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Mahendragarh-Narnaul News: 400 मन पशुचारा व दो ट्राॅली ईंधन जलकर राख
Fri, 01 Nov 2024 11:39 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
Updated Fri, 01 Nov 2024 11:39 PM IST
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फोटाे संख्या:66- गांव सीगड़ा में आगजनी की घटना में जली कड़बी--संवाद
महेंद्रगढ़। गांव सीगड़ा में अज्ञात कारणों के चलते लगी आग में किसान का करीब 400 मन पशुचारा व दो ट्राॅली ईंधन जलकर राख हो गया। किसान ने अज्ञात पर जान बुझकर बाजरे की पुलियों व ईंधन में आग लगाने की आशंका जताई है। वीरवार दिवाली पर्व पर शाम को 5:30 बजे किसान द्वारा एकत्रित की गई बाजरे की पुलियों में आग लग गई। 112 पर कॉल कर सूचना देने के आधे घंटे बाद मौके पर दमकल की टीम पहुंची लेकिन जब तक ईंधन व पशुचारा जलकर राख हो चुका था।
गांव सीगड़ा निवासी पीड़ित किसान कर्मवीर ने बताया कि गत माह बाजरे की कटाई कर उसने रेलवे लाइन के नजदीक अपने खेत में चार ट्राॅली पुलियां तथा दो ट्राॅली ईंधन की एकत्रित की थी। वीरवार शाम के समय लोगों ने आग लगने की सूचना दी। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे तो तेजी से आग फैल चुकी थी। दमकल की टीम के पहुंचने से पहले ही चार ट्राॅली बाजरे की पुलियां व दो ट्राली ईंधन जल चुका था। उसे आशंका है कि किसी ने जान बूझकर आग लगाई हैं, क्योंकि उसका खेत गांव की आबादी से दूर है तथा वहां कोई आतिशबाजी भी नहीं करने पहुंचा। चार ट्राॅेली बाजरे की पुलियां में करीब 400 मन पशु चारा था। साथ ही दो ट्राली ईंधन भी वहीं पर लगाया हुआ था। लोगों के प्रयास से महज आधे एकड़ की पुलियां ही बची। उसकी मांग है कि प्रशासन आर्थिक सहायता करे। अब पशुओं के लिए चारा खरीदना पड़ेगा।
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गांव सीगड़ा निवासी पीड़ित किसान कर्मवीर ने बताया कि गत माह बाजरे की कटाई कर उसने रेलवे लाइन के नजदीक अपने खेत में चार ट्राॅली पुलियां तथा दो ट्राॅली ईंधन की एकत्रित की थी। वीरवार शाम के समय लोगों ने आग लगने की सूचना दी। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे तो तेजी से आग फैल चुकी थी। दमकल की टीम के पहुंचने से पहले ही चार ट्राॅली बाजरे की पुलियां व दो ट्राली ईंधन जल चुका था। उसे आशंका है कि किसी ने जान बूझकर आग लगाई हैं, क्योंकि उसका खेत गांव की आबादी से दूर है तथा वहां कोई आतिशबाजी भी नहीं करने पहुंचा। चार ट्राॅेली बाजरे की पुलियां में करीब 400 मन पशु चारा था। साथ ही दो ट्राली ईंधन भी वहीं पर लगाया हुआ था। लोगों के प्रयास से महज आधे एकड़ की पुलियां ही बची। उसकी मांग है कि प्रशासन आर्थिक सहायता करे। अब पशुओं के लिए चारा खरीदना पड़ेगा।
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