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लाखनमाजरा भगत
Updated Thu, 22 Mar 2018 02:36 AM IST
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यादुवेन्द्र सिंह संधू भगत सिंह की जेल डायरी का करवाएंगे हिन्दी अनुवाद
‘डायरी में लिखे भगत सिंह के क्रांतिकारी विचार पढ़कर देशवासी गाएंगे मेरा रंग दे बसंती चोला’
कृष्ण सिवाच
लाखनमाजरा।
इंकलाब जिन्दाबाद, वन्दे मातरम, रंग दे बसंती चोला की गूंज लोगों के कानों तक पहुंचाने वाले शहीदे आजम भगत सिंह के इन नारों की गूंज भले ही अब सुनाई ना देती हो लेकिन उनकी जेल में लिखी डायरी अब जल्द ही हिन्दुस्तान की आम जनता को पढ़ने के लिए मिलने वाली है और वो भी हिन्दी में।
यह जानकारी देते हुए खण्ड के गांव चिड़ी निवासी समाजसेवी एवं शहीद भगत सिंह ब्रिगेड के जिला रोहतक प्रभारी सुनील दलाल ने बताया कि शहीद भगत सिंह ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शहीद भगत के वंशज उनके पौत्र यादुवेन्द्र सिंह संघू के पास फरीदाबाद जाने का मौका मिला तो उन्होंने बताया कि मेरे पास शहीद भगत द्वारा जेल में लिखी डायरी है जिसे में एक क्रांति ग्रंथ के रूप में सहेज कर रख रहा हूं। शहीद भगत सिंह द्वारा लिखी गई डायरी को दिखाते हुए बताया कि मेरे पास जो अनमोल धरोहर है इसे जल्द ही हिन्दी में प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भगत सिंह द्वारा लिखी गई डायरी अंग्रेजी व उर्दू में लिखी गई है। जिसे आम जनता के लिए हिंदी रूपांतरण कर जल्द ही बांटा जाएगा। उन्होंने बताया कि 12 सितम्बर 1929 को भगत सिंह ने इस डायरी को लिखने की शुरूआत की और यह हमेशा भगत सिंह के साथ लाहौर जेल की काल कोठरी में भी उनका साथ देती है। सुनील दलाल ने बताया कि यादुवेन्द्र सिंह संधू का कहना है कि देश, समाज व प्रजातंत्र के प्रति भगत के विचार इस डायरी में लिखे गए हैं। डायरी में भगत सिंह ने बाल मजदूरी व प्रजातंत्र को कैसे कामयाब किया जाए आदि के बारे में विस्तार से लिखा गया है। डायरी में भगत सिंह का वैचारिक दृष्टिकोण देखने को मिलता है। जिसका हिंदी अनुवाद प्रकाशन करवा कर जल्द देशवासियों के सामने लाया जाएगा। ताकि देश वासी भगत सिंह के बारे में जान सकें। सुनील दलाल ने बताया कि भगत सिंह के पौत्र जल्द ही डायरी को बिना किसी बदलाव के हिन्दी अनुवाद करवा कर देशवासियों को समर्पित करेंगे। उन्होंने बताया कि भगत सिंह द्वारा हाथ से लिखा हुआ भी डायरी में इसी तरह से लिखा होगा उनकी हस्तलिखित बातों को भी डायरी के एक तरफ ऐसे ही छापा जाएगा।
फोटो :3 फरीदाबाद में भगत सिंह के पौत्र यादुवेन्द्र के घर जेल में लिखी डायरी को देखते सुनील दलाल।
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‘डायरी में लिखे भगत सिंह के क्रांतिकारी विचार पढ़कर देशवासी गाएंगे मेरा रंग दे बसंती चोला’
कृष्ण सिवाच
लाखनमाजरा।
इंकलाब जिन्दाबाद, वन्दे मातरम, रंग दे बसंती चोला की गूंज लोगों के कानों तक पहुंचाने वाले शहीदे आजम भगत सिंह के इन नारों की गूंज भले ही अब सुनाई ना देती हो लेकिन उनकी जेल में लिखी डायरी अब जल्द ही हिन्दुस्तान की आम जनता को पढ़ने के लिए मिलने वाली है और वो भी हिन्दी में।
यह जानकारी देते हुए खण्ड के गांव चिड़ी निवासी समाजसेवी एवं शहीद भगत सिंह ब्रिगेड के जिला रोहतक प्रभारी सुनील दलाल ने बताया कि शहीद भगत सिंह ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शहीद भगत के वंशज उनके पौत्र यादुवेन्द्र सिंह संघू के पास फरीदाबाद जाने का मौका मिला तो उन्होंने बताया कि मेरे पास शहीद भगत द्वारा जेल में लिखी डायरी है जिसे में एक क्रांति ग्रंथ के रूप में सहेज कर रख रहा हूं। शहीद भगत सिंह द्वारा लिखी गई डायरी को दिखाते हुए बताया कि मेरे पास जो अनमोल धरोहर है इसे जल्द ही हिन्दी में प्रकाशित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि भगत सिंह द्वारा लिखी गई डायरी अंग्रेजी व उर्दू में लिखी गई है। जिसे आम जनता के लिए हिंदी रूपांतरण कर जल्द ही बांटा जाएगा। उन्होंने बताया कि 12 सितम्बर 1929 को भगत सिंह ने इस डायरी को लिखने की शुरूआत की और यह हमेशा भगत सिंह के साथ लाहौर जेल की काल कोठरी में भी उनका साथ देती है। सुनील दलाल ने बताया कि यादुवेन्द्र सिंह संधू का कहना है कि देश, समाज व प्रजातंत्र के प्रति भगत के विचार इस डायरी में लिखे गए हैं। डायरी में भगत सिंह ने बाल मजदूरी व प्रजातंत्र को कैसे कामयाब किया जाए आदि के बारे में विस्तार से लिखा गया है। डायरी में भगत सिंह का वैचारिक दृष्टिकोण देखने को मिलता है। जिसका हिंदी अनुवाद प्रकाशन करवा कर जल्द देशवासियों के सामने लाया जाएगा। ताकि देश वासी भगत सिंह के बारे में जान सकें। सुनील दलाल ने बताया कि भगत सिंह के पौत्र जल्द ही डायरी को बिना किसी बदलाव के हिन्दी अनुवाद करवा कर देशवासियों को समर्पित करेंगे। उन्होंने बताया कि भगत सिंह द्वारा हाथ से लिखा हुआ भी डायरी में इसी तरह से लिखा होगा उनकी हस्तलिखित बातों को भी डायरी के एक तरफ ऐसे ही छापा जाएगा।
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फोटो :3 फरीदाबाद में भगत सिंह के पौत्र यादुवेन्द्र के घर जेल में लिखी डायरी को देखते सुनील दलाल।