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सालभर का कारोबार 16 लाख और दो माह का बिल सात करोड़ के लगभग
Updated Thu, 21 Dec 2017 03:01 AM IST
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सालभर का कारोबार 16 लाख का, दो माह का बिल सात करोड़ का
- पहले भी 1600 की जगह 7 लाख के बिल का आ चुका है मामला
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
बिजली विभाग के कारनामे से नट बोल्ट की फैक्ट्री संचालक की नींद गायब है। विभाग ने पहले तो उसे बिल नहीं भेजा और जब उसने डुप्लीकेट बिल निकलवाया तो उसके होश उड़े हैं। विभागीय अधिकारी का तर्क है कि दो लाख उपभोक्ता हैं, तो गलती हो ही जाती है। उन्होंने विभागीय लोगों को निर्देश दे रखा है कि इस तरह की लापरवाही न हो।
मामला लाढौत रोड पर नट बोल्ट बनाने की एक फैक्ट्री है। उसके संचालक बलराम सैनी का कहना है कि उनकी छोटी सी फैक्ट्री में तीन अलग-अलग मीटर लगे हैं। जिनके बिल वह समय पर जमा करते हैं। दो माह बीत जाने पर जिसका बिल नहीं आता वह खुद जा कर उसकी प्रति निकलवा कर बिल समय पर जमा कराता है। उसी का असर है कि विभाग ने उसके बिल को 9 हजार रुपये की जगह 6 करोड़ 64 लाख 76 हजार 410 रुपया बना दिया। पिछला बिल उसने 9 हजार रुपये का जमा किया था। उसने बताया कि उसका साल भर का कुल कारोबार 15 से 16 लाख रुपये के बीच में होता है। इससे पहले एक मिस्त्री का बिल 1600 की जगह सात लाख रुपया आया था।
शहर में 2 लाख उपभोक्ता हैं। इस तरह की लापरवाही न हो इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। जिसका बिल अधिक आया है उसे ठीक कराया जाएगा।
- सुरेश बंसल अधीक्षण अभियंता बिजली विभाग रोहतक।
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- पहले भी 1600 की जगह 7 लाख के बिल का आ चुका है मामला
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
बिजली विभाग के कारनामे से नट बोल्ट की फैक्ट्री संचालक की नींद गायब है। विभाग ने पहले तो उसे बिल नहीं भेजा और जब उसने डुप्लीकेट बिल निकलवाया तो उसके होश उड़े हैं। विभागीय अधिकारी का तर्क है कि दो लाख उपभोक्ता हैं, तो गलती हो ही जाती है। उन्होंने विभागीय लोगों को निर्देश दे रखा है कि इस तरह की लापरवाही न हो।
मामला लाढौत रोड पर नट बोल्ट बनाने की एक फैक्ट्री है। उसके संचालक बलराम सैनी का कहना है कि उनकी छोटी सी फैक्ट्री में तीन अलग-अलग मीटर लगे हैं। जिनके बिल वह समय पर जमा करते हैं। दो माह बीत जाने पर जिसका बिल नहीं आता वह खुद जा कर उसकी प्रति निकलवा कर बिल समय पर जमा कराता है। उसी का असर है कि विभाग ने उसके बिल को 9 हजार रुपये की जगह 6 करोड़ 64 लाख 76 हजार 410 रुपया बना दिया। पिछला बिल उसने 9 हजार रुपये का जमा किया था। उसने बताया कि उसका साल भर का कुल कारोबार 15 से 16 लाख रुपये के बीच में होता है। इससे पहले एक मिस्त्री का बिल 1600 की जगह सात लाख रुपया आया था।
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शहर में 2 लाख उपभोक्ता हैं। इस तरह की लापरवाही न हो इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दिया गया है। जिसका बिल अधिक आया है उसे ठीक कराया जाएगा।
- सुरेश बंसल अधीक्षण अभियंता बिजली विभाग रोहतक।