फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Rohtak News ›   टूटी खिड़की, जर्जर कमरे, कैसे हो पढ़ाई

टूटी खिड़की, जर्जर कमरे, कैसे हो पढ़ाई

Tue, 04 Jul 2017 12:04 AM IST
Updated Tue, 04 Jul 2017 12:04 AM IST
विज्ञापन
टूटी खिड़की, जर्जर कमरे, कैसे हो पढ़ाई
टूटी खिड़की, जर्जर कमरे, कैसे हो पढ़ाई
विज्ञापन

सुदेश कुमार
नारनौल। प्रख्यात बुद्धिमान अकबर के नवरत्नों में से शामिल एक बीरबल की नगरी नारनौल में शिक्षा का हाल बेहाल होता जा रहा है। यहां पर कोई भी उच्च शिक्षण संस्थान नहीं हैं, जहां पर जाकर यहां के युवा शिक्षा ग्रहण कर सकें। जो शिक्षण संस्थान हैं, उनका हाल बेहाल है। कालेजों में 15 जुलाई से नए शैक्षणिक सत्र की शुरूआत हो रही है। जबकि जिले के सबसे पुराने राजकीय पीजी कालेज में सुविधाओं की दरकार बनी हुई है। यहां पर स्टाफ से लेकर बच्चों के बैठने के लिए डेस्कों की भी कमी है। ऐसे में विद्यार्थी कैसे पढ़ पाएंगे। इसकी विद्यार्थियों को अभी से चिंता सताने लगी है। यहां 4800 बच्चों पर केवल 50 ही कमरे पढ़ाई के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं।
1953 में राजकीय महाविद्यालय नारनौल बना था। उस समय पुराने पंजाब के बहुत कम शहरों में यह सुविधा उपलब्ध हुई थी। यहां तक कि गुड़गांव में भी राजकीय महाविद्यालय नहीं था। इसके बाद बने भिवानी, जींद, हिसार, सिरसा, करनाल, मुरथल व फरीदाबाद आदि को विश्वविद्यालय मिल चुका है। जिला महेंद्रगढ़ को भी कुछ वर्षों पूर्व केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में एक सौगात मिली है। परंतु नारनौल में अभी तक कोई राजकीय इंजीनियरिंग कालेज, मेडिकल कालेज, प्रबंध संस्थान, खेल संस्थान तथा यहां कोई भी ऐसी विशिष्ट महिला शिक्षण संस्था नहीं है। जिसके कारण यहां शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता बहुत आवश्यक है। वहीं जो उच्च संस्थान के रूप में पीजी कालेज हैं, वहां भी हालत ठीक नहीं है।
विज्ञापन


कालेज में हजारों बच्चों पर केवल 15 रेगुलर प्राध्यापक
राजकीय कालेज में इस सत्र में हजारों बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जबकि अभी नए सत्र में भी विद्यार्थियों की संख्या बढ़ेगी। परंतु हजारों विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए मात्र 15 का ही रेगुलर स्टाफ है। नये सत्र में भी रेगुलर स्टाफ के लगने की भी कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही। ऐसे में विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई की समस्या ज्यादा बढ़ जाएगी। इन 15 प्राध्यापकों के अलावा कालेज में कुछ प्राध्यापक अनुबंध के आधार पर भी लगाए गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


भवन हो चुका खंडहर, दीमक ने भी चाटा
कालेज का 63 साल पुराना 80 कमरों का भवन खंडहर होता जा रहा है। कालेज के पुराने भवन के कमरों की हालत बहुत ही खराब हो गई है। कई कमरों के फर्नीचर को दीमक चाट गई है। वहीं कालेज में बनी साइंस लैब के कमरे भी खंडहर होते जा रहे हैं, जहां पर बच्चे जाने से डरने लगे हैं।

80 कमरे नहीं हैं विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त
यहां के कालेज के पुराने भवन में 80 कमरे हैं। जिनमें 15 के करीब कमरों में प्राचार्य आफिस, स्टाफ रूम, कंप्यूटर रूम, क्लर्क रूम सहित अनेक रूम बने हुए हैं। वहीं दस कमरों में विभिन्न लैब आदि भी हैं। ऐसे में स्टूडेंट की पढ़ाई के लिए करीब 50 ही कमरे बनते हैं। ऐसे में ये कमरे बच्चों के बैठने के लिए काफी नहीं है। इनके अलावा नए भवन में बने 15 कमरों में से भी दो से तीन कमरे कालेज के कार्यालय व अन्य कामों में प्रयुक्त हो रहे हैं।


कालेज की जर्जर बिल्डिंग के सुधार के लिए कई बार लिखित रूप से बीएंडआर विभाग को सूचित किया जा चुका है, परंतु विभाग इस कोई ध्यान नहीं दे रहा है। वहीं कालेज में सुविधाएं बढ़ाने के लिए सरकार व उच्चतर शिक्षा विभाग के अधिकारियों को अवगत करवाया गया है। जल्द ही सुविधाओं में सुधार किया जाएगा।
- एनएन यादव, कार्यवाहक प्राचार्य, पीजी कालेज नारनौल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed