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पीजीआईएमएस निदेशक के तीन दिन के अल्टीमेटम के बाद संस् थान में हड़कंप
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रोहतक। पीजीआईएमएस में गार्ड घोटाले के साथ अवैध हवाई यात्रा मामले में संस्थान अपने डॉक्टरों को बचाने की हर संभव कोशिश कर रहा है। हैरानी की बात है कि दोनों ही मामलों का पटाक्षेप हो चुका है, इसके बावजूद जांच में इसे लटकाया जा रहा है। निजी दवा कंपनी के खर्च पर हवाई यात्रा करने के मामले में निदेशक ने तीन दिन में रिपोर्ट तलब तो कर ली है। लेकिन संस्थान परेशान है कि यह रिपोर्ट मीडिया तक कैसे पहुंची।
निदेशक के जारी निर्देशानुसार सोमवार को सभी डॉक्टरों को अपनी विदेशी हवाई यात्राओं की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें डॉक्टरों को बताना होगा कि वह कहां-कहां गए और उसका खर्च किस अकाउंट से किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकारी डॉक्टर बगैर अनुमति के विदेश यात्रा कर आया। यदि निदेशक कार्यालय को इसकी जानकारी है तो उसे पूछने की क्या जरूरत है, उसके पास सारा रिकार्ड उपलब्ध है। संस्थान के डॉक्टर अपनी कलम से इस संबंध में कुछ लिखना नहीं चाहते और संस्थान अपनी ओर से रिकार्ड सरकार के पास भेजना नहीं चाहते। कुछ मिला कर सभी डॉक्टर एक दूसरे को बचाने में लगे हैं। वहीं संस्थान में कुछ ऐसे डॉक्टर भी हैं जोकि कहीं बाहर नहीं गए और वह राहत की सांस ले रहे हैं कि वह इस विवाद में नहीं उलझ रहे हैं।
सुरक्षा अधिकारी बदले तो उनके लगाए कर्मचारियों पर भी तलवार
संस्थान में प्रशासन की मनमानी का आलम यह है कि डॉक्टरों के गलत कारनामों को उजागर करने वाले सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र सरोहा का कार्य समय नहीं बढ़ाया गया, जबकि अन्य कर्मचारियों का समय बढ़ा दिया गया। बात यहीं समाप्त नहीं हुई, अब पिछले तीन माह में लगाए गए कर्मचारियों की लिस्ट बनाई जा रही है कि उन्हें नौकरी से निकाला जाए। इस पर सवाल उठाया जा रहा है कि अभी गेहूं की कटाई का सीजन है, यदि 35 कर्मचारियों को एक साथ हटा दिया गया तो वह कर्मचारियों की संख्या पूरी कहां से करेंगे। बताया जा रहा है कि इसमें कुछ कर्मचारी प्रशासनिक स्तर पर लगाए गए हैं, जिन्हें हटाने की किसी की हिम्मत नहीं है। बाकी के कर्मचारी इस मामले को लेबर कोर्ट तक ले जाने की तैयारी में हैं। गौरतलब है कि नरेंद्र सरोहा ने साढे़ आठ करोड़ का इम्प्लांट जब्त करने के अलावा ब्लड बैंक के काले कारनामे को उजागर किया था। इन मामलों को उजागर करते ही वह संस्थान के डॉक्टरों की नजरों में खटकने लगे थे।
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निदेशक के जारी निर्देशानुसार सोमवार को सभी डॉक्टरों को अपनी विदेशी हवाई यात्राओं की जानकारी उपलब्ध करानी होगी। इसमें डॉक्टरों को बताना होगा कि वह कहां-कहां गए और उसका खर्च किस अकाउंट से किया गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या सरकारी डॉक्टर बगैर अनुमति के विदेश यात्रा कर आया। यदि निदेशक कार्यालय को इसकी जानकारी है तो उसे पूछने की क्या जरूरत है, उसके पास सारा रिकार्ड उपलब्ध है। संस्थान के डॉक्टर अपनी कलम से इस संबंध में कुछ लिखना नहीं चाहते और संस्थान अपनी ओर से रिकार्ड सरकार के पास भेजना नहीं चाहते। कुछ मिला कर सभी डॉक्टर एक दूसरे को बचाने में लगे हैं। वहीं संस्थान में कुछ ऐसे डॉक्टर भी हैं जोकि कहीं बाहर नहीं गए और वह राहत की सांस ले रहे हैं कि वह इस विवाद में नहीं उलझ रहे हैं।
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सुरक्षा अधिकारी बदले तो उनके लगाए कर्मचारियों पर भी तलवार
संस्थान में प्रशासन की मनमानी का आलम यह है कि डॉक्टरों के गलत कारनामों को उजागर करने वाले सुरक्षा अधिकारी नरेंद्र सरोहा का कार्य समय नहीं बढ़ाया गया, जबकि अन्य कर्मचारियों का समय बढ़ा दिया गया। बात यहीं समाप्त नहीं हुई, अब पिछले तीन माह में लगाए गए कर्मचारियों की लिस्ट बनाई जा रही है कि उन्हें नौकरी से निकाला जाए। इस पर सवाल उठाया जा रहा है कि अभी गेहूं की कटाई का सीजन है, यदि 35 कर्मचारियों को एक साथ हटा दिया गया तो वह कर्मचारियों की संख्या पूरी कहां से करेंगे। बताया जा रहा है कि इसमें कुछ कर्मचारी प्रशासनिक स्तर पर लगाए गए हैं, जिन्हें हटाने की किसी की हिम्मत नहीं है। बाकी के कर्मचारी इस मामले को लेबर कोर्ट तक ले जाने की तैयारी में हैं। गौरतलब है कि नरेंद्र सरोहा ने साढे़ आठ करोड़ का इम्प्लांट जब्त करने के अलावा ब्लड बैंक के काले कारनामे को उजागर किया था। इन मामलों को उजागर करते ही वह संस्थान के डॉक्टरों की नजरों में खटकने लगे थे।
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