिसंबर तक ही वे प्रचार कर सके। समय कम होने के कारण पूरे शहर में मतदाताओं तक नहीं पहुंच सके। इसके बावजूद शहर के हर कोने से उनको वोट मिले हैं। चुनाव में हार के कारण पर सीताराम सचदेवा ने कहा कि पार्टी का चुनाव चिन्ह न मिलना, प्रचार में समय का अभाव, बड़े नेताओं का खुलकर प्रचार न करना अहम वजह रही। दूसरा, गांधी कैंप के अंदर खुद सहकारिता मंत्री लाव लश्कर के साथ घूमते रहे। एक मतदान केंद्र के बाहर ही जमकर बैठ गए। इसका असर मतदाताओं पर पड़ा।
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: पार्टी ने विश्वास जताया तो लडूंगा विधानसभा चुनाव
एक सवाल के जवाब में सीताराम सचदेवा ने कहा कि वे कांग्रेसी पहले और हुड्डा के सिपाही बाद में हैं। क्योंकि पार्टी ही सर्वोपरि है। पूर्व सीएम हुड्डा भी पार्टी के सिपाही हैं। अगर पार्टी ने विश्वास व्यक्त किया तो विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए तैयार हूं। शहर के लोगों की दुख व तकलीफ में साथ रहूंगा। उनके लिए जो भी काम होगा, कराने का प्रयास करेंगे।
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18 दावेदारों में कुछ साथ नजर आए, कुछ नहीं
पूर्व सीएम से पहले 32 और दिल्ली जाकर करीब 18 समर्थकों ने मेयर का चुनाव लड़ने के लिए आशीर्वाद मांगा था। हुड्डा ने सीताराम सचदेवा को आशीर्वाद देकर मैदान में उतारा। हार के बाद जब सीताराम से पूछा गया कि 18 दावेदारों ने उनका कितना सहयोग किया। इस पर सचदेवा ने कहा कि कुछ साथ प्रचार कर रहे थे, जबकि कुछ नजर नहीं आए। फिर भी सभी ने मिलकर सहयोग किया। इसके बावजूद हार के सवाल पर कहा कि हार तो वोटर के कारण मिली है।
आयोग कार्रवाई करे, नहीं तो जाएंगे अदालत
सीताराम ने कहा कि ओल्ड आईटीआई मैदान में सीएम ने उनकी तरफ इशारा करते हुए टिप्पणी की। इसको लेकर डीसी व चुनाव आयोग को शिकायत की, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वे मामले को लेकर अदालत में जाएंगे।