{"_id":"5b15ac8d4f1c1b254d8b4b28","slug":"181528147085-rohtak-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाईकोर्ट से पीजीआईएमएस को एक साल में तीसरा बड़ा झटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाईकोर्ट से पीजीआईएमएस को एक साल में तीसरा बड़ा झटका
Updated Tue, 05 Jun 2018 02:52 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट से पीजीआईएमएस को एक साल में तीसरा बड़ा झटका
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अमित मान के निलंबन पर लगा स्टे
फोटो : एसएनजे नौ डॉ. अमित मान
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को वर्ष 2018 में हाईकोर्ट की ओर से एक के बाद एक तीन बडे़ मामलों में झटका लगा है। संस्थान के अस्पताल प्रबंधन विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. बिजेंद्र ढिल्लों, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला के बाद सोमवार को नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित मान को भी हाईकोर्ट ने एक जून 2018 को राहत दे दी है। अब डॉ. अमित मान केस का निर्णय होने तक अपनी सीट व विभाग में बने रहेंगे।
डॉ. अमित मान को 11 मई को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी हेल्थ हरियाणा के निर्देशों पर निलंबित किया गया था। अधिकारियों ने इस निलंबन को बाकायदा कार्यकारिणी की बैठक में भी मंजूरी दे दी और इस केस को स्टेट विजिलेंस तक भेजने पर मुहर लगा दी। संस्थान के इस आदेश को चैलेंज करते हुए डॉ. मान ने हाईकोर्ट में अपील डाली। इसमें बताया गया कि डॉ. मान को निलंबित करने में कुलपति ने अपनी शक्तियों का प्रयोग नहीं किया और एसीएस के आदेशों के तहत कार्रवाई की गई। माना जा रहा है कि डॉ. मान ने नेफ्रोलॉजी विभाग में चल रही मेडिसिन की हस्तक्षेप व कई मामलों को आधार बनाया है। इसमें स्वयं डॉ. मान कई गड़बड़ियों की शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत पर कार्रवाई करने की बजाय अधिकारियों ने उल्टे शिकायत करने वाले पर ही कार्रवाई कर दी।
इस केस में अगली तारीख नौ जुलाई लगी है और स्टेट ऑफ हरियाणा तथा पीजीआईएमएस रोहतक को पार्टी बनाया गया है। इन दोनों को नोटिस जारी हो गया है। गौरतलब है कि डॉ. अमित मान ने अपने पद से पहले इस्तीफा दिया और उन्होंने तय समय से पहले अपनी ड्यूटी जॉइन कर ली। इसके बाद जब दूसरी बार इस्तीफा दिया तो उन्हें तय समय से पहले ही रिलीव कर दिया। इस पर डॉ. मान कोर्ट से स्टे ले आए और ड्यूटी पर लौट आए। अब डॉ. मान को जब निलंबित किया गया तो वह हाईकोर्ट से फिर स्टे ले आए हैं।
विज्ञापन
ये भी हैं मामले
अस्पताल प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. बिजेंद्र ढिल्लोें को जब निलंबित किया गया तो वह हाईकोर्ट चले गए। इसमें सवाल उठा कि ऐसी कोई परिस्थितियां नहीं थीं कि डॉ. ढिल्लों को निलंबित किया जाए। इसके बाद बाल रोग विभागाध्यक्ष को बाल रोग से नियोनेटल विभाग में शिफ्ट किया जा रहा था तो वह भी हाईकोर्ट से स्टे ले आईं। वर्तमान में डॉ. गीता गठवाला तो दोनों विभागों की विभागाध्यक्ष हैं।
केवियट लगाने से चूका संस्थान
पूर्व निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता की ओर से कोर्ट में निदेशक पद के लिए किए जाने वाले दावे को लेकर संस्थान अलर्ट था, इसके चलते अधिकारियों ने पहले ही लोअर व अपर कोर्ट में केवियट लगवा दी। लेकिन डॉ. अमित मान को निलंबित कर अधिकारी केवियट लगाने से चूक गए और वह निलंबन पर स्टे लेकर आ गए।
आपसी विवाद पडे़गा महंगा
मेडिसन विभाग और नेफ्रोलॉजी विभाग में चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट में संस्थान को महंगा पड़ने वाला है। क्योंकि संस्थान की जांच में अधिकारियों की मनमर्जी चल रही थी। जिस शिकायत पर मन आया जांच हो रही थी और कई दबाई जा रही थी। लेकिन हाईकोर्ट में अब सभी मामलों में सवाल-जवाब होंगे। गौरतलब है जहां नेफ्रोलॉजी विभाग की शिकायत पर जांच हो रही थी वहीं सवाल उठेगा कि जो शिकायत और सबूत नेफ्रोलॉजी विभाग ने दिए उनका क्या हुआ। अधिकारियों ने एक तरफ शिकायत पर जांच कर कार्रवाई कर दी, जबकि अन्य शिकायतों का क्या हुआ। सूत्रों की मानें तो हाल ही में मेडिसिन विभाग ने नेफ्रोलॉजी विभाग पर कब्जा करना शुरू कर दिया था, मरीजों को भी इधर-उधर शिफ्ट कर दिया गया। माना जा रहा है मंगलवार से नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अमित मान फिर ओपीडी में मरीजों की जांच करेंगे।
