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एक्सईएन बोले,ज्यादा बारिश हुई तो लोगों को होगी परेशानी
Updated Mon, 03 Jul 2017 01:07 AM IST
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एक्सईएन बोले, ज्यादा बारिश हुई तो लोगों को होगी परेशानी
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
मौसम विभाग इस बार जहां मानसून सत्र में खूब बारिश की उम्मीद जता रहा है। वहीं शहर में इससे निपटने के कोई प्रबंध नहीं है। जन स्वास्थ्य विभाग ने कम बरसात से निपटने के तो प्रबंध कर लिए हैं अगर बारिश ज्यादा हुई तो विभाग भी अपने हाथ खड़े कर देगा। दोनों एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से आगे पानी निकासी का प्रबंध नहीं होने से विभागीय अधिकारियों के पास तैयारी का कोई विकल्प फिलहाल मौजूद नहीं है। ऐसे में खुद विभागीय अधिकारी ज्यादा बरसात होने पर शहर में जलभराव के आसार होने का तर्क दे रहे हैं। इसके अलावा विभाग ने जो प्लानिंग तैयार की है उसके तहत बरसात का पानी शहर से बाहर निकलने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसका कारण विभाग के पास पानी निकालने के लिए कोई जगह होना नहीं है। ऐसे में अगर मानसून सत्र में जमकर बारिश होने पर शहर का डूबना तय है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जून माह में हुई बारिश ने पिछले करीब नौ सालों का रिकॉर्ड इस बार तोड़ा है। इस बार करीब 200 एमएम बरसात जून माह में हुई है जबकि इससे पहले 2008 के जून माह में 246 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। प्री-मानसून की बरसात ठीकठाक होने से मौसम विभाग की ज्यादा बारिश की भविष्यवाणी भी सच होती नजर आ रही है। अगर इस बार ज्यादा बरसात हुई तो पानी निकासी के लिए कोई पुख्ता प्रबंध नहीं होने से शहरवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जन स्वास्थ्य विभाग ने जलभराव से संबंधित 10 बिंदुओं की सूची तैयार कर यहां कुछ व्यवस्थाएं तो की हैं, लेकिन ये व्यवस्थाएं ज्यादा बरसात होने पर कारगर साबित नहीं होंगी। जन स्वास्थ्य विभाग ने पांच पंप सैट व पांच डीजल सैट को शहर की इन जगहों पर पानी उठान के लिए लगा दिया है। इतना ही नहीं यहां दो शिफ्टों में कर्मचारियों की भी तैनाती की गई है।
जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन के अनुसार कॉलोनियों, गलियों व सड़कों से बरसाती पानी की निकासी शहर के पांच अलग-अलग जोहड़ों में की जाएगी। इसके बाद जोहड़ के ओवरफ्लो होने से पहले इस पानी को सीसीआई परिसर में निकाला जाएगा। एक्सईएन ने दावा किया है कि शहर की जिन दस जगहों पर जलभराव का अनुमान है वहां से 30 से 60 मिनट के अंदर पानी की निकासी कर दी जाएगी। वहीं, एक्सईएन का कहना है कि एसटीपी से आगे पानी निकासी का कोई प्रबंध नहीं होने से ज्यादा बरसात होने पर समस्या पैदा हो सकती है। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि जितनी संभव थी उतनी व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं, इससे आगे खुद विभाग के पास पानी निकासी का कोई विकल्प मौजूद नहीं है।
