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राम रहीम को नहीं आता कोई काम, जेल में करनी पड़ेगी मजदूरी
Updated Wed, 30 Aug 2017 01:52 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक। आलीशान डेरे में जिंदगी बिताने वाले डेरा प्रमुख को अब जेल में मजदूरी करनी पड़ेगी। जीविका चलाने के लिए किसी भी काम में निपुण नहीं होने के कारण राम रहीम को जेल में माली का काम सौंपा जा सकता है। जेल में तीन श्रेणियों में कैदियों को काम दिया जाता है। इसी के तहत राम रहीम को माली का काम सौंपा जाएगा।
दरअसल, जेल में कैदियों को तीन श्रेणियों के तहत काम के लिए चुना जाता है। पहली श्रेणी के तहत यदि कोई कैदी पहले से ही किसी काम को करने में निपुण है, जैसे बाल काटना, पेंटिंग बनाना सहित अन्य। ऐसे में जेल के नियमानुसार कैदी को वह काम ही दिया जाता है जिसमें वह निपुण होता है। इसकी एक दिन की मजदूरी 40 रुपये होती है। दूसरी श्रेणी में ऐसे कैदी होते हैं जिन्हें कोई काम थोड़ा थोड़ा आता है। उसे ज्यादा सिखाने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे कैदी को वह काम ही दिया जाता है, जिसके बारे में उसे पता होता है। इसके लिए कैदी को एक दिन की 35 रुपये मजदूरी मिलती है। तीसरी श्रेणी में उन कैदियों को शामिल किया जाता है जिन्हें जीविका चलाने के लिए कोई भी काम नहीं आता। ऐसे कैदी को घास काटने, पौधों में पानी डालने सहित मजदूरी के काम में लगा दिया जाता है। इन्हें एक दिन में 20 रुपये मजदूरी मिलती है।
अब मखमली गद्दों पर सोने वाले राम रहीम को कोई भी ऐसा काम नहीं आता है, जिसे वह जेल में कर सके। वह नियमानुसार तीसरी श्रेणी में आता है। ऐसे में उसे मजदूरी करके ही गुजारा करना पड़ेगा। एक दिन की मजदूरी के लिए उसे 20 रुपये मेहनताना मिलेगा।
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डेरा प्रमुख ने खाई एक रोटी
वहीं, सलाखों के पीछे जाने के बाद डेरा प्रमुख की नींद और भूख दोनों चली गई है। उसने सोमवार रात को जेल में एक रोटी खाई। जबकि उसे सब्जी के साथ चार रोटी दी गई थी। सुबह चाय पीने के बाद शाम तक कुछ नहीं खाया। वह रात भर बैरक में घूमता रहा।
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रोहतक। आलीशान डेरे में जिंदगी बिताने वाले डेरा प्रमुख को अब जेल में मजदूरी करनी पड़ेगी। जीविका चलाने के लिए किसी भी काम में निपुण नहीं होने के कारण राम रहीम को जेल में माली का काम सौंपा जा सकता है। जेल में तीन श्रेणियों में कैदियों को काम दिया जाता है। इसी के तहत राम रहीम को माली का काम सौंपा जाएगा।
दरअसल, जेल में कैदियों को तीन श्रेणियों के तहत काम के लिए चुना जाता है। पहली श्रेणी के तहत यदि कोई कैदी पहले से ही किसी काम को करने में निपुण है, जैसे बाल काटना, पेंटिंग बनाना सहित अन्य। ऐसे में जेल के नियमानुसार कैदी को वह काम ही दिया जाता है जिसमें वह निपुण होता है। इसकी एक दिन की मजदूरी 40 रुपये होती है। दूसरी श्रेणी में ऐसे कैदी होते हैं जिन्हें कोई काम थोड़ा थोड़ा आता है। उसे ज्यादा सिखाने की जरूरत नहीं पड़ती। ऐसे कैदी को वह काम ही दिया जाता है, जिसके बारे में उसे पता होता है। इसके लिए कैदी को एक दिन की 35 रुपये मजदूरी मिलती है। तीसरी श्रेणी में उन कैदियों को शामिल किया जाता है जिन्हें जीविका चलाने के लिए कोई भी काम नहीं आता। ऐसे कैदी को घास काटने, पौधों में पानी डालने सहित मजदूरी के काम में लगा दिया जाता है। इन्हें एक दिन में 20 रुपये मजदूरी मिलती है।
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अब मखमली गद्दों पर सोने वाले राम रहीम को कोई भी ऐसा काम नहीं आता है, जिसे वह जेल में कर सके। वह नियमानुसार तीसरी श्रेणी में आता है। ऐसे में उसे मजदूरी करके ही गुजारा करना पड़ेगा। एक दिन की मजदूरी के लिए उसे 20 रुपये मेहनताना मिलेगा।
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डेरा प्रमुख ने खाई एक रोटी
वहीं, सलाखों के पीछे जाने के बाद डेरा प्रमुख की नींद और भूख दोनों चली गई है। उसने सोमवार रात को जेल में एक रोटी खाई। जबकि उसे सब्जी के साथ चार रोटी दी गई थी। सुबह चाय पीने के बाद शाम तक कुछ नहीं खाया। वह रात भर बैरक में घूमता रहा।