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पंचायतों को लेकर सरकार नहीं है गंभीर : सरपंच
Updated Mon, 14 Aug 2017 12:28 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
ऑल हरियाणा सरपंच संगठन के बैनर तले प्रदेश भर के सरपंच रविवार को दिल्ली रोड स्थित एक होटल में एकत्रित हुए। बैठक का उद्देश्य संगठन की ओर से तैयार की गई 14 मांगों को सरकार से पूरा कराने के लिए रणनीति तैयार करना था। बैठक में पलवल से लेकर पंचकूला के सरपंच एसोसिएशन के जिला प्रधानों ने समस्याएं रखीं। संगठन प्रदेशाध्यक्ष एवं गांव साबन सरपंच एडवोकेट चरण सिंह ने कहा कि सरकार ग्राम पंचायतों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। अधिकारी सरपंचों की बात सुनने को तैयार नहीं है। जबकि असल विकास गांव से ही शुरू होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के सरपंच सरकार के साथ सहयोग करने को तैयार है। बावजूद इसके सरपंचों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही ध्यान नहीं दिया तो प्रदेश संगठन को मजबूत कर मजबूती के साथ सरकार के साथ अपनी बात पहुंचाई जाएगी।
इन मांगों पर हुई चर्चा
बैठक में प्रदेश भर के अधिकतर जिलों के प्रतिनिधि मौजूद थे। बारी-बारी से सभी ने समस्याएं रखते हुए मांगों को मनवाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने की बात कही। सरपंचों की ओर से संविधान में पंचायती राज अधिनियम के 73वें संशोधन को पूर्णत लागू करने, अधिकारियों द्वारा सरपंचों की बात को गंभीरता से लेने, सरपंच पर मामला दर्ज करने से पहले पुलिस अधीक्षक के स्तर पर जांच, सरपंचों का मानदेय तीन की बजाय दस हजार करना एवं अन्य 14 प्रमुख मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की बातों पर चर्चा की गई। बैठक में प्रदीप राझूवास, अंबाला से रणधीर सिंह, फरीदाबाद से विनोद भाटी, झज्जर से सतपाल, रोहतक से राकेश, सोनीपत से मंजीत, गुड़गांव से अजीत सिंह, हिसार से अशोक, करनाल से गुरजेंद्र सिंह, पंचकूला से हरदीप सिंह एवं यमुनानगर से प्रवीण सहित अन्य जिलों के सरपंच एसोसिएशन के पदाधिकारी उपस्थित थे।
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रेवाड़ी।
ऑल हरियाणा सरपंच संगठन के बैनर तले प्रदेश भर के सरपंच रविवार को दिल्ली रोड स्थित एक होटल में एकत्रित हुए। बैठक का उद्देश्य संगठन की ओर से तैयार की गई 14 मांगों को सरकार से पूरा कराने के लिए रणनीति तैयार करना था। बैठक में पलवल से लेकर पंचकूला के सरपंच एसोसिएशन के जिला प्रधानों ने समस्याएं रखीं। संगठन प्रदेशाध्यक्ष एवं गांव साबन सरपंच एडवोकेट चरण सिंह ने कहा कि सरकार ग्राम पंचायतों की मांगों को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। अधिकारी सरपंचों की बात सुनने को तैयार नहीं है। जबकि असल विकास गांव से ही शुरू होता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशभर के सरपंच सरकार के साथ सहयोग करने को तैयार है। बावजूद इसके सरपंचों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जल्द ही ध्यान नहीं दिया तो प्रदेश संगठन को मजबूत कर मजबूती के साथ सरकार के साथ अपनी बात पहुंचाई जाएगी।
इन मांगों पर हुई चर्चा
बैठक में प्रदेश भर के अधिकतर जिलों के प्रतिनिधि मौजूद थे। बारी-बारी से सभी ने समस्याएं रखते हुए मांगों को मनवाने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने की बात कही। सरपंचों की ओर से संविधान में पंचायती राज अधिनियम के 73वें संशोधन को पूर्णत लागू करने, अधिकारियों द्वारा सरपंचों की बात को गंभीरता से लेने, सरपंच पर मामला दर्ज करने से पहले पुलिस अधीक्षक के स्तर पर जांच, सरपंचों का मानदेय तीन की बजाय दस हजार करना एवं अन्य 14 प्रमुख मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की बातों पर चर्चा की गई। बैठक में प्रदीप राझूवास, अंबाला से रणधीर सिंह, फरीदाबाद से विनोद भाटी, झज्जर से सतपाल, रोहतक से राकेश, सोनीपत से मंजीत, गुड़गांव से अजीत सिंह, हिसार से अशोक, करनाल से गुरजेंद्र सिंह, पंचकूला से हरदीप सिंह एवं यमुनानगर से प्रवीण सहित अन्य जिलों के सरपंच एसोसिएशन के पदाधिकारी उपस्थित थे।
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