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बड़ी ड्रेन का प्रोजेक्ट रद्द होना पड़ेगा भारी
सीएम मनोहर लाल खट्टर ने गत सितंबर माह में आयोजित विकास रैली में जिले के साथ-साथ एक बड़ी ड्रेन निर्माण का तोहफा भी क्षेत्रवासियों की झोली में डाला था। सीएम मनोहर लाल की यह घोषणा किसानों के विरोध के चलते सिरे नहीं चढ़ पाई। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने ड्रेन निर्माण के लिए जमीनी देने को लेकर तीन दफा करीब एक दर्जन गांवों के किसानों से मुलाकात भी की लेकिन किसानों ने जगह देने से स्पष्ट इंकार कर दिया। इसके चलते बड़ी ड्रेन प्रोजेक्ट को रद्द करना पड़ा। सीएम की यह घोषणा सिरे नहीं चढ़ने से इस बार लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।
यूपीडी ड्रेन निर्माण का मसला भी ठंडे बस्ते में
बड़ी ड्रेन का प्रोजेक्ट रद्द होने पर सिंचाई विभाग ने यूपीडी (अंडरग्राउंड प्रेशर ड्रेन) का प्रपोजल तैयार किया था। इस प्रपोजल को विभागीय अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों के पास भेजा था। इस पर सरकार ने अभी कोई संज्ञान नहीं लिया है। विभागीय सूत्र ढाकला-सुबाना ड्रेन निर्माण पूरा होने के बाद ही इस पर मंजूरी मिलने की उम्मीद जता रहे हैं। ऐसे में यूपीडी ड्रेन प्रोजेक्ट पर प्रपोजल तैयार होने के बावजूद काम शुरू नहीं होना भी लोगों की समस्याएं बढ़ाएगा।
35 अतिरिक्त कर्मचारियों को किया है नियुक्त
जन स्वास्थ्य विभाग ने ज्यादा बरसात होने पर बिगड़ने वाली सीवरेज व्यवस्था पर काबू पाने के लिए कुछ तैयारियां भी की है। विभागीय अधिकारियों ने जलभराव की समस्या से छुटकारा दिलाने के डीजल सैट व पंप सैट रखने के साथ यहां अतिरिक्त कर्मचारी भी तैनात कर दिए हैं। विभागीय अधिकारी अब तक दिल्ली रोड एसटीपी, चिड़िया रोड एसटीपी, तिकोना पार्क, सिविल अस्पताल के बैक साइड व घिकाड़ा मोड़ पर जनरेटर सैट लगवा चुके हैं। इसके अलावा सीवरेज ब्लॉक की समस्या के निदान के लिए भी अलग से टीमें गठित की गई हैं। पंप सैट व जन सैट पर विभागीय अधिकारियों ने 35 कर्मचारियों को तैनात किया है जोकि दो शिफ्टों में यहां ड्यूटी देंगे।
बाक्स: पिछले कुछ सालों में जून माह में हुई बरसात के आंकड़े
जून 2017- 128 एमएम
जून 2016- 78 एमएम
जून 2015- 48 एमएम
जून 2014- 41 एमएम
जून 2013- 10 एमएम
जून 2012- 06 एमएम
जून 2011- 08 एमएम
जून 2010- 12 एमएम
जून 2009- 37 एमएम
जून 2008- 246 एमएम
सीसीआई के बाद नहीं हो पाएगी पानी की निकासी
विभाग ने बाढ़ से बचने के लिए जो रूट चार्ट तैयार किया है उसके मुताबिक बरसाती पानी सदर थाना के बैक साइड वाली खाड़ी में, श्यामेसर तालाब में, मुथुरी घाटी में सहित दो अन्य जोहड़ों में डाला जाएगा। इसके बाद इन्हें खाली किया जाएगा और यहां के पानी की निकासी सीसीआई परिसर में की जाएगी। इसके बाद पानी निकासी के लिए फिलहाल कोई व्यवस्था विभाग नहीं कर पा रहा है।
वर्जन:
हमने दस ऐसे प्वाइंट चयनित किए हैं जहां जलभराव हो सकता हैं। इन जगहों पर हमने डीजी सैट व पंप सैट रखवाकर कर्मचारियों को यहां नियुक्त कर दिया है। सामान्य से अगर थोड़ी अधिक भी बरसात होती है तो कोई परेशानी नहीं होगी और अगर बारिश ज्यादा हुई तो कुछ हद तक लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं। हम जल्द पानी निकासी की अन्य व्यवस्थाएं भी कर देंगे।
