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अब संस्कृत में जेबीटी कराएगा शिक्षा बोर्ड
Updated Tue, 02 Jan 2018 01:13 AM IST
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अब संस्कृत में जेबीटी कराएगा शिक्षा बोर्ड
भिवानी।
हिंदी, पंजाबी और उर्दू के बाद अब हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड संस्कृत भाषा में भी जेबीटी (डीएलएड) कराएगा। शिक्षा बोर्ड के निदेशक मंडल ने अपनी अनुमति दे दी है। निर्णय पर अंतिम मुहर के लिए राज्य सरकार को भेजा है। माना जा रहा है कि अगले शैक्षणिक सत्र से पहले इसे लागू कर दिया जाएगा। इस फैसले को स्कूल स्तर पर संस्कृत भाषा के विस्तार की दीर्घकालिक योजना के रूप में देखा जा रहा है।
प्राथमिक स्कूलों में संस्कृत की पढ़ाई के लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने कदम आगे बढ़ाए हैं। पहली कड़ी में शिक्षा बोर्ड ने संस्कृत भाषा के प्राइमरी टीचर को तैयार करने की योजना बनाई है। अब तक हिंदी के अलावा पंजाबी और उर्दू भाषा के जानकार ही प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को पढ़ाते हैं। इन्हीं भाषाओं के माध्यम से बोर्ड जेबीटी कोर्स कराता है। बता दें कि पहले जूनियर बेसिक टीचर कोर्स आजकल डीएलएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) के नाम से जाना जाता है।
सूत्र बताते हैं कि शिक्षा बोर्ड ने संस्कृत भाषा के माध्यम जेबीटी यानि डीएलएड कोर्स कराने का निर्णय लिया है। पाठ्यक्रम समान रहेगा, केवल माध्यम संस्कृत होगा। बोर्ड ने इस प्रस्ताव को निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) की बैठक में रखा, जिसे अनुमोदित भी कर दिया। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इस फैसले को मूर्त रूप ले लेगा। बताया जाता है कि अगले शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले इस पर निर्णय हो जाएगा।
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वर्शन.....
हां, संस्कृत भाषा में जेबीटी कोर्स कराने का निर्णय लिया गया है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मीटिंग में पास हो चुका है। अब इसे मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा गया है। बच्चों को पहली कक्षा से संस्कृत पढ़ाने के लिए यह पहल की गई है। जब संस्कृत का पूरे विश्व में बोलबाला है तो फिर बच्चों को संस्कृत का ज्ञान जरूरी है। संस्कृत के माध्यम से डीएलएड कोर्स की कितनी सीट होंगी, यह बाद में तय होगा।
-डा. जगबीर सिंह
चेयरमैन, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड
--
अब घर बैठे हो सकेगी प्रमाण-पत्रों की वेरिफिकेशन
उधर, नव वर्ष पर शिक्षा बोर्ड में आयोजित कार्यक्रम में चेयरमैन डॉ. जगबीर सिंह ने बताया कि नए साल पर बोर्ड ने तीन नए फैसले लिए हैं। उन्होंने बताया कि नौकरियां पाने वाले बच्चों के प्रमाण पत्रों की वेरिफिकेशन अब ऑॅनलाइन हो सकेगा। इसके अलावा वर्ष 2004 से 2017 तक की सभी परीक्षाओं के परिणामों को ऑॅनलाइन किया जाएगा। इतना सब होने के बाद अध्यापकों व बच्चों को संबंधित कार्यों के लिए बोर्ड में नहीं आना होगा और वे घर बैठे ही अपना काम कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रमाण पत्रों की वेरिफिकेशन के लिए हर विभाग को एक कोड दिया जाएगा जिससे वो वहीं से वेरिफिकेशन कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि परीक्षाओं में ड्यूटी देने वाले अध्यापकों का मानदेय समय पर जारी करने के लिए बोर्ड की अकाउंट ब्रांच को ऑॅनलाइन किया जाएगा। ड्यूटी देने वाले अध्यापकों का मानदेय 40 से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है।
