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फ्लैग : नगर निगम चुनाव की आहट से शहर की सियासत गरम

Wed, 16 May 2018 03:12 AM IST
Updated Wed, 16 May 2018 03:12 AM IST
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फ्लैग : नगर निगम चुनाव की आहट से शहर की सियासत गरम
निगम चुनाव की आहट से शहर की सियासत गरम
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भाजपा में मंत्री समर्थक बनाम मंत्री विरोधी गणित, कांग्रेस में जो जीता वही पार्टी का
- चुनाव में इनेलो-बसपा गठबंधन की भी होगी परीक्षा, सांसद सैनी का लोकतंत्र सुरक्षा मंच भी दिखा रहा सक्रियता
- मंत्री विरोधी पार्षद के आवास पर देर रात हुई मीटिंग, फैसला पार्टी टिकट नहीं देगी तो निर्दलीय उतरेंगे मैदान में
- शहर के अंदर वार्ड नंबर 1, 2, 4, 12, 13, 14, 17, 20 व 21 बने हॉट

अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
नगर निगम चुनाव की आहट के साथ ही शहर की सियासत गरम होने लगी है। भाजपा में जहां मंत्री समर्थक बनाम मंत्री विरोधी दो खेमे बनते नजर आ रहे हैं, जबकि कांग्रेस का एक ही गणित है। जो जीतेगा वह कांग्रेसी कहलाएगा, चाहे कांग्रेसी को ही हराकर क्यों न आया हो। साथ ही निगम चुनाव में इनेलो-बसपा गठबंधन और सांसद सैनी के लोकतंत्र सुरक्षा मंच की भी परीक्षा होगी।

टिकट मिली तो ठीक, नहीं तो निर्दलीय मैदान में
ड्रॉ के माध्यम से वार्ड रिजर्व होने के साथ ही चुनाव मैदान में उतरने वाले दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। देर रात मंत्री विरोधी रहे भाजपा पार्षद के आवास पर भाजपा नेता व कार्यकर्ताओं की मीटिंग हुई, जिसमें वे निर्दलीय पार्षद भी शामिल हुए, जो मंत्री के करीबी नहीं हैं। मीटिंग में अपने-अपने वार्ड के अंदर के समीकरण की चर्चा की गई। चिंतन हुआ कि मंत्री किस को उनके वार्ड से पार्टी की टिकट देकर मैदान में उतार सकता है। ऐसी स्थिति आएगी तो वे क्या कदम उठाएंगे। तय हुआ पहले तो पार्टी से टिकट ली जाए, अगर कामयाबी नहीं मिली तो निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर जीत हासिल कर वापस पार्टी से जुड़े जाएं और उन नेताओं को आइना दिखाएं, जो टिकट कटवा रहे हैं।
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आपस में ही भिड़ गए पार्षद व पार्षद पति
सूत्रों ने बताया कि मीटिंग में दो ऐसे नेता भी आ गए, जो एक ही वार्ड से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि पहले दोनों दोस्त रहे हैं। एक साथ बाजार में पसीना बहाया है, लेकिन सियायत के इस मोड़ पर एक-दूसरे के आमने-सामने आ गए हैं। मीटिंग में दोनों ने एक-दूसरे की कमी गिनाई। आपकी वार्ड में सक्रियता नहीं। व्यवहार सही नहीं है, जबकि दूसरे ने कहा कि मेरे एरिया में क्यों आ गए, जहां पहले चुनाव लड़ते थे, वहीं से मैदान में उतरे। हालांकि बाद में दोनों शांत हो गए। इसके बाद भाजपा के दो युवा व उभरते हुए नेता आपस में भिड़ गए। दोनों एक ही वार्ड से मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। एक-दूसरे को अहसास दिलाने लगे कि किसी जमीन कमजोर और किसकी मजबूत है। आखिर में तय हुआ कि पार्टी के अंदर रहकर ही पहले टिकट मांगी जाए।
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कांग्रेस में जो जीता वहीं पार्टी का
उधर, कांग्रेस निकाय चुनाव चिह्न पर लड़ने से परहेज करती रही है। ऐसे में चुनाव में उतरने के दावेदार नेताओं के चक्कर काटने की बजाए खुद को फील्ड में मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। क्योंकि जो जीतकर जाएगा, पार्टी उसी को कांग्रेसी बताएगी। चाहे किसी कांग्रेसी को ही क्यों न हराकर आया हो।


इनेलो-बसपा गठबंधन की पहली परीक्षा
प्रदेश की सियासत को नया मोड़ देने का प्रयास कर रहे इनेलो व बसपा के गठबंधन की निकाय चुनाव पहली परीक्षा होंगे। क्योंकि शहर के एक से छह और 20 नंबर वार्ड में बसपा का काफी प्रभाव माना जा रहा है, जबकि इनेलो का जनाधार बाहरी वार्ड में रहा है। दोनों दल कैसे निकाय चुनाव में उतरते हैं, यह भी दिलचस्प रहेगा। पिछले निगम चुनाव में इनेलो समर्थक बलराज उर्फ बल्लू अपने वार्ड नंबर 9 से जीतने में कामयाब रहे थे।
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