जितेंद्र हुड्डा, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
मौसम विभाग इस बार जहां मानसून सत्र में खूब बारिश की उम्मीद जता रहा है। वहीं शहर में इससे निपटने के कोई प्रबंध नहीं है। जन स्वास्थ्य विभाग ने कम बरसात से निपटने के तो प्रबंध कर लिए हैं अगर बारिश ज्यादा हुई तो विभाग भी अपने हाथ खड़े कर देगा। दोनों एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से आगे पानी निकासी का प्रबंध नहीं होने से विभागीय अधिकारियों के पास तैयारी का कोई विकल्प फिलहाल मौजूद नहीं है। ऐसे में खुद विभागीय अधिकारी ज्यादा बरसात होने पर शहर में जलभराव के आसार होने का तर्क दे रहे हैं। इसके अलावा विभाग ने जो प्लानिंग तैयार की है उसके तहत बरसात का पानी शहर से बाहर निकलने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसका कारण विभाग के पास पानी निकालने के लिए कोई जगह होना नहीं है। ऐसे में अगर मानसून सत्र में जमकर बारिश होने पर शहर का डूबना तय है।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जून माह में हुई बारिश ने पिछले करीब नौ सालों का रिकॉर्ड इस बार तोड़ा है। इस बार करीब 200 एमएम बरसात जून माह में हुई है जबकि इससे पहले 2008 के जून माह में 246 एमएम बारिश दर्ज की गई थी। प्री-मानसून की बरसात ठीकठाक होने से मौसम विभाग की ज्यादा बारिश की भविष्यवाणी भी सच होती नजर आ रही है। अगर इस बार ज्यादा बरसात हुई तो पानी निकासी के लिए कोई पुख्ता प्रबंध नहीं होने से शहरवासियों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। जन स्वास्थ्य विभाग ने जलभराव से संबंधित 10 बिंदुओं की सूची तैयार कर यहां कुछ व्यवस्थाएं तो की हैं, लेकिन ये व्यवस्थाएं ज्यादा बरसात होने पर कारगर साबित नहीं होंगी। जन स्वास्थ्य विभाग ने पांच पंप सैट व पांच डीजल सैट को शहर की इन जगहों पर पानी उठान के लिए लगा दिया है। इतना ही नहीं यहां दो शिफ्टों में कर्मचारियों की भी तैनाती की गई है।
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जनस्वास्थ्य विभाग के एक्सईएन के अनुसार कॉलोनियों, गलियों व सड़कों से बरसाती पानी की निकासी शहर के पांच अलग-अलग जोहड़ों में की जाएगी। इसके बाद जोहड़ के ओवरफ्लो होने से पहले इस पानी को सीसीआई परिसर में निकाला जाएगा। एक्सईएन ने दावा किया है कि शहर की जिन दस जगहों पर जलभराव का अनुमान है वहां से 30 से 60 मिनट के अंदर पानी की निकासी कर दी जाएगी। वहीं, एक्सईएन का कहना है कि एसटीपी से आगे पानी निकासी का कोई प्रबंध नहीं होने से ज्यादा बरसात होने पर समस्या पैदा हो सकती है। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि जितनी संभव थी उतनी व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं, इससे आगे खुद विभाग के पास पानी निकासी का कोई विकल्प मौजूद नहीं है।