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भिवानी।
हिंदी, पंजाबी और उर्दू के बाद अब हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड संस्कृत भाषा में भी जेबीटी (डीएलएड) कराएगा। शिक्षा बोर्ड के निदेशक मंडल ने अपनी अनुमति दे दी है। निर्णय पर अंतिम मुहर के लिए राज्य सरकार को भेजा है। माना जा रहा है कि अगले शैक्षणिक सत्र से पहले इसे लागू कर दिया जाएगा। इस फैसले को स्कूल स्तर पर संस्कृत भाषा के विस्तार की दीर्घकालिक योजना के रूप में देखा जा रहा है।
प्राथमिक स्कूलों में संस्कृत की पढ़ाई के लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने कदम आगे बढ़ाए हैं। पहली कड़ी में शिक्षा बोर्ड ने संस्कृत भाषा के प्राइमरी टीचर को तैयार करने की योजना बनाई है। अब तक हिंदी के अलावा पंजाबी और उर्दू भाषा के जानकार ही प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को पढ़ाते हैं। इन्हीं भाषाओं के माध्यम से बोर्ड जेबीटी कोर्स कराता है। बता दें कि पहले जूनियर बेसिक टीचर कोर्स आजकल डीएलएड (डिप्लोमा इन एजुकेशन) के नाम से जाना जाता है।
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सूत्र बताते हैं कि शिक्षा बोर्ड ने संस्कृत भाषा के माध्यम जेबीटी यानि डीएलएड कोर्स कराने का निर्णय लिया है। पाठ्यक्रम समान रहेगा, केवल माध्यम संस्कृत होगा। बोर्ड ने इस प्रस्ताव को निदेशक मंडल (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स) की बैठक में रखा, जिसे अनुमोदित भी कर दिया। सरकार की मंजूरी मिलने के बाद इस फैसले को मूर्त रूप ले लेगा। बताया जाता है कि अगले शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले इस पर निर्णय हो जाएगा।
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वर्शन.....
हां, संस्कृत भाषा में जेबीटी कोर्स कराने का निर्णय लिया गया है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर की मीटिंग में पास हो चुका है। अब इसे मंजूरी के लिए सरकार के पास भेजा गया है। बच्चों को पहली कक्षा से संस्कृत पढ़ाने के लिए यह पहल की गई है। जब संस्कृत का पूरे विश्व में बोलबाला है तो फिर बच्चों को संस्कृत का ज्ञान जरूरी है। संस्कृत के माध्यम से डीएलएड कोर्स की कितनी सीट होंगी, यह बाद में तय होगा।
-डा. जगबीर सिंह
चेयरमैन, हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड
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अब घर बैठे हो सकेगी प्रमाण-पत्रों की वेरिफिकेशन
उधर, नव वर्ष पर शिक्षा बोर्ड में आयोजित कार्यक्रम में चेयरमैन डॉ. जगबीर सिंह ने बताया कि नए साल पर बोर्ड ने तीन नए फैसले लिए हैं। उन्होंने बताया कि नौकरियां पाने वाले बच्चों के प्रमाण पत्रों की वेरिफिकेशन अब ऑॅनलाइन हो सकेगा। इसके अलावा वर्ष 2004 से 2017 तक की सभी परीक्षाओं के परिणामों को ऑॅनलाइन किया जाएगा। इतना सब होने के बाद अध्यापकों व बच्चों को संबंधित कार्यों के लिए बोर्ड में नहीं आना होगा और वे घर बैठे ही अपना काम कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि प्रमाण पत्रों की वेरिफिकेशन के लिए हर विभाग को एक कोड दिया जाएगा जिससे वो वहीं से वेरिफिकेशन कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि परीक्षाओं में ड्यूटी देने वाले अध्यापकों का मानदेय समय पर जारी करने के लिए बोर्ड की अकाउंट ब्रांच को ऑॅनलाइन किया जाएगा। ड्यूटी देने वाले अध्यापकों का मानदेय 40 से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया गया है।