विज्ञापन
नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अमित मान के निलंबन पर लगा स्टे
फोटो : एसएनजे नौ डॉ. अमित मान
अमर उजाला ब्यूरो
रोहतक।
पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को वर्ष 2018 में हाईकोर्ट की ओर से एक के बाद एक तीन बडे़ मामलों में झटका लगा है। संस्थान के अस्पताल प्रबंधन विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. बिजेंद्र ढिल्लों, बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गठवाला के बाद सोमवार को नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमित मान को भी हाईकोर्ट ने एक जून 2018 को राहत दे दी है। अब डॉ. अमित मान केस का निर्णय होने तक अपनी सीट व विभाग में बने रहेंगे।
डॉ. अमित मान को 11 मई को एडिशनल चीफ सेक्रेटरी हेल्थ हरियाणा के निर्देशों पर निलंबित किया गया था। अधिकारियों ने इस निलंबन को बाकायदा कार्यकारिणी की बैठक में भी मंजूरी दे दी और इस केस को स्टेट विजिलेंस तक भेजने पर मुहर लगा दी। संस्थान के इस आदेश को चैलेंज करते हुए डॉ. मान ने हाईकोर्ट में अपील डाली। इसमें बताया गया कि डॉ. मान को निलंबित करने में कुलपति ने अपनी शक्तियों का प्रयोग नहीं किया और एसीएस के आदेशों के तहत कार्रवाई की गई। माना जा रहा है कि डॉ. मान ने नेफ्रोलॉजी विभाग में चल रही मेडिसिन की हस्तक्षेप व कई मामलों को आधार बनाया है। इसमें स्वयं डॉ. मान कई गड़बड़ियों की शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिकायत पर कार्रवाई करने की बजाय अधिकारियों ने उल्टे शिकायत करने वाले पर ही कार्रवाई कर दी।
विज्ञापन
इस केस में अगली तारीख नौ जुलाई लगी है और स्टेट ऑफ हरियाणा तथा पीजीआईएमएस रोहतक को पार्टी बनाया गया है। इन दोनों को नोटिस जारी हो गया है। गौरतलब है कि डॉ. अमित मान ने अपने पद से पहले इस्तीफा दिया और उन्होंने तय समय से पहले अपनी ड्यूटी जॉइन कर ली। इसके बाद जब दूसरी बार इस्तीफा दिया तो उन्हें तय समय से पहले ही रिलीव कर दिया। इस पर डॉ. मान कोर्ट से स्टे ले आए और ड्यूटी पर लौट आए। अब डॉ. मान को जब निलंबित किया गया तो वह हाईकोर्ट से फिर स्टे ले आए हैं।
विज्ञापन
ये भी हैं मामले
अस्पताल प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. बिजेंद्र ढिल्लोें को जब निलंबित किया गया तो वह हाईकोर्ट चले गए। इसमें सवाल उठा कि ऐसी कोई परिस्थितियां नहीं थीं कि डॉ. ढिल्लों को निलंबित किया जाए। इसके बाद बाल रोग विभागाध्यक्ष को बाल रोग से नियोनेटल विभाग में शिफ्ट किया जा रहा था तो वह भी हाईकोर्ट से स्टे ले आईं। वर्तमान में डॉ. गीता गठवाला तो दोनों विभागों की विभागाध्यक्ष हैं।
केवियट लगाने से चूका संस्थान
पूर्व निदेशक डॉ. राकेश गुप्ता की ओर से कोर्ट में निदेशक पद के लिए किए जाने वाले दावे को लेकर संस्थान अलर्ट था, इसके चलते अधिकारियों ने पहले ही लोअर व अपर कोर्ट में केवियट लगवा दी। लेकिन डॉ. अमित मान को निलंबित कर अधिकारी केवियट लगाने से चूक गए और वह निलंबन पर स्टे लेकर आ गए।
आपसी विवाद पडे़गा महंगा
मेडिसन विभाग और नेफ्रोलॉजी विभाग में चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट में संस्थान को महंगा पड़ने वाला है। क्योंकि संस्थान की जांच में अधिकारियों की मनमर्जी चल रही थी। जिस शिकायत पर मन आया जांच हो रही थी और कई दबाई जा रही थी। लेकिन हाईकोर्ट में अब सभी मामलों में सवाल-जवाब होंगे। गौरतलब है जहां नेफ्रोलॉजी विभाग की शिकायत पर जांच हो रही थी वहीं सवाल उठेगा कि जो शिकायत और सबूत नेफ्रोलॉजी विभाग ने दिए उनका क्या हुआ। अधिकारियों ने एक तरफ शिकायत पर जांच कर कार्रवाई कर दी, जबकि अन्य शिकायतों का क्या हुआ। सूत्रों की मानें तो हाल ही में मेडिसिन विभाग ने नेफ्रोलॉजी विभाग पर कब्जा करना शुरू कर दिया था, मरीजों को भी इधर-उधर शिफ्ट कर दिया गया। माना जा रहा है मंगलवार से नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. अमित मान फिर ओपीडी में मरीजों की जांच करेंगे।