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सीएम मनोहर लाल खट्टर ने गत सितंबर माह में आयोजित विकास रैली में जिले के साथ-साथ एक बड़ी ड्रेन निर्माण का तोहफा भी क्षेत्रवासियों की झोली में डाला था। सीएम मनोहर लाल की यह घोषणा किसानों के विरोध के चलते सिरे नहीं चढ़ पाई। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने ड्रेन निर्माण के लिए जमीनी देने को लेकर तीन दफा करीब एक दर्जन गांवों के किसानों से मुलाकात भी की लेकिन किसानों ने जगह देने से स्पष्ट इंकार कर दिया। इसके चलते बड़ी ड्रेन प्रोजेक्ट को रद्द करना पड़ा। सीएम की यह घोषणा सिरे नहीं चढ़ने से इस बार लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं।
यूपीडी ड्रेन निर्माण का मसला भी ठंडे बस्ते में
बड़ी ड्रेन का प्रोजेक्ट रद्द होने पर सिंचाई विभाग ने यूपीडी (अंडरग्राउंड प्रेशर ड्रेन) का प्रपोजल तैयार किया था। इस प्रपोजल को विभागीय अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों के पास भेजा था। इस पर सरकार ने अभी कोई संज्ञान नहीं लिया है। विभागीय सूत्र ढाकला-सुबाना ड्रेन निर्माण पूरा होने के बाद ही इस पर मंजूरी मिलने की उम्मीद जता रहे हैं। ऐसे में यूपीडी ड्रेन प्रोजेक्ट पर प्रपोजल तैयार होने के बावजूद काम शुरू नहीं होना भी लोगों की समस्याएं बढ़ाएगा।
35 अतिरिक्त कर्मचारियों को किया है नियुक्त
जन स्वास्थ्य विभाग ने ज्यादा बरसात होने पर बिगड़ने वाली सीवरेज व्यवस्था पर काबू पाने के लिए कुछ तैयारियां भी की है। विभागीय अधिकारियों ने जलभराव की समस्या से छुटकारा दिलाने के डीजल सैट व पंप सैट रखने के साथ यहां अतिरिक्त कर्मचारी भी तैनात कर दिए हैं। विभागीय अधिकारी अब तक दिल्ली रोड एसटीपी, चिड़िया रोड एसटीपी, तिकोना पार्क, सिविल अस्पताल के बैक साइड व घिकाड़ा मोड़ पर जनरेटर सैट लगवा चुके हैं। इसके अलावा सीवरेज ब्लॉक की समस्या के निदान के लिए भी अलग से टीमें गठित की गई हैं। पंप सैट व जन सैट पर विभागीय अधिकारियों ने 35 कर्मचारियों को तैनात किया है जोकि दो शिफ्टों में यहां ड्यूटी देंगे।
बाक्स: पिछले कुछ सालों में जून माह में हुई बरसात के आंकड़े
जून 2017- 128 एमएम
जून 2016- 78 एमएम
जून 2015- 48 एमएम
जून 2014- 41 एमएम
जून 2013- 10 एमएम
जून 2012- 06 एमएम
जून 2011- 08 एमएम
जून 2010- 12 एमएम
जून 2009- 37 एमएम
जून 2008- 246 एमएम
सीसीआई के बाद नहीं हो पाएगी पानी की निकासी
विभाग ने बाढ़ से बचने के लिए जो रूट चार्ट तैयार किया है उसके मुताबिक बरसाती पानी सदर थाना के बैक साइड वाली खाड़ी में, श्यामेसर तालाब में, मुथुरी घाटी में सहित दो अन्य जोहड़ों में डाला जाएगा। इसके बाद इन्हें खाली किया जाएगा और यहां के पानी की निकासी सीसीआई परिसर में की जाएगी। इसके बाद पानी निकासी के लिए फिलहाल कोई व्यवस्था विभाग नहीं कर पा रहा है।
वर्जन:
हमने दस ऐसे प्वाइंट चयनित किए हैं जहां जलभराव हो सकता हैं। इन जगहों पर हमने डीजी सैट व पंप सैट रखवाकर कर्मचारियों को यहां नियुक्त कर दिया है। सामान्य से अगर थोड़ी अधिक भी बरसात होती है तो कोई परेशानी नहीं होगी और अगर बारिश ज्यादा हुई तो कुछ हद तक लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं। हम जल्द पानी निकासी की अन्य व्यवस्थाएं भी कर देंगे।
जितेंद्र हुड्डा, एक्सईएन, जन स्वास्थ्य विभाग